वैश्विक आपूर्ति में व्यवधान बढ़ने से तेल कीमतों में तेजी का जोखिम: रिपोर्ट
नई दिल्ली: मॉर्गन स्टेनली ने अपनी नवीनतम शोध रिपोर्ट में कहा है कि भू-राजनीतिक व्यवधानों, सीमित परिवहन, शोधन क्षमता में कमी और घटते भंडार के कारण वैश्विक तेल बाजार में बढ़ती तंगी के चलते आने वाले महीनों में तेल की कीमतों में और वृद्धि का जोखिम है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म ने 2026 की चौथी तिमाही के लिए ब्रेंट क्रूड के अपने औसत पूर्वानुमान को 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर बरकरार रखा है। साथ ही, उसने चेतावनी दी है कि तिमाही औसत से कीमतों में कभी-कभी और अधिक वृद्धि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।
कई मोर्चों पर आपूर्ति में व्यवधान
मॉर्गन स्टेनली ने कहा कि तेल और गैस बाजार वर्तमान में एक साथ कई व्यवधानों का सामना कर रहे हैं। इनमें होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से निर्यात में बाधा, बाब अल-मंडेब के जरिए प्रवाह में कमी और सऊदी अरब की पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन का बंद होना शामिल है। ब्रोकरेज ने अपनी रिपोर्ट में पनामा नहर से जुड़े व्यवधानों और राइन नदी में ऐतिहासिक रूप से कम जल स्तर का भी जिक्र किया है। इससे यूरोप में परिष्कृत उत्पादों के शिपमेंट पर असर पड़ा है।
टैंकरों की कमी से बढ़ी माल ढुलाई लागत
रिपोर्ट के मुताबिक, टैंकरों की सीमित उपलब्धता ने माल ढुलाई दरों को रिकॉर्ड स्तर तक बढ़ा दिया है। इससे क्षेत्रीय बाजारों की आपूर्ति में कमी का लाभ उठाने की क्षमता भी सीमित हो गई है। मॉर्गन स्टेनली ने कहा कि स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि तेल बाजार को व्यवधानों से निपटने में मदद करने वाले बफर कमजोर होने लगे हैं। पिछले छह महीनों में उच्च अमेरिकी निर्यात, कम चीनी आयात और पर्याप्त भंडार ने बाजार को व्यवधानों से निपटने में मदद की। हालांकि, अब रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार कार्यक्रम लगभग पूरे हो चुके हैं, वाणिज्यिक भंडार निम्न स्तर पर आ गए हैं और अमेरिकी निर्यात में गिरावट आई है। वहीं, नवंबर के लिए चीन की तेल खरीद मजबूत हुई है।
2027 की पहली तिमाही तक घाटे में रह सकता है बाजार
ब्रोकरेज का अनुमान है कि तेल बाजार 2026 की चौथी तिमाही और 2027 की पहली तिमाही तक घाटे में रहेगा। मॉर्गन स्टेनली का आधार-मामला ब्रेंट के लिए 2026 की चौथी तिमाही में 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल और 2027 की पहली तिमाही में 95 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल का है। इसके बाद कीमत का अनुमान दूसरी तिमाही में 90 अमेरिकी डॉलर और तीसरी तिमाही में 80 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक घटने का है।
भू-राजनीतिक स्थिति पर निर्भर करेगा आउटलुक
मॉर्गन स्टेनली ने कहा कि तेल बाजार का दृष्टिकोण भू-राजनीति पर काफी हद तक निर्भर करता है, खासकर मध्य पूर्व से होने वाली आपूर्ति की रिकवरी की गति पर। ब्रोकरेज ने यह भी कहा कि चीन की मजबूत खरीदारी और बाजार में तेल भंडार में कमी से आपूर्ति में और अधिक व्यवधान आने की संभावना बढ़ सकती है।
(एएनआई)
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