केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने लंदन में यूक

रेटिंग एजेंसियों ने भारत के साथ किया अन्याय, 15 जुलाई से लागू होगा व्यापार समझौता: पीयूष गोयल

लंदन में यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल के सदस्यों के साथ बैठक करते केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल

लंदन: केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल (UKIBC) के सदस्यों के साथ लंदन में एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बिजनेस लंच के दौरान उन्होंने दुनिया के प्रमुख वैश्विक संगठनों के शीर्ष अधिकारियों और उद्योग जगत के लीडर्स से बातचीत की और भारत-यूके विकास एजेंडे को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।

टाटा, एचएसबीसी और प्रूडेंशियल के दिग्गजों संग मंथन

वाणिज्य मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस बैठक की जानकारी देते हुए बताया कि चर्चा का मुख्य केंद्र नए अवसरों को खोलना और निवेश में तेजी लाना था। उन्होंने लिखा, "यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल के सदस्यों के साथ दोपहर के भोजन पर एक संवादात्मक बैठक हुई। इसमें टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), टाटा समूह, एचएसबीसी (HSBC), प्रूडेंशियल और बेकर मैकेंजी सहित प्रमुख वैश्विक संगठनों के शीर्ष अधिकारियों से चर्चा हुई। हमारा उद्देश्य दोनों देशों के बीच सहयोग को गहरा करना और भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को और मजबूत करना है।"

वैश्विक रेटिंग एजेंसियों पर साधा निशाना

व्यापार पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों के रवैये पर अपनी कड़ी असहमति जताई। उन्होंने कहा कि फिच (Fitch), मूडीज (Moody's) और एसएंडपी (S&P) जैसी वैश्विक रेटिंग एजेंसियों ने भारत के साथ अन्याय किया है। इन एजेंसियों ने भारत की अभूतपूर्व विकास गाथा, देश के मजबूत आर्थिक बुनियादी सिद्धांतों और वास्तविक क्षमताओं को पर्याप्त रूप से मान्यता नहीं दी है।

15 जुलाई से लागू होगा भारत-ब्रिटेन CETA समझौता

केंद्रीय मंत्री ने द्विपक्षीय व्यापार के लिए एक बड़े मील का पत्थर की घोषणा करते हुए बताया कि 15 जुलाई से भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (CETA) को लागू कर दिया जाएगा। उन्होंने भारतीय उद्योग जगत से ब्रिटेन को निर्यात बढ़ाने का आह्वान किया और कहा कि इस बाजार में भारत के लिए अपार संभावनाएं हैं, जहां हमें बड़ी हिस्सेदारी हासिल करनी होगी।

"घिसी-पिटी सोच से बाहर निकलना होगा"

परिवर्तनकारी विकास की वकालत करते हुए गोयल ने व्यापारिक नेतृत्व से अपनी महत्वाकांक्षाओं को बड़ा रखने का आग्रह किया। उन्होंने पारंपरिक विकास दरों पर संतोष जताने की मानसिकता को खारिज करते हुए कहा, "अक्सर हम अपने आरामदेह माहौल (Comfort Zone) में भटक जाते हैं। फिर हम वही घिसी-पिटी सोच में पड़ जाते हैं कि 5, 7 या 10% की वृद्धि होने पर ही सफलता का दावा कर लेते हैं। अंतरराष्ट्रीय व्यापार आमतौर पर 4 से 6% की दर से बढ़ता है। अगर एक राष्ट्र के रूप में हमारी महत्वाकांक्षा का स्तर सिर्फ यही रहा, तो यह उस भरोसे का घोर विश्वासघात होगा जो आज पूरी दुनिया भारत पर रखती है। दुनिया को भारत पर भरोसा है और हमें यह कर दिखाना ही होगा।"