वित्त मंत्री से मुलाकात के बाद व्यापारियों का प्रदर्शन वापस, MDR पर हुई चर्चा
नई दिल्ली: कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) के महासचिव और चांदनी चौक के सांसद प्रवीण खंडेलवाल के नेतृत्व में वरिष्ठ व्यापार नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की। इस मुलाकात में 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित 0.40 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को लेकर जताई गई चिंताओं पर चर्चा की गई। बैठक के बाद ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स फेडरेशन (एआईसीपीडीएफ) और ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (एआईएमआरए) ने 2 अक्टूबर, 2026 को होने वाले अपने पूर्व घोषित "नो यूपीआई डे" विरोध प्रदर्शन को वापस लेने का फैसला किया।
वित्त मंत्री से चर्चा के बाद व्यापारियों ने बंद का फैसला टाला
मीडिया को जानकारी देते हुए खंडेलवाल ने कहा कि वित्त मंत्री के साथ हुई सकारात्मक चर्चा और व्यापार समुदाय द्वारा उठाई गई चिंताओं पर उचित विचार किए जाने के आश्वासन के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया है। नई दिल्ली के कर्तव्य भवन स्थित वित्त मंत्री के कार्यालय में आयोजित इस बैठक में विभिन्न राज्यों के लगभग 20 वरिष्ठ व्यापार नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया। प्रतिनिधिमंडल में सीएआईटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया, एआईसीपीडीएफ के अध्यक्ष धैर्यशील पाटिल, एआईएमआरए के अध्यक्ष कैलाश लखयानी, ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन के अध्यक्ष पंकज अरोरा और व्यापार एवं खुदरा क्षेत्र के विभिन्न प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
वित्त मंत्री ने हितों की रक्षा का दिया भरोसा
इससे पहले लखयानी और पाटिल ने प्रस्तावित एमडीआर (मर्ड डिलिवरेबल रेट) के व्यापारियों, विशेषकर लघु एवं मध्यम व्यवसायों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव पर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने व्यापारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ न पड़े, यह सुनिश्चित करते हुए डिजिटल भुगतान की वृद्धि को बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक के दौरान सीतारमण ने व्यापार प्रतिनिधियों की चिंताओं को सुना और उन्हें आश्वासन दिया कि सरकार हितधारकों के हितों की रक्षा करते हुए डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रतिनिधिमंडल ने इस मुद्दे पर व्यापार निकायों के साथ संवाद करने में वित्त मंत्री और वित्त मंत्रालय द्वारा अपनाए गए दृष्टिकोण की सराहना की।
व्यापारियों ने UPI को समर्थन दिया
व्यापार नेताओं ने डिजिटल इंडिया मिशन और यूपीआई की वृद्धि के लिए अपना समर्थन दोहराया, जिसे उन्होंने भारत के डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र में एक बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य डिजिटल भुगतान के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि डिजिटल लेनदेन से संबंधित नीतियां संतुलित रहें और उपभोक्ताओं, व्यापारियों और लघु एवं मध्यम व्यवसायों के लिए सहायक हों। प्रतिनिधिमंडल ने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार और व्यापार संगठनों के बीच निरंतर संवाद से लाखों व्यापारियों और छोटे व्यवसायों के हितों की रक्षा करते हुए भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक स्थायी ढांचा विकसित करने में मदद मिलेगी।
(इनपुट: ANI)
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