अब हर हफ्ते अपडेट होगा क्रेडिट स्कोर, आरबीआई ने दिशा-निर्देश जारी किये
अब हर हफ्ते अपडेट होगा क्रेडिट स्कोर, आरबीआई ने दिशा-निर्देश जारी किये
अभी 15 दिन में एक बार होता है अपडेट
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक ने देश में सभी बैंकों व अन्य वित्तीय संस्थाओं को कर्जदारों का क्रेडिट स्कोर अब हर हफ्ते अपडेट करने का निर्देश दिया है। अभी यह स्कोर 15 दिन में एक बार अपडेट होता है। RBI के दिशानिर्देशों के बाद अब सभी क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनियों (CICS) को हर 7 दिन में क्रेडिट स्कोर अपडेट करना होगा।
रिजर्व बैंक ने देश के वित्तीय व्यवस्था में ऋण ढांचे को और मजबूत व पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए सभी वित्तीय संस्थानों के लिए साप्ताहिक क्रेडिट स्कोर अपडेट से जुड़े मसौदा दिशा-निर्देश जारी किए है। अभी तक बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा क्रेडिट ब्यूरो को ग्राहकों के क्रेडिट डेटा की रिपोर्टिंग हर पखवाड़े या महीने में एक बार की जाती है, लेकिन नए प्रस्ताव के लागू होने पर यह संशोधन हर सप्ताह होगा। इस कदम का मकसद क्रेडिट जानकारी को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाना है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कदम लोन प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाएगा, जिससे ग्राहकों और बैंकों- दोनों को बड़ा लाभ मिलेगा।
नए मसौदे के तहत बैंक और अन्य ऋणदाता संस्थान क्रेडिट सूचना कंपनियों जैसे सिबिल, एक्सपीरियन, क्रिफ हाई मार्क, इक्विफैक्स को हर सप्ताह डेटा उपलब्ध कराएंगे। इसके लिए रिपोर्टिंग डेट्स तय होंगी। हर महीने की 7, 14, 21, 28 तारीख और माह के आखिरी दिन का क्रेडिट ब्यूरो को भेजना अनिवार्य होगा।
RBI ने इस संबंध में "Credit Information Reporting Amendment, 2025" का मसौदा जारी किया है। मसौदा के अनुसार, CRIF High Mark जैसी Credit Information Companies (CICs) को हर महीने की 7, 14, 21, 28 तारीख और माह के अंतिम दिन डेटा रिफ्रेश करना होगा। चाहें तो बैंक और NBFC के साथ समझौते की स्थिति में इससे ज्यादा बार भी अपडेट किया जा सकता है। बैंकों को महीने के अंत का पूरा डेटा तीन दिनों में भेजना होगा और हर साप्ताहिक अपडेट के लिए केवल नया या बदला हुआ डेटा दो दिनों के भीतर जमा करना होगा। इसमें नए खाते, बंद खाते, रिपेमेंट अपडेट, डेमोग्राफिक बदलाव और SMA जैसी क्लासिफिकेशन की सारी जानकारी शामिल होगी। समय सीमा का पालन न करने पर CICs को RBI के DAKSH पोर्टल पर रिपोर्ट करना होगा।
बैंकों, वित्तीय संस्थानों और कर्ज लेने वालों को होगा फायदा
क्रेडिट स्कोर के साप्ताहिक अपडेशन की नयी व्यवस्था से बैंकों, वित्तीय संस्थानों और कर्ज लेने वाले दोनों को फायदा होगा। कर्ज लेने वाले को ये फायदा होगा कि अगर किसी ने पिछले अपडेट के बाद अपनी EMI समय पर चुकाई और स्कोर बढ़ गया, तो वो नया स्कोर तुरंत रिफ्लेक्ट हो जाएगा। इससे वो क्रेडिट कार्ड आसानी से ले पाएगा। अच्छा स्कोर होने पर कर्ज सस्ते ब्याज पर मिल जाएगा। दूसरी तरफ बैंकों को इस क्रेडिट स्कोर का सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि वे डिफाल्टरों की पहचान सकेंगे। जब क्रेडिट डेटा हर हफ्ते अपडेट होगा तो बैंक के से पास कस्टमर का सबसे ताजा क्रेडिट स्कोर होगा। लोन देते समय बैंक को सही और लेटेस्ट जानकारी मिलेगी। इससे बैंक को रिस्क का सही-सही आकलन करने में मदद मिलेगी।
"बिजनेस स्टैंडर्ड" की रिपोर्ट के अनुसार आरबीआई ने प्रस्तावित दिशा-निर्देशों में कहा है कि नई प्रणाली एक अप्रैल 2026 से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि ये अंतिम दिशा-निर्देश जारी होने के बाद सभी बैंक और संस्थान तकनीकी रूप से तैयार होने की स्थिति पर निर्भर करेगा। सभी क्रेडिट संस्थाओं को सिस्टम अपग्रेड, डेटा-सिंक और रिपोर्टिंग फेमवर्क साप्ताहिक आवृत्ति के अनुरूप तैयार करना होगा।
क्रेडिट स्कोर आपकी उधारी और भुगतान इतिहास के आधार पर बनाया गया एक तीन-अंकों का नंबर होता है, जो आपकी क्रेडिट योग्यता बताता है। बैंक और वित्तीय संस्थान इसी स्कोर के आधार पर तय करते हैं कि आपको लोन दिया जाए या नहीं, और किस ब्याज दर पर दिया जाए।
भुगतान संबंधी सभी जानकारी होंगी अपडेट
इससे उधारकर्ताओं के भुगतान व्यवहार, नई लोन गतिविधि, क्रेडिट कार्ड उपयोग, बकाया राशि और खाता बंद होने जैसी सभी प्रमुख जानकारी लगातार अपडेट होती रहेंगी। साप्ताहिक संशोधन में केवल पिछले अपडेट के बाद हुए बदलावों को ही भेजना होगा। उदाहरण के लिए, किसी ग्राहक ने मासिक किस्त चुकाई हो, नया लोन लिया हो, क्रेडिट कार्ड बिल भरा हो या कोई खाता बंद किया हो तो वह डेटा उसी सप्ताह रिपोर्ट कर दिया जाएगा। महीने के अंत में सभी सक्रिय खातों और हाल ही में बंद हुए की पूरी रिपोर्ट अनिवार्य रहेगी।
इसे भी पढ़ेंः
मैं यहां सबसे गरीब पक्षकार के लिए हूं. अगर जरूरत पड़ी तो मैं उनके लिए आधी रात तक यहां बैठूंगा : CJI सूर्यकांत
https://www.primenewsnetwork.in/india/cji-said-i-am-here-for-the-poorest-litigant/99202