आशा पारेख ने फिल्मों की दुनिया में बतौर बाल कलाकार कदम रखा और आगे चलकर हिंदी सिनेमा की प्रमुख अभिनेत्रियों में शामिल हुईं।
1959 में आई दिल देके देखो में उन्होंने मुख्य अभिनेत्री के रूप में डेब्यू किया और फिल्म की सफलता ने उन्हें पहचान दिलाई।
आशा पारेख ने अपने लंबे फिल्मी करियर में 95 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया।
1971 की कटी पतंग में उनके अभिनय को खास पहचान मिली और इसी फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार मिला।
तीसरी मंजिल में आशा पारेख ने अपने अभिनय के साथ फिल्म के संगीत और डांस सीक्वेंस के जरिए भी दर्शकों का ध्यान खींचा।
लव इन टोक्यो ने उन्हें उस दौर की लोकप्रिय अभिनेत्रियों में और मजबूत पहचान दिलाई।
अपने करियर में उन्होंने राजेश खन्ना, धर्मेंद्र, शम्मी कपूर, मनोज कुमार और देव आनंद जैसे प्रमुख अभिनेताओं के साथ काम किया।
आशा पारेख ने सिर्फ अभिनय तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि निर्देशन और निर्माण के क्षेत्र में भी काम किया।
भारत सरकार ने उन्हें 1992 में पद्मश्री से सम्मानित किया।
वर्ष 2002 में उन्हें फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
आशा पारेख ने 1998 से 2001 तक केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) की अध्यक्ष के रूप में काम किया और इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला रहीं।
1960 और 1970 के दशक में लगातार लोकप्रिय फिल्मों में नजर आने के कारण उन्हें हिंदी सिनेमा में ‘हिट गर्ल’ के नाम से भी जाना गया।
वर्ष 2020 के लिए उन्हें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार दिया गया, जिसे 30 सितंबर 2022 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रदान किया।
दादा साहेब फाल्के पुरस्कार उनके भारतीय सिनेमा में जीवनभर के योगदान की मान्यता के रूप में दिया गया।