'ओह माय डॉग' में दिखेगा इंसान और जानवरों के बीच भावनात्मक रिश्ता: पवन मल्होत्रा, राजेश कुमार
मुंबई,(महाराष्ट्र)। पवन मल्होत्रा, राजेश कुमार और निर्देशक अमित राय सहित 'ओह माय डॉग' के कलाकारों ने कुत्तों के प्रति अपना प्यार व्यक्त किया और कहा कि उनकी आगामी फिल्म इंसानों और कुत्तों के बीच भावनात्मक बंधन को दर्शाती है, खासकर उन आवारा और वंचित जानवरों की कहानियों पर ध्यान केंद्रित करती है जो अक्सर अनकही रह जाती हैं।
कुत्तों की लोगों के प्रति वफादारी और समर्पण
ANI से बात करते हुए निर्देशक अमित राय ने कहा कि उनकी आगामी फिल्म इंसानों और जानवरों के बीच अनकहे बंधन को उजागर करने का प्रयास है, जिसमें कुत्तों की लोगों के प्रति वफादारी और समर्पण भी शामिल है। अमित राय ने कहा, "बुनियादी मानवीय भावनाएं कहानी का आधार हैं, लेकिन इस बार दृष्टिकोण इंसानों के बारे में नहीं है। यह इंसानों की जानवरों के प्रति भावनाओं और जानवरों के इंसानों के प्रति समर्पण के बारे में है। यह उनके बीच अनकही रेखा या रिश्ते को खोजने का एक प्रयास है। अगर आप किसी वंचित व्यक्ति की जगह होते, तो आप सबसे पहले उसी के बारे में सोचते। इसलिए, पहला विचार उन वंचितों के बारे में आया, जिनकी कहानी कोई नहीं सुनाता, इसलिए मैंने सोचा, चलो उनकी कहानी सुनाते हैं। बाकी लोग दूसरे की कहानी सुना देंगे।"
आवारा कुत्तों के प्रति संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता
अभिनेता पवन मल्होत्रा ने आवारा कुत्तों के प्रति संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसमें नसबंदी, गोद लेना और जिम्मेदार देखभाल शामिल है, साथ ही जानवरों के प्रति क्रूरता की निंदा की। उन्होंने यह भी बताया कि प्रेम और करुणा मानवता के मूल तत्व हैं। पवन मल्होत्रा ने कहा, "यह सच है कि ज्यादातर लोग एक खास नस्ल के कुत्ते पालते हैं, और एक नया शब्द भी सामने आया है, 'रोडेशन'; इसका मतलब है कि आप सड़क से किसी जानवर को उठा लेते हैं। अगर कोई कुत्ता काट ले, तो उसका भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
प्रत्येक जीवित प्राणी के मूल्य और क्षमता की पहचान
इसलिए, हर चीज में संतुलन होना चाहिए। इसके लिए आपको एक छोटा सा अभियान चलाना होगा; आपको यह प्रयास करना होगा कि आवारा कुत्तों की नसबंदी की जाए, और कुछ लोग उन्हें घर पर गोद लें। कुछ लोग कुत्तों को खाना खिलाते हैं और उनकी मदद करने के लिए अपनी तरफ से हर संभव प्रयास करते हैं। प्रेम में आनंद है, और यही मानवता है।" अभिनेता राजेश कुमार ने प्राणियों को उनके रूप-रंग या पसंद के आधार पर आंकने की मानवीय प्रवृत्ति पर काबू पाने की बात कही, और एकता के महत्व पर जोर देते हुए प्रत्येक जीवित प्राणी के मूल्य और क्षमता को पहचानने की बात कही, चाहे वह नस्ल का कुत्ता हो या आवारा।
कुत्ते पालतू जानवर और शुरुआत से ही हमारे साथ
एएनआई से बात करते हुए राजेश ने कहा, "कुत्ते पालतू जानवर हैं और शुरुआत से ही हमारे साथ रहे हैं। हमारी सबसे बड़ी समस्या द्वैतवाद की है। हमने हर चीज को अच्छा, बुरा, पसंद और नापसंद में बांट दिया है। इसलिए, मुझे लगता है कि यह इस बारे में नहीं है कि दूसरा व्यक्ति कैसा दिखता है या कैसा व्यवहार करता है। इससे उस प्राणी के प्रति हमारी भावना तय नहीं होनी चाहिए। यह एकता के बारे में है। प्रकृति ने कभी भेदभाव नहीं किया, तो हमें क्यों करना चाहिए? इसलिए, जिस दिन यह द्वैतवाद समाप्त होगा, आवारा कुत्ता भी डोबरमैन जितना ही सुंदर लगेगा।"
फिल्म को अमित राय ने लिखा और निर्देशित किया
इस फिल्म को अमित राय ने लिखा और निर्देशित किया है। फिल्म में माही राय, राजेश कुमार, गीता अग्रवाल, विजय मिश्रा, श्रीधर दुबे, बुलू कुमार और सुलाख्याना बरुआ भी मुख्य भूमिका में हैं। यह फिल्म 31 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। फिल्म का निर्माण अमित राय, राजेश भारद्वाज और सना वारसी ने बाबूलाल बिस्कोप और थिंकिंग हैट्स एंटरटेनमेंट के बैनर तले किया है। (एएनआई)
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