WGC और BCG की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्लोबल डिजिटल गो

2031 तक 170 अरब डॉलर का हो सकता है डिजिटल गोल्ड मार्केट, भारत में 12 करोड़ से ज्यादा यूजर्स

डिजिटल गोल्ड में निवेश का बढ़ेगा क्रेज

नई दिल्ली: वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल और बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप की एक जॉइंट रिपोर्ट के मुताबिक, ग्लोबल डिजिटल गोल्ड मार्केट 2031 तक USD 160-170 बिलियन तक बढ़ सकता है, जो अभी USD 45-55 बिलियन का अनुमानित साइज़ है। अगर इंडस्ट्री भरोसे, एक्सेस, प्राइसिंग और प्रोडक्ट यूटिलिटी से जुड़ी चिंताओं को दूर करती है, तो यह बात कही गई है। रिपोर्ट का अनुमान है कि इन रुकावटों को हटाने से लंबे समय में USD 700 बिलियन तक की एक्स्ट्रा डिमांड मिल सकती है। हालांकि, WGC ने साफ किया कि यह आंकड़ा शॉर्ट-टर्म मार्केट फोरकास्ट के बजाय पोटेंशियल डिमांड को दिखाता है। रिपोर्ट में कहा गया है, अगर स्टेकहोल्डर्स अपनाने में आने वाली मुख्य रुकावटों को दूर करते हैं, तो वे पार्टिसिपेशन और पोर्टफोलियो एलोकेशन दोनों को बढ़ा सकते हैं, जिससे छिपी हुई डिमांड में $700 बिलियन तक की बढ़ोतरी हो सकती है। अगर इसे पूरी तरह से लागू किया जाए, तो इससे एक ऐसा मार्केट बनेगा जो आज फिजिकली बैक्ड गोल्ड ETFs से काफी हद तक मैच करेगा।

निवेशकों का भरोसा बढ़ाना सबसे बड़ी चुनौती

अपने बेस-केस सिनेरियो में डिजिटल गोल्ड मार्केट के अगले पांच सालों में लगभग 27 परसेंट की सालाना दर से बढ़ने का अनुमान है, जो 2031 तक USD 160-170 बिलियन तक पहुंच जाएगा। ज़्यादा पॉजिटिव सिनेरियो में मार्केट USD 270-280 बिलियन तक बढ़ सकता है, जबकि अगर मौजूदा रुकावटों को ज़्यादातर दूर नहीं किया गया तो यह सिर्फ़ USD 70-80 बिलियन तक पहुंच सकता है। यह रिपोर्ट 12 मार्केट में 12,000 से ज़्यादा रिटेल इन्वेस्टर्स के सर्वे और 20 इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के इंटरव्यू पर आधारित है। इसमें पाया गया कि अगर मुख्य रुकावटों को दूर किया गया तो 10 में से लगभग नौ इन्वेस्टर्स डिजिटल गोल्ड में इन्वेस्ट करने पर विचार करेंगे, जो कंज्यूमर की दिलचस्पी और असल इन्वेस्टमेंट के बीच के अंतर को दिखाता है। रिपोर्ट में कहा गया, दूसरे शब्दों में डिमांड समस्या नहीं है। कन्वर्ज़न समस्या है। इन्वेस्टर्स के मज़बूत भरोसे और डिजिटल गोल्ड प्रोडक्ट्स तक ज़्यादा पहुंच की ज़रूरत की ओर इशारा किया गया। भरोसा अपनाने में असर डालने वाला सबसे बड़ा फैक्टर बनकर उभरा। लगभग 

डिजिटल गोल्ड में निवेश के लिए भरोसा और पारदर्शिता अहम

पांच में से चार इन्वेस्टर्स ने कहा कि उन्होंने इन्वेस्ट करने से पहले प्रोवाइडर पर भरोसा करने को प्राथमिकता दी। रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि अगर साफ़ रेगुलेशन और मज़बूत कंज्यूमर प्रोटेक्शन उपलब्ध हो, तो 35 परसेंट जवाब देने वाले डिजिटल गोल्ड के लिए ज़्यादा तैयार होंगे, जबकि 33 परसेंट ने फिजिकल गोल्ड बैकिंग के बेहतर प्रूफ और ट्रांसपेरेंसी का हवाला दिया। जाने-पहचाने प्लेटफॉर्म के ज़रिए एक्सेस से भी इसे ज़्यादा अपनाया जा सकता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि जिन मार्केट में बैंकिंग ऐप, पेमेंट प्लेटफॉर्म और दूसरे मेनस्ट्रीम चैनलों के ज़रिए डिजिटल गोल्ड उपलब्ध है, उनमें ऐसे डिस्ट्रीब्यूशन के बिना मार्केट की तुलना में सात गुना ज़्यादा पेनेट्रेशन रेट दर्ज किया गया है। 

भारत में 12 करोड़ से ज्यादा डिजिटल गोल्ड यूजर्स

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में पहले से ही 120 मिलियन से ज़्यादा कस्टमर हैं जो डिजिटल गोल्ड ट्रांज़ैक्शन में शामिल हैं। WGC ने कहा कि डिजिटल गोल्ड फिजिकल गोल्ड या गोल्ड-बैक्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड से पैसा हटाने के बजाय गोल्ड मार्केट में नए इन्वेस्टर ला सकता है। लगभग 65 परसेंट संभावित नई डिमांड उन लोगों से आने का अनुमान है जिनके पास अभी सोना नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भविष्य की ग्रोथ साफ़ रेगुलेशन, फ़िज़िकल गोल्ड में आसानी से भुनाने, कॉम्पिटिटिव प्राइसिंग और लोन, पेमेंट और गोल्ड होल्डिंग्स को कोलैटरल के तौर पर इस्तेमाल करने जैसे नए इस्तेमाल पर निर्भर करेगी। 

(इनपुट: ANI)

ये भी पढ़ें- चीन की टेराकोटा आर्मी पर नई स्टडी, 45% कारीगरों के पुरुष होने का अनुमान