पश्चिम एशिया संकट पर संसद में बड़ा खुलासा! विदेश म

पश्चिम एशिया संघर्ष: 10 नाविकों समेत 16 भारतीयों की मौत, सरकार ने संसद में दी जानकारी

16 Indians Killed in West Asia Crisis, 2,557 Evacuated Safely

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव और संघर्ष के बीच भारत सरकार ने संसद में एक बड़ा और संवेदनशील आंकड़ा साझा किया है। विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि इस क्षेत्रीय संकट की चपेट में आने से अब तक 16 भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है, जिनमें 10 नाविक (Seafarers) भी शामिल हैं। राज्यसभा में एक अतारांकित (Unstarred) लिखित सवाल के जवाब में सरकार ने स्पष्ट किया है कि विदेशों में फंसे नागरिकों की सुरक्षा, उनके बचाव कार्य और परिवारों को मिलने वाले मुआवजे के लिए कूटनीतिक स्तर पर युद्ध स्तर पर काम किया जा रहा है।

संकट के आंकड़े और भौगोलिक स्थिति: कहां कितना नुकसान?

राज्यसभा में गुरुवार को पूछे गए एक प्रश्न के अतारांकित (Unstarred) लिखित उत्तर में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने पश्चिम एशिया संकट के दौरान हताहत हुए भारतीयों का देश-वार पूरा ब्योरा पेश किया:

  • मृतकों का देश-वार ब्योरा: ओमान में 8, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में 4, कुवैत में 2, सऊदी अरब में 1 और इराक में 1 भारतीय नागरिक की जान गई है।
  • घायलों की कुल संख्या: पूरे क्षेत्र में 75 भारतीय नागरिक घायल हुए हैं। इनमें यूएई में 32, ओमान में 24, कुवैत में 13, कतर में 4, सऊदी अरब में 1 और इजराइल में 1 घायल नागरिक शामिल है।
  • ईरान से सुरक्षित निकासी: भारतीय दूतावास ने कूटनीतिक पहल करते हुए 2,557 भारतीय नागरिकों को ईरान से आर्मेनिया और अज़रबैजान के रास्ते सुरक्षित रूप से सीमा पार कराई, ताकि वे वहां से अपने स्वदेश लौट सकें।
  • कतर गैस प्लांट हादसा: इसके अलावा, एक अलग दुर्घटना में कतर के रास लाफन गैस फैसिलिटी में 12 भारतीय नागरिकों की मौत हो गई थी, जिसके पीड़ितों को भी सरकार ने सहायता पहुंचाई है।

घायलों का इलाज और कूटनीतिक सहायता

सरकार ने बताया कि संकट से प्रभावित परिवारों को लगातार प्रशासनिक और कूटनीतिक सहायता दी जा रही है। स्थानीय अस्पतालों में घायल भारतीयों का मुफ्त और बेहतर इलाज सुनिश्चित किया गया है। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने सदन को जानकारी देते हुए कहा, "घायल भारतीय नागरिकों को स्थानीय अस्पतालों में चिकित्सा उपचार मिला। भारतीय दूतावासों और महावाणिज्य दूतावासों ने स्वास्थ्य स्थिति पर नियमित अपडेट के लिए स्थानीय अधिकारियों और अस्पतालों के साथ समन्वय किया और सभी आवश्यक सहायता प्रदान की, जैसे परिवार के सदस्यों से संपर्क स्थापित करना, उपलब्ध यात्रा विकल्पों पर मार्गदर्शन और उनकी सुरक्षित भारत वापसी आदि।"

वित्तीय मुआवजे का खाका और बीमा कवरेज

युद्ध क्षेत्र में मारे गए नाविकों (Seafarers) और कामगारों के परिवारों के लिए मुआवजे की व्यवस्था को बेहद पारदर्शी बनाया गया है। डीजीएमए कल्याण योजना (नामिक कल्याण कोष समाज - SWFS) के तहत युद्ध क्षेत्र की घटनाओं के लिए 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि (Ex-gratia) का प्रावधान है। उचित जांच-पड़ताल और सत्यापन के बाद यह राशि तुरंत मृतक के परिजनों को ट्रांसफर की जाती है।

इसके अलावा सामूहिक सौदेबाजी समझौतों (Collective Bargaining Agreements) के तहत अतिरिक्त मुआवजे का प्रावधान भी लागू है:

मेरीटाइम यूनियन ऑफ इंडिया के माध्यम से अधिकारियों के लिए 12 लाख रुपये। नेशनल यूनियन ऑफ सीफेयरर्स ऑफ इंडिया के माध्यम से क्रू सदस्यों के लिए 10 लाख रुपये।

पोत के प्रोटेक्शन एंड इंडिमनिटी (P&I) बीमा कवर के तहत मिलने वाले मुआवजे को लेकर मंत्री ने स्पष्ट किया कि संबंधित दोनों रिक्रूटमेंट एंड प्लेसमेंट सर्विस लाइसेंस धारक पीएंडआई क्लब या बीमाकर्ता के साथ दावों को आगे बढ़ाने के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार होते हैं। नाविकों की मौत से जुड़े मुआवजे का समन्वय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है। सरकार ने यह भी बताया कि 16 मामलों में से 5 मामलों में भुगतान पहले ही डिसबर्स (वितरित) किया जा चुका है।

वहीं, कतर गैस फैसिलिटी हादसे से प्रभावित परिवारों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से 2-2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी गई। हालांकि सरकार ने यह भी जोड़ा कि कतर के स्थानीय अधिकारियों द्वारा स्वतंत्र रूप से दिए गए प्रत्यक्ष मुआवजे का वह व्यक्तिगत रिकॉर्ड नहीं रखती है।

कूटनीतिक कार्रवाई और आपातकालीन तंत्र

संकट प्रबंधन और निकासी अभियानों को धार देने के लिए विदेश मंत्रालय ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ मिलकर वाणिज्यिक उड़ानों, गैर-अनुसूचित उड़ानों और उन पड़ोसी देशों के रास्ते ट्रांजिट वीजा की व्यवस्था की, जहां एयरस्पेस प्रतिबंधित थे।

क्षेत्रीय सुरक्षा संकट से निपटने के लिए सरकार ने एक बहु-स्तरीय ढांचा तैयार किया है जिसमें नियमित एडवाइजरी जारी करना, चौबीस घंटे सक्रिय रहने वाले कंट्रोल रूम और इमरजेंसी हेल्पलाइन शामिल हैं। विदेश मंत्रालय का 'रैपीड रिस्पांस सेल' सशस्त्र बलों और अन्य मंत्रालयों के साथ मिलकर इन अभियानों को अमलीजामा पहना रहा है। मंत्रालय भविष्य के निकासी अभियानों को और अधिक डिजिटल और तेज बनाने के लिए एक नए डिजिटल इमरजेंसी रिस्पांस सॉल्यूशन के ट्रायल को अंतिम रूप दे रहा है। ​(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)   यह भी पढ़ें: पेपर लीक रोकने वाला विधेयक राज्यसभा में पारित, 10 साल तक की सजा और 50 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान