एनर्जी और डेट मार्केट को बढ़ावा: NSE को कॉरपोरेट बॉन्ड इंडेक्स फ्यूचर्स के लिए SEBI की हरी झंडी
नई दिल्ली। शेयर बाजार के प्रमुख एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से कॉरपोरेट बॉन्ड इंडेक्स पर फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट शुरू करने के लिए औपचारिक रूप से 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) मिल गया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य बाजार सहभागियों को कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में जोखिम प्रबंधन (risk management) के लिए एक प्रभावी एक्सचेंज-ट्रेडेड टूल उपलब्ध कराना है।
कॉरपोरेट बॉन्ड फ्यूचर्स को हरी झंडी
गुरुवार को जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में NSE ने जानकारी दी कि प्रस्तावित 'कॉरपोरेट बॉन्ड इंडेक्स फ्यूचर्स' का उद्देश्य पोर्टफोलियो हेजिंग, जोखिम प्रबंधन और मूल्य खोज (price discovery) के लिए एक अतिरिक्त जरिया मुहैया कराना है। इसके साथ ही यह भारत के कॉरपोरेट बॉन्ड डेरिवेटिव्स इकोसिस्टम के समग्र विकास में भी मददगार साबित होगा।
एक्सचेंज के मुताबिक, इस उत्पाद से बाजार सहभागियों को अपने कॉरपोरेट बॉन्ड पोर्टफोलियो से उत्पन्न होने वाले बाजार जोखिम को प्रबंधित करने की अनुमति देकर 'मार्केट मेकिंग' (market making) को बढ़ावा मिलने की भी उम्मीद है।
आरबीआई की अनुमति का इंतजार
हालांकि, इन नए फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स की आधिकारिक शुरुआत भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से मिलने वाली आवश्यक मंजूरियों पर निर्भर करेगी। इस अहम विकासक्रम पर टिप्पणी करते हुए NSE के चीफ बिजनेस डेवलपमेंट ऑफिसर श्रीराम कृष्णन ने कहा कि SEBI की यह मंजूरी भारत के फिक्स्ड इनकम मार्केट के विकास में एक मील का पत्थर साबित होगी।
SEBI की मंजूरी से डेट मार्केट को बढ़ावा
कृष्णन ने कहा, "कॉरपोरेट बॉन्ड इंडेक्स फ्यूचर्स के लिए SEBI की एनओसी भारत के फिक्स्ड इनकम मार्केट के विकास में एक अहम पड़ाव है। एक अच्छी तरह से विकसित डेरिवेटिव्स इकोसिस्टम मुख्य कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है, जिससे अधिक कुशल जोखिम हस्तांतरण और व्यापक संस्थागत भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा।"
NSE का गहरे और मजबूत डेट मार्केट पर जोर
उन्होंने आगे कहा कि यह पहल भारत में गहरे, अधिक तरल (liquid) और मजबूत डेट मार्केट के निर्माण की दिशा में NSE की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है। प्रस्तावित उत्पाद एक्सचेंज-ट्रेडेड अनुबंधों के जरिए कॉरपोरेट बॉन्ड इंडेक्स के प्रदर्शन से जुड़ने की अनुमति देता है, जिससे बाजार में जोखिमों पर नियंत्रण रखना आसान हो जाता है।
यह नया कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत का कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार निरंतर विकास के दौर से गुजर रहा है। NSE इसे जोखिम प्रबंधन और मूल्य खोज के लिए एक पूरक उपकरण के रूप में पेश कर रहा है, जिसका उद्देश्य देश में मजबूत वित्तीय और ऋण बाजारों की नींव को और अधिक पुख्ता करना है। (भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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