कॉमेडी में जाति, धर्म और क्षेत्र से जुड़े मजाक पर

कैलाश खेर की कॉमेडी विवाद पर नसीहत, बोले- ‘चेतन रहें, तमीज में रहें और दिल जीतना सीखें’

Kailash Kher on Comedy Row: Stay Aware, Respectful and Win Hearts

मुंबई (महाराष्ट्र)। कॉमेडी के नाम पर जाति, धर्म और क्षेत्र से जुड़े मजाक को लेकर छिड़ी बहस के बीच गायक कैलाश खेर ने लोगों से चेतन और तमीज में रहने की अपील की है। इंडियाज गॉट लेटेंट में बिहार और कश्मीर से जुड़े मजाक पर हो रही आलोचना के बीच खेर ने कहा कि हर किसी को यह समझना चाहिए कि कैसे हंसना है, कैसे हंसाना है और कैसे किसी का दिल जीतना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सार्वजनिक बातचीत में जागरूकता और विनम्रता जरूरी है।

कैलाश खेर ने संगीत से जोड़ा कॉमेडी का अनुशासन

बात करते हुए, खेर से कॉमेडियन द्वारा कश्मीरी पंडितों और बिहारियों से जुड़े बयानों का मज़ाक उड़ाने और सोशल मीडिया पर स्टैंड-अप कॉमेडी को लेकर चल रही बहस के बारे में पूछा गया। खेर ने कहा, "देखिए, अगर मैं आपको संगीत के नजरिए से बताऊं, तो संगीत सिर्फ एक धुन नहीं है, यह ऐसी चीज है जो आपको हंसा भी सकती है, यह अनुशासन का एक रूप भी है। इसलिए, आपको संगीत में बने रहना चाहिए।"

चेतन और तमीज में रहने की अपील

उन्होंने आगे कहा, "अगर आपकी संगीत की धुन सही नहीं है, तो हो सकता है कि आप किसी का मजाक उड़ा बैठें।" इसके बाद खेर ने व्यवहार और विनम्रता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "इसलिए इंसान को चेतन रहना चाहिए, तमीज में रहना चाहिए और सबको अपनी-अपनी तमीज से बात करनी चाहिए। सबको इतना तो पता ही है कि कैसे जीना है, कैसे हंसना है और कैसे हंसाना है, कैसे किसी का दिल जीतना है।"

कामयाबी के साथ आलोचना भी आती है

उन्होंने अपनी कामयाबी के सफ़र पर भी बात की और कहा कि उन्होंने हमेशा विनम्रता से पेश आने की कोशिश की है। उन्होंने कहा, "मैं हमेशा विनम्र रहा हूं," साथ ही यह भी माना कि लोकप्रियता के साथ आलोचना, जलन और दुश्मनी भी आ सकती है।

कॉमेडी विवाद के बीच खेर का बयान

खेर ने कहा, "आलोचक होंगे, नफरत करने वाले होंगे, जलने वाले लोग होंगे। तब आपको एहसास होगा कि आप कितनी दूर आ गए हैं।" कैलाश खेर की यह टिप्पणी 'इंडियाज गॉट लेटेंट' (India's Got Latent) के दूसरे सीजन में कॉमेडियन समय रैना और कॉमेडियन शेरोन वर्मा के बीच हुई बातचीत की आलोचना के बीच आई है। इस बातचीत में बिहार और कश्मीर से जुड़े मजाकों ने राजनीतिक ध्यान खींचा है।

बिहार-कश्मीर मजाक पर छिड़ा विवाद

पहले सीजन की कंटेस्टेंट रहीं शेरोन वर्मा, समय रैना, ओरी, अर्चना पूरन सिंह और निशांत सूरी के साथ पैनलिस्ट के तौर पर शामिल हुई थीं। एपिसोड के दौरान, रैना ने वर्मा के बिहारी मूल और काम के लिए पलायन से जुड़ी रूढ़ियों पर मजाक किया। जवाब में वर्मा ने रैना की कश्मीरी पहचान और "नशा करने" (stoned) पर मजाक किया और यह भी कहा कि उन्होंने "कम से कम अपनी मर्जी से अपना राज्य छोड़ा था।"

