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सज्जन कुमार की मौत पर 1984 दंगा पीड़ित परिवार ने कहा- फांसी होती तो ज्यादा शांति मिलती

1984 Riot Victim Family Reacts to Sajjan Kumar's Death, DSGMC Recalls Legal Battle

नई दिल्ली (भारत)। 1984 के सिख-विरोधी दंगों के मामले में दोषी ठहराए गए पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार की मौत के बाद शुक्रवार को प्रतिक्रियाएं सामने आईं। 1984 के दंगों से प्रभावित परिवार की सदस्य गंगा कौर ने कहा कि हिंसा का दर्द आज भी बना हुआ है। उन्होंने कहा कि उनके परिवार के सदस्यों को उनके सामने जिंदा जला दिया गया था। गंगा कौर ने कहा कि सज्जन कुमार की मौत स्वाभाविक रूप से हुई, लेकिन अगर उन्हें फांसी दी जाती तो परिवार को ज्यादा शांति मिलती।

DSGMC ने याद की कानूनी लड़ाई

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति (DSGMC) के उपाध्यक्ष आत्मा सिंह लुबाना ने सज्जन कुमार के खिलाफ चली कानूनी कार्यवाही को याद किया। उन्होंने बताया कि पिछली सरकार के दौरान सेशन कोर्ट ने सज्जन कुमार को क्लीन चिट दी थी। DSGMC ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके बाद मामले में आगे कानूनी कार्रवाई हुई। लुबाना के मुताबिक, कुमार ने सरेंडर किया और 31 दिसंबर 2019 को तिहाड़ जेल चले गए थे।

जमानत की कई कोशिशों का भी किया जिक्र

आत्मा सिंह लुबाना ने कहा कि सज्जन कुमार ने जेल में रहने के दौरान जमानत पाने की कई कोशिशें की थीं। हालांकि, उनके मुताबिक, कुमार को जमानत नहीं मिल सकी क्योंकि पीड़ितों की ओर से मजबूत वकीलों ने मामले में पैरवी की। लुबाना ने बताया कि कुमार 31 दिसंबर 2019 से तिहाड़ जेल में थे। DSGMC ने इस कानूनी प्रक्रिया को पीड़ितों की ओर से न्याय के लिए लड़ी गई लंबी लड़ाई के रूप में याद किया।

84 साल की उम्र में सफदरजंग अस्पताल में निधन

पूर्व कांग्रेस सांसद और 1984 दिल्ली सिख दंगों के दोषी सज्जन कुमार का गुरुवार को 84 साल की उम्र में निधन हो गया। राष्ट्रीय राजधानी स्थित सफदरजंग अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। अस्पताल के अधिकारियों के मुताबिक, कुमार हाई ब्लड प्रेशर और पार्किंसंस की बीमारी से पीड़ित थे। अस्पताल ने बताया कि उन्हें पहले भी कई बार अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

सुबह 11 बजे अस्पताल लाया गया था

सफदरजंग अस्पताल के बयान के मुताबिक, पुलिस सज्जन कुमार को सुबह करीब 11 बजे VMMC और सफदरजंग अस्पताल लेकर पहुंची थी। उस समय उनकी स्थिति में बदलाव था और उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती किया गया। अस्पताल में उन्हें बचाने के लिए तुरंत resuscitation measures शुरू किए गए। सभी जरूरी मेडिकल और लाइफ-सपोर्ट उपाय किए जाने के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका और दोपहर 12:30 बजे उनका निधन हो गया।

तीन दशक से ज्यादा चला कानूनी संघर्ष

तीन बार सांसद रहे सज्जन कुमार 1984 के सिख-विरोधी दंगों से जुड़े कई आपराधिक मामलों में आरोपी रहे। ये दंगे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए थे। तीन दशकों से अधिक समय तक कुमार को हिंसा से जुड़े विभिन्न मामलों में कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ा। अलग-अलग अदालतों में इन मामलों के नतीजे बरी होने से लेकर दोषसिद्धि तक रहे।

राज नगर मामले में मिली थी उम्रकैद

दिल्ली के राज नगर इलाके के मामले में एक परिवार के पांच सदस्यों की हत्या और एक गुरुद्वारे को जलाने का मामला था। दिल्ली हाई कोर्ट ने 17 दिसंबर 2018 को ट्रायल कोर्ट के पहले के बरी करने के फैसले को पलट दिया था। हाई कोर्ट ने सज्जन कुमार को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद कुमार ने सरेंडर किया था और दिसंबर 2018 से जेल में थे।

सरस्वती विहार केस में दूसरी उम्रकैद

सरस्वती विहार हत्या मामले में 1 नवंबर 1984 को जसवंत सिंह और उनके बेटे तरनदीप सिंह की हत्या से जुड़ा मामला था। ट्रायल कोर्ट ने पहले सज्जन कुमार को इस मामले में बरी कर दिया था। हालांकि, 25 फरवरी 2025 को स्पेशल जज कावेरी बावेजा ने उन्हें दूसरी उम्रकैद की सजा सुनाई। उनकी उम्र, बीमारियों और पिछली उम्रकैद के दौरान उनके आचरण को देखते हुए उन्हें मौत की सजा नहीं दी गई थी।

जनकपुरी-विकासपुरी मामले में बरी हुए थे

जनकपुरी और विकासपुरी इलाकों में हुई हिंसा से जुड़े मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने 22 जनवरी को सज्जन कुमार को बरी कर दिया था। यह मामला सोहन सिंह और उनके दामाद अवतार सिंह की हत्या के लिए उकसाने तथा गुरचरण सिंह को जलाने के आरोपों से संबंधित था। 26 मई को दिल्ली हाई कोर्ट ने इस बरी किए जाने के खिलाफ दायर अपील पर नोटिस जारी किया था। जेल में रहने के दौरान कुमार ने कई बार मेडिकल आधार पर जमानत और राहत की मांग की थी।

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