यूएस टेक शेयरों में बिकवाली के बीच भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों की वापसी, 38,971 करोड़ रुपये का निवेश
नई दिल्ली। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय इक्विटी बाजारों में जोरदार वापसी की है। एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर एआई शेयरों में बिकवाली के बीच एफपीआई ने इस हफ्ते 38,971 करोड़ रुपये का निवेश किया है।
वैश्विक तकनीकी शेयरों में भारी बिकवाली
ग्लोबल टेक शेयरों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े निवेश को लेकर पैदा हुई चिंताओं और डेटा सेंटर के खर्च में संभावित सुस्ती के चलते यह बदलाव आया है। इसके पहले जब वैश्विक निवेश एआई-केंद्रित बाजारों की ओर शिफ्ट हो रहे थे, तब विदेशी निवेशक भारतीय इक्विटी बेच रहे थे। हालांकि, वैश्विक एआई शेयरों में हालिया करेक्शन ने भारतीय बाजारों को दोबारा आकर्षक बना दिया है।
वॉल स्ट्रीट की भारी गिरावट और रिकॉर्ड नुकसान
वैश्विक शेयर बाजारों में गुरुवार को भारी बिकवाली हुई और शुक्रवार को भी यह मंदी जारी रही। अमेरिकी टेक शेयरों में भारी बिकवाली के कारण वॉल स्ट्रीट की चुनाव-बाद की तेजी पूरी तरह खत्म हो गई। AI से जुड़े डेटा सेंटर निवेश में संभावित सुस्ती की चिंताओं ने वैश्विक बाजारों में नुकसान को बढ़ावा दिया।
अमेरिका के तीनों प्रमुख सूचकांकों में गुरुवार को अप्रैल 2025 के बाद की सबसे बड़ी एक-दिवसीय गिरावट दर्ज की गई, जिससे बिकवाली का दबाव और बढ़ गया। इस गिरावट ने बुधवार की चुनाव-बाद वाली तेजी के फायदों को पूरी तरह मिटा दिया; उस दिन डॉव जोन्स 1,500 अंकों से अधिक उछला था, जो अप्रैल 2025 के बाद उसका सबसे अच्छा कारोबारी दिन था।
संस्थागत रुझानों में अचानक और बड़ा उलटफेर
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी.के. विजयकुमार ने बताया कि पिछले हफ्ते संस्थागत निवेश के रुझानों में अचानक बदलाव आया, जहां एफपीआई आक्रामक खरीदार बन गए जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक सभी कारोबारी दिनों में बिकवाल बने रहे।
"पिछले हफ्ते बाजार में संस्थागत निवेशकों की भूमिका पूरी तरह से बदल गई - FPIs आक्रामक खरीदार बन गए, जबकि DIIs सभी दिनों में बिकवाल रहे। FPIs की आक्रामक खरीदारी और इसके परिणामस्वरूप हुए शॉर्ट स्क्वीज ने बाजार में एक बड़ी तेजी ला दी, जिससे एक हफ्ते में निफ्टी 7.58% ऊपर चढ़ गया।"
अमेरिकी राजनीति और डेटा सेंटर खर्च पर चिंताएं
विजयकुमार ने बताया कि FPIs की निवेश रणनीति में यह अचानक बदलाव अमेरिका और दक्षिण कोरिया, ताइवान तथा जापान जैसे AI-केंद्रित बाजारों में AI शेयरों की बिकवाली के कारण आया है। यह बिकवाली अमेरिका में डेटा सेंटर पर होने वाले खर्च को लेकर जताई गई चिंताओं की वजह से हुई है। डेमोक्रेट्स, जिन्होंने कांग्रेस के दोनों सदनों में जीत हासिल की है, डेटा सेंटरों पर अंधाधुंध खर्च के खिलाफ हैं और उम्मीद है कि वे AI के लिए सुरक्षा उपायों की मांग करेंगे।
भारत बना विदेशी निवेशकों का पसंदीदा ठिकाना
AI से जुड़ी इस बिकवाली ने भारत को, जिसे आमतौर पर 'नॉन-AI ट्रेड' (AI से अलग निवेश विकल्प) माना जाता है, FPIs के लिए बेहद आकर्षक बना दिया है। इसके अलावा, भारत में शानदार अर्निंग ग्रोथ और लार्ज-कैप कंपनियों के आकर्षक वैल्यूएशन ने इसे निवेश के लिए एक पसंदीदा जगह बना दिया है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों ने फाइनेंशियल, आईटी, ऑटोमोबाइल और टेलीकॉम सेक्टर की प्रमुख कंपनियों (इंडेक्स हेवीवेट्स) में बड़े पैमाने पर खरीदारी की है। वैश्विक बाजार अब AI इंफ्रास्ट्रक्चर में किए जा रहे निवेश की गति और उसकी वित्तीय स्थिरता का फिर से आकलन कर रहे हैं। (इनपुट: ANI)
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