कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी फेड के फैसले स

कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और फेड के फैसले से पहले सतर्कता के बीच सपाट बंद हुए सेंसेक्स और निफ्टी

Sensex and Nifty End Flat Amid High Crude Oil Prices and Fed Caution

मुंबई (महाराष्ट्र)। मुंबई में मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार मामूली गिरावट के साथ बंद हुए। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले से पहले निवेशकों की सतर्कता का असर बाजार पर दिखाई दिया। कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव के बीच निफ्टी 50 इंडेक्स 3.45 अंक या 0.02 प्रतिशत गिरकर 22,749.75 पर बंद हुआ। वहीं, बीएसई सेंसेक्स 8.08 अंक या 0.01 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,598.67 पर आ गया।

कच्चे तेल की कीमतों ने बाजार पर बनाया दबाव

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर के मुताबिक, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी फेड के फैसले से पहले सतर्कता ने वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों के प्रभाव को कम कर दिया। उन्होंने कहा कि मुनाफावसूली के चलते आईटी और निजी बैंकिंग शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि फार्मा, ऑटो, पीएसयू बैंक और रियल्टी सेक्टर में तेजी रही। घरेलू निवेश प्रवाह और दूसरी तिमाही के बेहतर नतीजों से बाजार को सहारा मिला, हालांकि विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली जारी रही।

आईटी और निजी बैंकिंग शेयरों में गिरावट

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के सेक्टोरल सूचकांकों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। निफ्टी आईटी इंडेक्स 0.81 प्रतिशत और निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स 0.39 प्रतिशत गिरकर बंद हुए। दूसरी ओर, निफ्टी ऑटो में 1.20 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया में 3.58 प्रतिशत, निफ्टी मेटल में 0.49 प्रतिशत, निफ्टी फार्मा में 1.72 प्रतिशत और निफ्टी पीएसयू बैंक में 0.19 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।

इन शेयरों में रही सबसे ज्यादा तेजी और गिरावट

निफ्टी 50 के शेयरों में टाटा कंज्यूमर, भारती एयरटेल, बीएसई, ट्रेंट और बजाज ऑटो बढ़त दर्ज करने वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे। वहीं, सिप्ला, आईटीसी, कोल इंडिया, टीसीएस, अडानी एंटरप्राइजेज और इंफोसिस में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली। बाजार में अलग-अलग सेक्टरों के प्रदर्शन से निवेशकों के बीच सतर्कता और चुनिंदा शेयरों में खरीदारी का रुख दिखाई दिया।

ब्रेंट क्रूड 116 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा

कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहीं। रिपोर्ट लिखे जाने के समय ब्रेंट क्रूड 0.19 प्रतिशत की बढ़त के साथ 116 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। विनोद नायर ने आगाह किया कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और रुपये की कमजोरी महंगाई, कंपनियों के मुनाफे के मार्जिन और वित्तपोषण की स्थितियों पर दबाव डाल सकती हैं। उनके मुताबिक, आगे बाजार की दिशा कंपनियों के नतीजों, कच्चे तेल की कीमतों, पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों और अमेरिकी फेड के नीतिगत संकेतों पर निर्भर करेगी।

रुपये की कमजोरी से बढ़ी चिंता

ब्रिकवर्क रेटिंग्स के रिसर्च हेड राजीव शरण ने बताया कि रुपया फिर 95 के स्तर से ऊपर चला गया और मंगलवार को करीब 95.30 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। उन्होंने कहा कि रुपये पर मुख्य रूप से बाहरी कारकों का दबाव है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहने और खाड़ी देशों में आपूर्ति संबंधी झटकों के साथ अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने दबाव बढ़ाया है। शरण के अनुसार, निकट भविष्य में रुपये की चाल वैश्विक कारकों से प्रभावित हो सकती है, हालांकि घरेलू सुरक्षा उपायों के कारण भारतीय रिजर्व बैंक के पास स्थिति को नियंत्रित रखने की गुंजाइश है।

सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट

शेयर बाजार में कारोबार के दौरान कीमती धातुओं की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई। सोने का भाव 0.54 प्रतिशत गिरकर 1,42,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। वहीं, चांदी की कीमत में 1.49 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 1,92,877 रुपये प्रति 10 किलोग्राम पर पहुंच गई। दूसरी ओर, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बाजार के लिए चिंता का विषय बनी रहीं।

एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार

मंगलवार को एशियाई शेयर बाजारों में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला। जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 1.85 प्रतिशत बढ़कर 63,365 पर बंद हुआ, जबकि ताइवान का वेटेड इंडेक्स 0.12 प्रतिशत की बढ़त के साथ 46,096 पर पहुंच गया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3 प्रतिशत चढ़कर 5,638 पर बंद हुआ। इसके विपरीत, सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स इंडेक्स 0.35 प्रतिशत गिरकर 5,397 और हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स 1.15 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,947 पर बंद हुआ। (Source: ANI)

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