ऊंची कीमतों के बीच केंद्रीय बैंकों ने तीसरी तिमाही

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल रिपोर्ट: 2026 की तीसरी तिमाही में 321 टन बढ़ी केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीदारी

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नई दिल्ली। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2026 की तीसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने रिकॉर्ड खरीदारी करते हुए 321 टन सोना अपने रिजर्व में जोड़ा। 

इस जोरदार खरीदारी के साथ ही साल 2026 के पहले 9 महीनों में केंद्रीय बैंकों की कुल सोने की खरीद 675 टन तक पहुंच गई है, जो पिछले साल के मुकाबले 6 फीसदी अधिक है।

केंद्रीय बैंकों की ओर से यह मजबूत रुझान ऐसे समय में दिखा है, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। ऊंची कीमतों की वजह से खुदरा आभूषणों की खपत और सिक्कों-छड़ों (Bars) की खरीदारी पर दबाव देखा गया है।

जुलाई से सितंबर के बीच हुई यह खरीदारी हाल की तिमाहियों के औसत स्तर से काफी ज्यादा है। WGC का मानना है कि इस साल केंद्रीय बैंकों की कुल सोने की खरीदारी कम से कम 2025 के स्तर को जरूर हासिल कर लेगी।

कीमतों के रिकॉर्ड स्तर के बावजूद सोने की वैश्विक मांग मजबूत

तीसरी तिमाही में ओवर-द-काउंटर (OTC) निवेश सहित कुल वैश्विक सोने की मांग में 1 फीसदी की मामूली गिरावट आई और यह 1,369 टन रही। हालांकि, 2026 के शुरुआती 9 महीनों की बात करें तो कुल मांग 3,881 टन दर्ज की गई है। 

यह आंकड़ा 2025 की इसी अवधि में दर्ज 3,884 टन के सर्वकालिक उच्च स्तर के लगभग बराबर है।

सोने की ऊंची कीमतों का असर इसके कुल मूल्य पर भी स्पष्ट रूप से दिखा। इस साल अब तक वैश्विक स्तर पर सोने की कुल मांग का मूल्य 566 अरब अमेरिकी डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।

तीसरी तिमाही में लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन (LBMA) का औसत सोना भाव 4,262 डॉलर प्रति औंस रहा। यह इतिहास का तीसरा सबसे ऊंचा तिमाही औसत मूल्य है, जो पिछले साल से 23 फीसदी अधिक है।

निवेशकों का बदला रुझान: गोल्ड ETF में निवेश बढ़ा, सिक्कों की मांग घटी

निवेश के मोर्चे पर मिश्रित रुझान देखने को मिले। गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) में दूसरी तिमाही में देखी गई निकासी का दौर थमा और तीसरी तिमाही में इसमें 211 टन का नया निवेश आया।

WGC का कहना है कि विभिन्न देशों में राजकोषीय घाटे और महंगाई को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण निवेशकों का भरोसा एक बार फिर गोल्ड ETF की तरफ लौटा है।

इसके विपरीत, भौतिक रूप से छड़ (Bars) और सिक्के खरीदने की मांग में 19 फीसदी की गिरावट आई और यह घटकर 268 टन रह गई। निवेशक बाजार में कीमतों का एक स्पष्ट रुख तय होने का इंतजार कर रहे हैं।

महंगे भाव से आभूषण बाजार पर असर, लेकिन टेक्नोलॉजी सेक्टर में बढ़ी खपत

सोने की रिकॉर्ड कीमतों का सबसे ज्यादा असर आभूषण उद्योग पर पड़ा है। जुलाई-सितंबर तिमाही में वैश्विक आभूषण मांग 17 फीसदी घटकर 313 टन रह गई, जो WGC के आंकड़ों में तीसरी तिमाही का सबसे कमजोर स्तर है। 

हालांकि, कीमतों में तेजी के कारण कुल बिक्री मूल्य 2 फीसदी बढ़कर 43 अरब डॉलर हो गया।

दूसरी तरफ, टेक्नोलॉजी क्षेत्र में सोने की खपत में 3 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में तेजी के कारण तकनीक के क्षेत्र में सोने का इस्तेमाल बढ़ा है।

सोने की खदानों से रिकॉर्ड उत्पादन, रीसाइक्लिंग में आई कमी

सप्लाई के मोर्चे पर, खदानों से सोने का उत्पादन 3 फीसदी बढ़कर 1,071 टन हो गया, जो तीसरी तिमाही का एक नया रिकॉर्ड है। इसके बावजूद, कुल वैश्विक गोल्ड सप्लाई 1 फीसदी घटकर 1,369 टन पर आ गई।

पुराने सोने की रीसाइक्लिंग (Recycling) में 8 फीसदी की गिरावट आई और यह 314 टन पर आ गई, जो पिछले तीन सालों का सबसे निचला स्तर है।

आगे का परिदृश्य: क्या बनी रहेगी सोने की चमक?

आगामी समय को लेकर WGC का अनुमान है कि ETF, बार और सिक्कों के रूप में निवेश मांग मजबूत बनी रहेगी। हालांकि, आभूषणों की खपत पर ऊंची दरों का दबाव आगे भी बना रह सकता है। (इनपुट: ANI)

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