अब तक छह राज्यों में 15 बीएलओ की मौत, मध्यप्रदेश में 4
BLO : स्पेशल इंटेसिव रिवीजन को लेकर देश में चल रही बूथ लेवल अफसरों (बीएलओ) की बीमारी और मौत चिंता का कारण बनती जा रही है। यह 12 राज्यों और केद्र शासित प्रदेशों में चल रही है। 24 घंटे में अब तक देश में 15 बीएलओ की मौत हुई है। वहीं, मध्यप्रदेश में 2 बीएलओ की मौत हो गई है।
पिछले 24 घंटे में भोपाल में 50 से अधिक बीएलओ बीमार हो गये। इसमें से 2 को हृदयघात और 1 को ब्रेन हेमरेज हुआ है। दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल में एक महिला बीएलओ ने आत्महत्या कर ली है। परिवार के लोगों ने अधिक काम का प्रेशर बताया है। 4 नवंबर को शुरू हुए प्रक्रिया में 19 दिन में 6 राज्यों में 15 बीएलओ की मौत हो चुकी है।
इसमें मध्यप्रदेश औऱ गुजरात में 4-4, पश्चिम बंगाल में 3 राजस्थान में 2, केरल औऱ तमिलनाडु में 1-1 बीएलओ की जान गई है। इस बीच मध्यप्रदेश में 19 दिन में 100 फीसदी गणना पत्रक बांटे जा चुके हैं। लेकिन 51 फीसदी काम ही डिजिटल हुआ है। सभी को 1 दिसंबर तक आनलाइन करना है। इससे काम का दबाव बीएलओ पर है।
मध्यप्रदेश के रायसेन में गुरुवार को बीएलओ रमाकांत पांडे की मौत हो गई। परिवार वाले बताता हैं कि वे चार रात से सोये नहीं थे। आनसाइन मीटिंग को बाद बेहोश होकर गिर गये। उसके बाद उन्हें बचाया नहीं जा सका। इसी तरह दमोह में भी 50वर्ष के सीताराम गोंड की मौत हो गई। रायसेन में बीएलओ नारायण सोनी छह दिन से लापता हैं।
परिवार के लोग बताते हैं कि वे परेशान थे। इसी तरह भोपाल में कीर्ति कौशल काम कर रही थी। कीर्ति और मोहम्मद लईक को काम के दौरान ही हाई अटैक आया था। दोनों भर्ती हैं। इसी प्रकार दमोह में श्याम शर्मा (45) की मौत हुई थी और दतिया के उदयभान सिहारे (50) ने खुदकुशी कर लिया था।
मालूम हो कि मध्य प्रदेश में गणना पत्रक छपने में देरी हुई। यह बीएलओ को देरी से मिली। इसके बाद चुनौती थी कि घर-घर जाकर उसे भरें और पोर्टल पर चढ़ाएं। बीएलओ को औसत रूप से 18 घंटे काम करना पड़ता है। हर घर में तीन बार जाना पड़ता है। लोग घर में नहीं मिलते। इसके साथ ही बीएलओ एप भी सही से काम नहीं कर रहा है।
हर दिन काम का दबाव और नोटिस मिलने या निलंबित होने का डर रहता है। सर्वे में लगे लोगों को सिर्फ दो हजार महीना मिलता है। सुपरवाइजर को हर महीने 1500 रुपये मिलते हैं। आयोग ने गणना पत्र छापने का काम एक ही वेंडर को दिया है। इसका नतीजा 4 नवंबर को सर्वे तो शुरू हो गया, पर बीलओ के पास यह पत्र 12 नवंबर को पहुंचा।
इस बीच चुनाव आयोग के संयुक्त सीईओ आरपीएस जादौन कहते हैं कि जो मतदाता घर पर नहीं मिल रहे, उसकी पूरी सूची अभियान खत्म होने के बाद बीएलओ देंगे। अभी कोई अंतिम सूची नहीं है। 4 नवंबर स 4 दिसंबर तक एसआईआर का काम चल रहा है। अभी तक मध्य प्रदेश में 51 फीसदी यानि कि 2.75 करोड़ गणना पत्रक ही जमा हुए हैं। 9 दिसंबर को नई मतदाता सूची का ड्राफ्ट तैयार होगा। प्रदेश में 65 हजार बीएलओ काम कर रहे हैं।
यह परेशानी -
इस अभियान में डुप्लीकेट, शिफ्टिंग और मृत्यु के मामसे काफी हैं। करीब 35 लाख मतदाता का पता नहीं मिल रहा है। तलाकशुदा महिलाएं, कालेज छात्र, प्रवासी मजदूर, और घुम्मकड़ समाज के लोग नहीं मिल पाते। इससे फार्म करेक्शन में दिक्कत होती है। इसके साथ कई घरों में सिर्फ बुजुर्ग या अशिक्षित मिलते हैं। उन्हें फार्म भरने में दिक्कत होती है। कई लोग तो इसे सरकारी योजना समझते हैं। इससे उनमें भ्रम रहता है। इसके अलावा प्रवासी मजदूर, कामकाजी परिवार औऱ घुम्मकड़ परिवार के कारण भी बीएलओ बार-बार खाली लौटते हैं। इससे सर्वे मुश्किल हो जाता है। कुछ जानकारी पत्रक पूरा भरने के बाद 4 दिसंबर को पता चलेगा।
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