सरकार ने नवाचार, डिजाइन, ब्रांडिंग, तकनीक और 'क्रा

भारत बनेगा ग्लोबल ज्वेलरी हब, 100 अरब डॉलर निर्यात का रोडमैप तैयार

100 अरब डॉलर तक पहुंचेगा ज्वेलरी एक्सपोर्ट (File Photo)

नई दिल्ली: भारत ने 2040 तक रत्नों और आभूषणों के निर्यात को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। सरकार का मानना ​​है कि इस क्षेत्र को वैश्विक शक्ति बनाने के लिए नवाचार, डिजाइन, ब्रांडिंग और अधिक मूल्यवर्धन प्रमुख कारक हैं। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बुधवार को वाणिज्य विभाग द्वारा रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) के सहयोग से आयोजित 'चिंतन शिविर- 2040 रत्न एवं आभूषण रोडमैप' में इस विजन की रूपरेखा प्रस्तुत की।

क्या है इस रोडमैप का उद्देश्य?

इस रोडमैप का उद्देश्य 2025-26 में लगभग 28 अरब अमेरिकी डॉलर के निर्यात को बढ़ाकर 2040 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा, भारत के रत्न एवं आभूषण क्षेत्र को लगभग 28 अरब अमेरिकी डॉलर से 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का असली उत्प्रेरक नवाचार, वैश्विक डिजाइन नेतृत्व और विश्वास पर आधारित एक व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है। अनुमान है कि यह क्षेत्र भारत की जीडीपी में 1.2 प्रतिशत का योगदान देगा और तब तक देश के कुल व्यापारिक निर्यात का 14 प्रतिशत हिस्सा बन जाएगा।

भारत का प्रतिस्पर्धात्मक लाभ उसके कुशल कार्यबल और शिल्प कौशल में निहित

अग्रवाल ने कहा कि भारत का प्रतिस्पर्धात्मक लाभ उसके कुशल कार्यबल और शिल्प कौशल में निहित है। उन्होंने कम लाभ वाले मूल उपकरण विनिर्माण (ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग) से हटकर डिजाइन-आधारित, नवोन्मेषी और ब्रांडेड उत्पादों की ओर बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने मानव पूंजी को मजबूत करने शिल्प कौशल में करियर को अधिक आकर्षक बनाने और उत्पाद विभेदीकरण को बढ़ाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता और 3डी प्रिंटिंग जैसी प्रौद्योगिकियों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

भारत की संस्कृति और इतिहास से जुड़ेंगे आभूषण डिजाइन

वाणिज्य सचिव ने देश के वैश्विक ब्रांड और सॉफ्ट पावर को मजबूत करने के लिए आभूषण डिजाइनों में भारत के इतिहास, संस्कृति और कहानियों को शामिल करने का भी आह्वान किया। उन्होंने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पारदर्शी, प्रौद्योगिकी-आधारित विश्वास नेटवर्क के महत्व पर बल दिया। चिंतन शिविर का मुख्य उद्देश्य 'क्राफ्टेड इन इंडिया' प्रस्ताव के तहत मूल्यवर्धन बढ़ाना और तैयार, डिजाइन-आधारित और ब्रांडेड आभूषणों को बढ़ावा देना था।

भारत को मूल्य श्रृंखला में निर्णायक रूप से बढ़ना चाहिए आगे

विदेश व्यापार महानिदेशक लव अग्रवाल ने कहा कि भारत को मूल्य श्रृंखला में निर्णायक रूप से आगे बढ़ना चाहिए। खुद को डिजाइन और मूल्यवर्धित आभूषणों के लिए एक वैश्विक गंतव्य के रूप में स्थापित करना चाहिए। जीजेईपीसी के अध्यक्ष किरित भंसाली ने कहा कि उद्योग एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है, जहां नए मुक्त व्यापार समझौते, नीतिगत समर्थन और एमएसएमई को लाभ पहुंचाने वाले उपायों से भविष्य के विकास के लिए एक मजबूत आधार तैयार हो रहा है।

इन लक्ष्यों पर केंद्रित था विचार-विमर्श

विचार-विमर्श पांच प्राथमिकता वाले लक्ष्यों पर केंद्रित था: वैश्विक बाजार तक पहुंच, एमएसएमई का विस्तार, निर्यात-आयात फास्ट ट्रैक, 'क्राफ्टेड बाय इंडिया' और अगली पीढ़ी की प्रतिभा और डिजाइन। रोडमैप में विनिर्माण उत्पादन को लगभग 15 लाख करोड़ रुपये तक दोगुना करने और क्षेत्र के समग्र आर्थिक मूल्य को लगभग 60 लाख करोड़ रुपये तक विस्तारित करने की परिकल्पना भी की गई है। सरकार और उद्योग जगत के बीच हुए इस संवाद में वरिष्ठ अधिकारियों और उद्योग जगत के नेताओं ने वैश्विक रत्न एवं आभूषण मूल्य श्रृंखला में भारत की स्थिति को मजबूत करने और विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त भारतीय ब्रांडों को विकसित करने के उपायों पर चर्चा की। 

(इनपुट: ANI)

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