नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक उथल पुथल के

ऑक्सफैम की रिपोर्ट में खुलासा, सिफारिशों से गरीबों पर बढ़ेगा टैक्स का बोझ

ऑक्सफैम की रिपोर्ट में खुलासा, सिफारिशों से गरीबों पर बढ़ेगा टैक्स का बोझ

नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक उथल पुथल के दौर में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) कर संग्रह को लेकर सलाह देने के मामले में अमीर और गरीब देशों के साथ अलग-अलग रवैया अपना रहा है। "ऑक्सफेम" की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है। आईएमएफ के इस रूख को लेकर अब उसकी आलोचना हो रही है। 

"ऑक्सफेम" की रिपोर्ट के मुताबिक, आईएमएफ अमीर और गरीब देशों के लिए अलग-अलग रवैया अपना रहा है। रिपोर्ट के अनुसार कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, ब्रिटेन, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड जैसे समृद्ध देशों को प्रगतिशील करों की सलाह दे रहा है, वहीं भारत सहित दक्षिण एशियाई देशों को ऐसे सुझाव मिले जिनका बोझ गरीबों पर पड़ सकता है।

वाशिंगटन में आईएमएफ और विश्व बैंक की वसंतकालीन बैठकों से पहले जारी किए गए विश्लेषण में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि वैश्विक संस्था धनी देशों को काफी हद तक प्रगतिशील सलाह देकर और अन्य देशों के लिए प्रतिगामी उपायों का सुझाव देकर "दोहरा मापदंड" अपना रही है, जिससे "असमानता बढ़ने की संभावना है"।

रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 से 2024 के बीच भारत को आईएमएफ से सबसे अधिक प्रतिगामी कर सुझाव मिले। ये असमानता बढ़ा सकते हैं, क्योंकि इनसे निम्न और मध्यम आय वर्ग पर अधिक बोझ पड़ता है। आईएमएफ द्वारा निम्न और निम्न मध्यम आय वाले देशों को दिए गए 59 फीसदी कर सुझाव प्रतिगामी थे, जबकि उच्च आय वाले देशों के लिए 52 फीसदी सिफारिशें प्रगतिशील श्रेणी में थीं।

प्रतिगामी कर प्रणाली में कम आय वालों पर उच्च आय वालों की तुलना में अधिक बोझ पड़ता है। इसके विपरीत, आय के अनुपात में लगाया जाने वाला कर प्रगतिशील कहलाता है। 2020 के बाद से अरबपतियों की संपत्ति में 81 फीसदी की वृद्धि हुई है, इसके बावजूद संपत्ति पर कर बढ़ाने जैसे सुझाव बहुत कम दिए गए।

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