नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट के मुताबिक 2026 में रियल एस

भारत के रियल एस्टेट में PE निवेश 31% घटा, 85% निवेश घरेलू निवेशकों से आया: रिपोर्ट

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नई दिल्ली। भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में प्राइवेट इक्विटी (PE) निवेश में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। संपत्ति सलाहकार फर्म 'नाइट फ्रैंक इंडिया' की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से सितंबर 2026 के दौरान रियल एस्टेट में पीई निवेश सालाना आधार पर 31 प्रतिशत घटकर 1.66 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग $1.66 billion) रह गया। यह पिछले छह वर्षों में संस्थागत निवेश का सबसे निचला स्तर है।

सौदों की संख्या बढ़ी, पर औसतन घट गई रकम

कमजोर आंकड़ों के बीच राहत की बात यह रही कि बाजार में सौदों की संख्या बढ़ी है। नौ महीनों की इस अवधि में कुल 31 सौदे (Deals) दर्ज किए गए, जबकि पिछले साल इसी दौरान 24 सौदे हुए थे। हालांकि, बड़े सौदों की कमी के कारण प्रति सौदा औसत आकार 47 फीसदी गिरकर 53 मिलियन डॉलर रह गया।

विदेशी पूंजी सिमटी, घरेलू निवेशकों की बल्ले-बल्ले

निवेश के रुख में इस बार बड़ा संरचनात्मक बदलाव देखने को मिला है। कुल निवेश में भारतीय (घरेलू) निवेशकों का दबदबा रहा और उनकी हिस्सेदारी बढ़कर 85 प्रतिशत (1.42 अरब डॉलर) पहुंच गई, जो एक साल पहले महज 25 प्रतिशत (603 मिलियन डॉलर) थी।

दूसरी ओर, विदेशी निवेशकों का भरोसा डगमगाता दिखा। विदेशी पूंजी का योगदान घटकर केवल 15 प्रतिशत (240 मिलियन डॉलर) रह गया, जो पिछले साल इसी अवधि में 75 प्रतिशत के भारी-भरकम स्तर पर था।

सोच-समझकर दांव लगा रहे हैं निवेशक: शिशिर बैजल

नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर शिशिर बैजल ने कहा कि आंकड़े सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि बाजार की बदलती सोच को दर्शाते हैं। अब निवेशक सतर्क और चयनात्मक रुख अपना रहे हैं।

बैजल के मुताबिक, "निवेशक अब पूंजी के आकार, सौदे के ढांचे और जोखिम का बारीकी से आकलन कर रहे हैं। यह सिर्फ फंड की उपलब्धता का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह इस बात पर निर्भर करता है कि जोखिम के बदले कितना रिटर्न मिल रहा है।" उन्होंने आगे कहा कि भारत की विदेशी पूंजी खींचने की क्षमता इस बात पर निर्भर करेगी कि देश में पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण अवसर कितने मौजूद हैं।

ऑफिस और आवासीय सेक्टर का प्रदर्शन

सेक्टरवार आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा निवेश ऑफिस स्पेस में आया:

  • ऑफिस सेक्टर: कुल निवेश का 71% हिस्सा (1.18 अरब डॉलर) इसी सेगमेंट में आया, हालांकि इसमें भी 19% की सालाना गिरावट रही। इनमें 78% फंड तैयार (Completed) ऑफिस प्रोजेक्ट्स में लगे।
  • रेजिडेंशियल सेक्टर: आवासीय क्षेत्र में 19 सौदों के जरिए 320 मिलियन डॉलर जुटाए गए, जिसमें 33% की गिरावट दर्ज हुई। खास बात यह है कि इस सेगमेंट का 97% निवेश डेट और स्ट्रक्चर्ड क्रेडिट के जरिए आया।
  • वेयरहाउसिंग व रिटेल: वेयरहाउसिंग सेक्टर में जुलाई-सितंबर तिमाही में एक ही सौदे के तहत 160 मिलियन डॉलर आए, जबकि रिटेल सेक्टर में इन नौ महीनों में एक भी सौदा नहीं हुआ।

निवेश के मामले में NCR शीर्ष पर

देश के प्रमुख शहरों की बात करें तो नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) निवेशकों की पहली पसंद बना रहा। 568 मिलियन डॉलर के पीई निवेश के साथ NCR सूची में सबसे ऊपर रहा। इसके बाद पुणे 356 मिलियन डॉलर के साथ दूसरे और चेन्नई 319 मिलियन डॉलर के साथ तीसरे स्थान पर रहा। (भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)

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