अक्टूबर में भारतीय शेयर बाजार ने एशिया-पैसिफिक को 7% से पछाड़ा
नई दिल्ली: गोल्डमैन सैक्स रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर में भारतीय इक्विटी दुनिया भर में सबसे अच्छा परफॉर्म करने वाले मार्केट में से एक बनकर उभरे, जिसे AI-सेंसिटिव नॉर्थ एशियाई मार्केट से हटकर दूसरे सेक्टर्स की ओर इन्वेस्टर्स की दिलचस्पी में बदलाव से सपोर्ट मिला। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस ट्रेंड ने घरेलू मार्केट में AI-लिंक्ड कंपनियों से IT सर्विसेज़ की ओर भी बदलाव किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने अक्टूबर में जापान (MXAPJ) को छोड़कर बड़े एशिया-पैसिफिक रीजन से 7 परसेंट पॉइंट्स बेहतर परफॉर्म किया, जिससे 2026 के पहले नौ महीनों के दौरान इसके खराब परफॉर्मेंस की स्थिति ठीक हो गई।
अक्टूबर में भारतीय शेयर बाजारों में तेजी
गोल्डमैन सैक्स ने कहा, अक्टूबर में भारत में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई, MXAPJ से 7pp बेहतर परफॉर्म किया और यह दुनिया भर में सबसे अच्छा परफॉर्म करने वाले मार्केट में से एक बन गया। भारत को AI-सेंसिटिव नॉर्थ एशियाई मार्केट से दूर मार्केट रोटेशन का फायदा हुआ। यह बदलाव तब हुआ जब NIFTY ने तीसरी तिमाही में 10 परसेंट की पीक-टू-ट्रफ गिरावट दर्ज की थी, इससे पहले कि यह अक्टूबर की शुरुआत के अपने निचले स्तर से 3 परसेंट ऊपर चढ़ गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को AI-सेंसिटिव नॉर्थ एशियाई मार्केट से दूर ग्लोबल "मार्केट रोटेशन" से फायदा हुआ। घरेलू मार्केट में भी ऐसा ही ट्रेंड दिखा, जहां इन्वेस्टर AI इनेबलर के तौर पर क्लासिफाइड कंपनियों से हटकर IT सर्विसेज़ की तरफ चले गए। AI इनेबलर स्टॉक्स ने अक्टूबर में NIFTY से 6 परसेंट पॉइंट्स कम परफॉर्म किया, जबकि जनवरी और सितंबर 2026 के बीच इसने NIFTY से 76 परसेंट पॉइंट्स बेहतर परफॉर्म किया था।
IT और फार्मा शेयरों में तेजी से बाजार को मिला सहारा
इसके उलट रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर में IT सर्विसेज़ ने मार्केट को लीड किया और बेंचमार्क से 14 परसेंट पॉइंट्स बेहतर परफॉर्म किया। 30 अक्टूबर को खत्म हुए हफ्ते में बड़े मार्केट में भी रिकवरी देखी गई। NIFTY 2 परसेंट बढ़ा, जिसने रीजनल MXAPJ इंडेक्स को पीछे छोड़ दिया, जो 1 परसेंट बढ़ा। मिड-कैप और स्मॉल-कैप स्टॉक्स ने बढ़त को लीड किया, जो 3-4 परसेंट बढ़े, जबकि फार्मास्युटिकल सेक्टर में 7 परसेंट की बढ़त हुई। फाइनेंशियल स्टॉक्स पिछड़ने वालों में से थे, जो 1 परसेंट बढ़े। विदेशी इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स नेट बायर बन गए। इस हफ्ते USD 1.2 बिलियन लाए, हालांकि वे इस साल अब तक USD 31 बिलियन के आउटफ्लो के साथ नेट सेलर बने रहे। घरेलू इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स ने हफ़्ते के दौरान USD 400 मिलियन खरीदे, जिससे उनका साल-दर-साल इनफ्लो USD 75 बिलियन हो गया। रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि कॉर्पोरेट अर्निंग्स हेल्दी रहीं।
MSCI इंडिया कंपनियों का मुनाफा 15% बढ़ा
इंडेक्स के मार्केट कैपिटलाइज़ेशन का 58 परसेंट हिस्सा रिप्रेजेंट करने वाली लगभग 89 MSCI इंडिया कंपनियों ने कैलेंडर ईयर 2026 की तीसरी तिमाही के रिज़ल्ट रिपोर्ट किए थे। उनका कंबाइंड प्रॉफिट साल-दर-साल 15 परसेंट और सीक्वेंटली 13 परसेंट ज़्यादा था। हालांकि, सभी सेक्टर्स में अर्निंग्स परफॉर्मेंस एक जैसा नहीं रहा, जिसमें मेटल्स और माइनिंग, यूटिलिटीज़ और हेल्थकेयर ने ज़्यादा पॉज़िटिव सरप्राइज़ रिपोर्ट किए, जबकि सीमेंट और मटीरियल्स और कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी कंपनियों में ज़्यादा मिस हुए। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का फॉरवर्ड प्राइस-टू-अर्निंग्स वैल्यूएशन 18.4 गुना रहा, जबकि मार्केट एशिया-पैसिफिक रीजन के मुकाबले 92 परसेंट प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा था, जो इसके हिस्टॉरिकल हाई के करीब है। आने वाले हफ्तों में और अर्निंग्स अनाउंसमेंट होंगे, जिसमें कई बड़ी कंपनियां नवंबर की शुरुआत में रिजल्ट्स रिपोर्ट करने वाली हैं।
(इनपुट: ANI)
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