सुस्त वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की तपिश से सहमा घरेलू बाजार, उतार-चढ़ाव के बीच सपाट बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी
मुंबई (महाराष्ट्र)। भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और कमजोर एशियाई बाजारों के दबाव के बीच गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार भारी उतार-चढ़ाव से गुजरने के बाद अंततः सपाट स्तर पर बंद हुआ। निवेशकों ने किसी भी बड़े दांव को लगाने से बचते हुए बेहद सतर्क रुख अपनाया, जिससे बाजार में पूरे दिन सुस्ती का माहौल बना रहा।
बाजार का ताजा हाल: मामूली अंकों के फेरबदल के साथ बंद हुए सूचकांक
गुरुवार के कारोबारी सत्र के अंत में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 मामूली 5.75 अंक यानी 0.02 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,072.75 के स्तर पर बंद हुआ। दूसरी ओर, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स (Sensex) महज 1.44 अंकों की मामूली बढ़त लेकर 77,186.87 के स्तर पर बंद होने में कामयाब रहा।
सुस्ती के पीछे की वजह: क्या कह रहे हैं बाजार के जानकार?
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका में महंगाई की चिंताएं कम होने के बावजूद निवेशक अभी भी वैश्विक घटनाक्रमों और कंपनियों के तिमाही नतीजों को लेकर सतर्क हैं। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च हेड विनोद नायर ने बाजार की इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा, "भू-राजनीतिक अनिश्चितता, कच्चे तेल के अस्थिर दामों और एशियाई बाजारों में कमजोरी के चलते भारतीय शेयर बाजार में आज सुस्ती देखी गई। महंगाई की चिंताओं ने विशेष रूप से फाइनेंशियल और रियल्टी सेक्टर पर दबाव डाला।"
उन्होंने आगे कहा, "हालांकि, चुनिंदा पेट्रोकेमिकल्स पर आयात शुल्क फिर से लागू होने और मजबूत अर्निंग ट्रेंड के दम पर केमिकल सेक्टर आज के कारोबार में चमक बिखेरने में सफल रहा। दूसरी तरफ, अमेरिकी महंगाई में आई नरमी ने ब्याज दरों को लेकर चिंताओं को कम किया है। इससे बाजार को नीचे गिरने से सपोर्ट मिला। आगे चलकर कंपनियों के तिमाही नतीजे, मैनेजमेंट की टिप्पणियां और मानसून की प्रगति बाजार के लिए मुख्य उत्प्रेरक का काम करेंगे।"
सेक्टरों का प्रदर्शन: कहीं छाई हरियाली, कहीं दिखा दबाव
एनएसई (NSE) के सेक्टोरल इंडेक्स पर नजर डालें तो आज मिला-जुला रुख देखने को मिला। जहां एक तरफ निफ्टी मेटल में 0.33 प्रतिशत और निफ्टी पीएसयू बैंक में 0.46 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं दूसरी तरफ, आईटी (Nifty IT), एफएमसीजी (FMCG), मीडिया (Media), फार्मा (Pharma) और ऑटो (Auto) सेक्टर के शेयर बढ़त के साथ हरे निशान पर बंद होने में सफल रहे।
चढ़ने और गिरने वाले प्रमुख शेयर्स
आज के कारोबार में एचसीएल टेक (HCL Tech), इंडिगो (IndiGo), विप्रो (Wipro), मारुति (Maruti), बजाज फाइनेंस (Bajaj Finance) और महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) मुनाफे के साथ टॉप गेनर्स की सूची में शामिल रहे। इसके विपरीत, जोमैटो (Zomato), एसबीआई लाइफ (SBI Life), बजाज फिनसर्व (Bajaj Finserv), बीईएल (BEL) और एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) के शेयरों में आज बिकवाली का दबाव दिखा और ये टॉप लूजर्स साबित हुए।
कमोडिटी मार्केट: कच्चे तेल और सोने-चांदी के दाम
इस कारोबारी सत्र के दौरान वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें मजबूत बनी रहीं। रिपोर्ट लिखे जाने तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 84.68 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। सर्राफा बाजार की बात करें तो 24 कैरेट सोने की कीमत 1,41,551 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई, जबकि चांदी की कीमत 2,19,089 रुपये प्रति किलोग्राम पर बनी हुई थी।
आगे के लिए क्या है मार्केट आउटलुक?
बाजार की भविष्य की दिशा और तकनीकी पहलुओं पर चर्चा करते हुए हेज्ड.इन (Hedged.in) में एचएनआई एंड डेरिवेटिव्स के एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट रियांक अरोड़ा ने कहा, "हालिया उतार-चढ़ाव के बाद बाजार फिलहाल कंसोलिडेशन यानी स्थिरता के दौर से गुजर रहा है। मुख्य सूचकांक लगातार अपने महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल से ऊपर बने हुए हैं। जब तक ये सपोर्ट स्तर सुरक्षित हैं, तब तक बाजार का व्यापक दृष्टिकोण सकारात्मक बना रहेगा। ऐसे में ट्रेडर्स को कड़े जोखिम प्रबंधन (Risk Management) के साथ 'बाय-ऑन-डिप्स' (हर गिरावट पर खरीदारी) की रणनीति अपनानी चाहिए।"
एशियाई बाजारों का रुख
गुरुवार को एशियाई बाजारों में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला। जापान का निक्केई 225 (Nikkei 225) 2.97 प्रतिशत गिरकर 66,771 पर बंद हुआ, जबकि सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स 0.37 प्रतिशत की गिरावट के साथ 5,539 पर रहा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी (KOSPI) भारी गिरावट के साथ 6.8 प्रतिशत टूटकर 6,820 पर बंद हुआ। इसके विपरीत, हॉन्गकॉन्ग का बाजार मजबूत बढ़त दर्ज करते हुए 1.25 प्रतिशत चढ़कर 24,993 के स्तर पर बंद हुआ।
प्रभाव विश्लेषण (Impact Analysis): आम निवेशकों और आपकी जेब पर इसका क्या असर होगा?
- कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड का 84 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने रहना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। इससे आने वाले समय में देश के राजकोषीय घाटे और घरेलू महंगाई (विशेषकर ईंधन और माल ढुलाई) पर सीधा दबाव बढ़ सकता है।
- सोने-चांदी की रिकॉर्ड कीमतें: सराफा बाजार में सोने और चांदी के आसमान छूते भाव आम खरीदारों के बजट को प्रभावित कर रहे हैं। हालांकि, सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग आगे भी मजबूत बनी रहने की उम्मीद है।
- रिटेल निवेशकों के लिए रणनीति: विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार अभी किसी एक स्पष्ट दिशा में बढ़ने के बजाय दायरे में घूम रहा है। ऐसे में रिटेल निवेशकों को जल्दबाजी में बड़ा निवेश करने से बचना चाहिए और केवल मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में ही धीरे-धीरे (SIP के जरिए) पैसा लगाना चाहिए।
(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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