डिंडौरी। मध्यप्रदेश में इन दिनों एक अनोखी और दुर्ल

हाथों के बल उल्टा चलकर 3500 KM की नर्मदा परिक्रमा

Narmada Parikrama

24 साल के धरमपुरी महाराज की अनोखी तपस्या

डिंडौरी। मध्यप्रदेश में इन दिनों एक अनोखी और दुर्लभ तपस्या चर्चा में है। निरंजनी अखाड़े से जुड़े संत धरमपुरी महाराज हाथों के बल उल्टा चलकर करीब 3500 किलोमीटर की नर्मदा परिक्रमा पर निकले हैं। महज 24 वर्ष की उम्र में उन्होंने कठोर साधना और संयम का ऐसा उदाहरण पेश किया है, जिसने लोगों को चकित कर दिया है।

केवल एक रोटी से जीवन यापन-

धरमपुरी महाराज नर्मदा परिक्रमा के दौरान केवल एक रोटी पर जीवन यापन कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि वे दिन-रात हाथों के सहारे चलते हुए अपनी यात्रा पूरी कर रहे हैं। इस कठिन साधना के पीछे उनका उद्देश्य आत्मशुद्धि के साथ-साथ योग और साधना पर शोध करना है।

वैज्ञानिर कर रहे हैं शोध-

महाराज के अनुसार, उनकी इस साधना को लेकर अमेरिका से आए वैज्ञानिक और शोधकर्ता भी अध्ययन कर रहे हैं। वे यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि इतनी कम उम्र में शरीर और मन पर इस प्रकार की कठिन तपस्या का क्या प्रभाव पड़ता है।

हठयोग ने खींचा था ध्यान-

बीते वर्ष प्रयागराज महाकुंभ मेले में जिस तरह अलग-अलग साधुओं के हठयोग ने लोगों का ध्यान खींचा था, वैसा ही दृश्य इन दिनों मध्यप्रदेश में देखने को मिल रहा है। धरमपुरी महाराज की यह अनोखी नर्मदा परिक्रमा जहां श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बनी है, वहीं शोधकर्ताओं के लिए अध्ययन का विषय भी।

मिलती है प्रेरणा-

स्थानीय लोगों का कहना है कि संत की तपस्या से प्रेरणा मिलती है और जहां-जहां से वे गुजर रहे हैं, वहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए उमड़ रहे हैं।

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