AI और सेमीकंडक्टर जैसे 12 सनराइज सेक्टर्स में लाखो

AI और सेमीकंडक्टर में भारी निवेश, फिर भी लोन देने में क्यों कतरा रहे बैंक? यूनियन बैंक की रिपोर्ट में खुलासा

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नई दिल्ली। देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे नए दौर के उद्योगों में भारी निवेश आ रहा है। इसके बावजूद बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFC) इन सेक्टर्स को कर्ज देने में हिचकिचा रही हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (Union Bank of India) की एक ताजा रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।

यूनियन बैंक की अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक, देश में अगली लहर का कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) 12 नए और उभरते हुए सेक्टर्स से आएगा। इनमें AI, सेमीकंडक्टर, डिफेंस, बायोटेक्नोलॉजी और ग्रीन हाइड्रोजन सबसे आगे हैं।

तीन प्रमुख सेक्टर्स में 16 लाख करोड़ से ज्यादा का निवेश

आंकड़ों पर नजर डालें तो अकेले AI सेक्टर में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की तरफ से लगभग 5.9 लाख करोड़ रुपये के निवेश का ऐलान हो चुका है। इसके बाद सेमीकंडक्टर में 5.27 लाख करोड़ रुपये और रक्षा (डिफेंस) सेक्टर में 5.07 लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना है।

इसके अलावा, वैश्विक हाइपरस्केलर्स और निजी कंपनियों ने AI व डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 400 अरब डॉलर (30 लाख करोड़ रुपये से अधिक) से ज्यादा की प्रतिबद्धता जताई है। वहीं, सेमीकंडक्टर सेक्टर में 2026 से 2032 के बीच 4 लाख करोड़ रुपये के निजी निवेश का लक्ष्य रखा गया है।

"मैन्युफैक्चरिंग और पावर प्रोजेक्ट्स में कर्ज (Debt Financing) का दबदबा है, जबकि AI और स्पेस सेक्टर मुख्य रूप से इक्विटी-फंडेड हैं।" - यूनियन बैंक रिपोर्ट

फिर बैंक क्यों कतरा रहे हैं लोन देने से?

रिपोर्ट के अनुसार, इन हाई-टेक सेक्टर्स में बैंकों के पीछे हटने की सबसे बड़ी वजह 'टेक्नोलॉजी का तेजी से पुराना पड़ना' (Technology Obsolescence) है।

तकनीक बदलने की रफ्तार: चिप डिजाइन और नोड्स हर 3 से 5 साल में बदल जाते हैं, जबकि GPU हर 18 से 24 महीने में अपडेट हो जाते हैं।

लंबा रिकवरी पीरियड: सेमीकंडक्टर में निवेश की रिकवरी में 5 से 8 साल और स्पेस तकनीक में 7 से 10 साल लगते हैं। यह बैंकों के पारंपरिक लोन देने की समयसीमा से काफी अधिक है।

भुगतान और खरीदार का जोखिम: ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में भरोसेमंद खरीदार कम हैं, रिन्यूएबल एनर्जी में बिजली वितरण कंपनियों (Discoms) की ओर से पेमेंट में देरी होती है, और रक्षा मंत्रालय के पेमेंट चक्र लंबे होते हैं।

बैंकों को दिए गए खास सुझाव

यूनियन बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए बैंकिंग सेक्टर को अपने तरीके बदलने होंगे। बैंकों को सेमीकंडक्टर, हाइड्रोजन, डेटा सेंटर और बैटरी स्टोरेज के लिए विशेष सेक्टर-विशिष्ट डेस्क (Specialised Desks) बनाने चाहिए।

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि बैंकों को पारंपरिक क्रेडिट मॉडल के बजाय माइलस्टोन-लिंक्ड डिसबर्समेंट (काम की प्रगति के आधार पर फंड जारी करना), ऑर्डर-बुक फाइनेंसिंग, इक्विपमेंट लीजिंग और ग्रीन लोन जैसे नए वित्तीय प्रॉडक्ट्स पर जोर देना चाहिए। आने वाले 3 से 5 वर्षों में मांग में बदलाव आएगा और यह स्टोरेज, एज डेटा सेंटर्स और डिफेंस MSME की तरफ शिफ्ट होगी। ​(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)

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