नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने खुले बाज

रिजर्व बैंक ने बैंकिंग सिस्टम में डाले 50,000 करोड़ रुपये

रिजर्व बैंक ने बैंकिंग सिस्टम में डाले 50,000 करोड़ रुपये

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने खुले बाजार में नकदी का प्रवाह बनाये रखने के लिए बैंकिंग सिस्टम में पचास हजार करोड़ रूपये डाले हैं। आरबीआई ने यह नकदी सरकारी बांड खरीदकर डाली है। इसका मकसद चालू वित्त वर्ष के अंत में टैक्स भुगतान के कारण होने वाली नकदी की किल्लत को रोकना।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग प्रणाली में तरलता (liquidity) बनाए रखने के लिए 50,000 करोड़ रुपये के सरकारी बॉन्ड खरीदे। यह कदम ओएमओ (Open Market Operations) के तहत उठाया गया है। इस योजना के तहत सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद कर बैंकिंग प्रणाली में कुल 50,000 करोड़ की नकदी डाली गयी है। इसका मुख्य उद्देश्य जीएसटी और अग्रिम कर भुगतान (Advance Tax) के कारण सिस्टम में होने वाली नकदी की भारी निकासी को संतुलित करना है। 

रिजर्व बैंक के इस कदम से पहले बैंकिंग सिस्टम में लगभग ₹2.49 लाख करोड़ की अधिशेष (surplus) नकदी होने का अनुमान था।केंद्रीय बैंक ने विभिन्न श्रेणियों के बॉन्ड खरीदे। इसमें 14,491 करोड़ के 7.41 फीसदी जीएस 2036 बॉन्ड, 13,006 करोड़ के 6.45 फीसदी जीएस 2029 बॉन्ड और 8,350 करोड़ के 6.64 फीसदी जीएस 2035 बॉन्ड प्रमुख हैं। आरबीआई से मिले आंकड़ों के अनुसार शीर्ष बैंक ने इस साल जनवरी से अब तक ओएमओ खरीद के जरिये 3.50 लाख करोड़ की नकदी प्रणाली में डाली है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, आरबीआई के अनुसार, वर्तमान में बैंकिंग सिस्टम में तरलता का अधिशेष करीब 2.41 लाख करोड़ रुपये है। इसका मतलब है कि बैंक के पास जरूरत से ज्यादा कैश मौजूद है। ओएमओ के जरिए यह कैश सिस्टम में डालना इसलिए जरूरी था क्योंकि इस महीने के अंत में अग्रिम कर और जीएसटी के भुगतान होने हैं। इससे बैंकिंग सिस्टम से नकदी बड़ी मात्रा में निकल सकती थी।

आरबीआई की यह ओएमओ खरीद नीलामी विशेष रूप से कर और जीएसटी भुगतान के समय कैश के बड़े पैमाने पर निकास को रोकने के लिए की गई। इससे बैंकिंग सिस्टम में स्थिरता बनी रहती है और आम लोगों तथा व्यापारियों के लिए लेनदेन में कोई बाधा नहीं आती। इस कदम से यह भी संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक आर्थिक संतुलन और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए सतत निगरानी रख रहा है।

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