सरकार ने कहा कि E20 पेट्रोल से कच्चे तेल के आयात म

E20 पेट्रोल पर सरकार का बड़ा बयान, महंगा होने के बावजूद ऊर्जा सुरक्षा और किसानों को फायदा

E20 Petrol May Cost More Today, But Boosts Energy Security and Farmer Income: Government

नई दिल्ली,(भारत)। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा है, कि मौजूदा वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों पर E20 पेट्रोल का उत्पादन शुद्ध पेट्रोल की तुलना में अधिक महंगा है, लेकिन इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम भारतीय उपभोक्ताओं को वैश्विक तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाने में मदद कर रहा है और साथ ही देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत कर रहा है।

इथेनॉल का आर्थिक व्यवहार अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर

मंत्रालय के अनुसार, इथेनॉल मिश्रित ईंधन की आर्थिक व्यवहार अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करती है। मंत्रालय ने बताया, कि वर्तमान में मक्का आधारित इथेनॉल को जीएसटी, परिवहन, भंडारण और डिपो संचालन लागतों को शामिल किए बिना लगभग 71.86 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदा जा रहा है।

इथेनॉल आधारित ईंधन आर्थिक रूप से अधिक किफायती

मंत्रालय ने कहा, कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत लगभग 70 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल रहती है, तो E20 ईंधन का उत्पादन शुद्ध पेट्रोल की तुलना में अधिक महंगा पड़ता है। हालांकि, यदि कच्चे तेल की कीमत बढ़कर 120–130 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाती है, तो स्थिति बदल जाती है और इथेनॉल आधारित ईंधन आर्थिक रूप से अधिक किफायती हो जाता है।

प्रत्येक लीटर पेट्रोल में लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा घरेलू स्तर पर उत्पादित

मंत्रालय ने आगे कहा कि मुख्य प्रश्न यह है, कि भारत ने वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव के प्रभाव से उपभोक्ताओं को किस तरह सुरक्षित रखा है। मंत्रालय के अनुसार, भारत में वर्तमान में बेचे जा रहे प्रत्येक लीटर पेट्रोल में लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा घरेलू स्तर पर उत्पादित इथेनॉल का है। इससे आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम होती है और अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में बदलाव का असर ईंधन लागत पर सीमित रहता है।

1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत

मंत्रालय के मुताबिक, इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम के कारण अब तक 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत, लगभग 316 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल का प्रतिस्थापन, करीब 952 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी और 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान सीधे किसानों को किया जा चुका है।

संबंधित पक्षों के साथ व्यापक विचार-विमर्श

मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया, कि इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को लेकर उठाई जा रही चिंताओं के जवाब में यह जानकारी दी गई है। इसके अनुसार, भारत का E20  की ओर बढ़ना एक चरणबद्ध प्रक्रिया रही है, जो दो दशकों से अधिक समय में विकसित हुई है। इसके कार्यान्वयन से पहले वाहन निर्माताओं, तेल विपणन कंपनियों, परीक्षण संस्थानों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया गया था। (एएनआई)

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