नेताओं ने भी कॉमेडी पर उठाए सवाल

यह बातचीत आपसी मजाक-मस्ती जैसी लग रही थी, जिसमें दोनों कॉमेडियन मजाक में शामिल थे। हालांकि, एपिसोड की क्लिप्स पर ऑनलाइन तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं और इन टिप्पणियों ने राजनीतिक ध्यान भी खींचा है। बात करते हुए, शिवसेना (UBT) नेता आनंद दुबे ने रैना की कॉमेडी की आलोचना की और कहा कि कॉमेडियन को अपने रूटीन में जाति, राज्य या धर्म को लाने से बचना चाहिए।

आनंद दुबे ने समय रैना की आलोचना की

उन्होंने कहा, "समय रैना एक कॉमेडियन हैं। उनकी कॉमेडी में अक्सर बहुत ज़्यादा अश्लीलता होती है। वह पहले भी कई विवादों में रहे हैं। वह हमेशा से एक विवादित व्यक्ति रहे हैं। लेकिन समय रैना ने अभी एक और विवादित बयान दिया है। एक अन्य कॉमेडियन, शेरोन वर्मा के साथ उनकी हालिया बहस उनकी समझ की भारी कमी को दिखाती है। 

ये लोग पैसे कमाने के लिए किसी भी हद तक गिर सकते हैं। समय रैना न तो बिहार को और न ही जम्मू-कश्मीर को ठीक से समझते हैं। हालांकि वह जम्मू-कश्मीर से हैं, लेकिन वह उस क्षेत्र के प्रति कोई वफादारी नहीं दिखाते, और निश्चित रूप से बिहार के लोगों के प्रति भी नहीं बस कॉमेडी तक ही सीमित रहें। इसमें खास जातियों, राज्यों या धर्मों को क्यों घसीटें?"

राम कदम ने सख्त कानून की मांग की

बीजेपी नेता राम कदम ने भी धार्मिक या अन्य भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाली टिप्पणियों के खिलाफ़ सख़्त कानूनी कार्रवाई की मांग की और साथ ही लोगों से सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देने की अपील की। "हम सभी किसी भी कलाकार के हुनर ​​और उसकी कला का सम्मान करते हैं, लेकिन अगर कला के नाम पर किसी की आस्था, विश्वास या भावनाओं को ठेस पहुंचाई जाती है, तो इसका सीधा मतलब है कि कलाकार लोगों को दुख पहुंचाने के लिए कुछ हदें पार कर रहा है। 

अब यह एक ट्रेंड बन गया है। पब्लिसिटी स्टंट के लिए लोग देवी-देवताओं या भावनाओं को बीच में ले आते हैं और आखिर में बस माफी मांग ली जाती है। अब इसके खिलाफ सख्त कानून बनाने का समय आ गया है। ताकि किसी में भी ऐसी हरकतें करने की हिम्मत न हो। सख्त कानून बनाना समय की मांग है, लेकिन जब तक ऐसा कानून नहीं बनता, जनता को सोशल मीडिया पर ऐसे लोगों का बहिष्कार करना चाहिए ताकि उन्हें अक्ल आ जाए। 

भावनाओं को ठेस पहुंचाने पर कार्रवाई की मांग

चाहे समय रैना हों या कोई और, कला के नाम पर किसी की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाई जा सकती, और अगर कोई ऐसा करता है, तो उसे माफ नहीं किया जा सकता," उन्होंने कहा। समय रैना और शेरॉन वर्मा ने अपनी बातचीत को लेकर हो रही आलोचना पर अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। (Source: ANI)

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