भारतीय तटरक्षक बल की तीन दिवसीय 43वीं कमांडर्स कॉन

भारतीय तटरक्षक बल की 43वीं कमांडर्स कॉन्फ्रेंस, समुद्री सुरक्षा और स्वदेशी तकनीक पर रहेगा जोर

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नई दिल्ली (भारत)। भारतीय तटरक्षक बल की 43वीं कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में देश की समुद्री सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। तीन दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में समुद्र में बदलती सुरक्षा परिस्थितियों, तटरक्षक बल की परिचालन तैयारियों और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल जैसे विषय प्रमुख रहेंगे। सम्मेलन के दौरान 17 सितंबर को रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ भारतीय तटरक्षक बल के वरिष्ठ अधिकारियों और कमांडरों को संबोधित करेंगे। उनके संबोधन में समुद्री क्षेत्रों में भारत के हितों की रक्षा तथा राष्ट्रीय सुरक्षा को और मजबूत करने में तटरक्षक बल की भूमिका से जुड़े विषयों पर विचार किया जाएगा।

बदलती समुद्री चुनौतियों से निपटने की रणनीति पर चर्चा

कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में समुद्री सुरक्षा के सामने मौजूद मौजूदा चुनौतियों के साथ-साथ भविष्य में उभरने वाले संभावित खतरों पर भी विचार-विमर्श होगा। वरिष्ठ अधिकारी तटरक्षक बल की ऑपरेशनल तैयारियों, विभिन्न संसाधनों की तैनाती और जरूरत के मुताबिक उनकी प्रभावी व्यवस्था की समीक्षा करेंगे। इसके अलावा बल की मौजूदा क्षमताओं को बढ़ाने, आधुनिक तकनीकों को शामिल करने और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप रणनीति तैयार करने पर भी चर्चा होगी। सम्मेलन में संगठन की प्राथमिकताओं को राष्ट्रीय समुद्री रणनीति के साथ बेहतर तरीके से जोड़ने पर भी विचार किया जाएगा।

स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने पर जोर

सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण विषय भारतीय तटरक्षक बल में चल रही स्वदेशीकरण की प्रक्रिया भी होगी। अधिकारियों द्वारा ऐसे प्रयासों की समीक्षा की जाएगी, जिनका उद्देश्य देश में विकसित तकनीक, उपकरणों और संसाधनों के इस्तेमाल को बढ़ाना है। तटरक्षक बल का यह प्रयास ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की व्यापक सोच के अनुरूप देश की घरेलू रक्षा क्षमता को मजबूत करने से जुड़ा है। स्वदेशी तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से भविष्य में तटरक्षक बल की परिचालन जरूरतों को पूरा करने की दिशा में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार होगा रोडमैप

तीन दिवसीय सम्मेलन में वरिष्ठ कमांडरों के बीच होने वाला विचार-विमर्श भारतीय तटरक्षक बल की दीर्घकालिक तैयारियों के लिए अहम माना जा रहा है। इसमें संगठन की क्षमताओं, आधुनिकीकरण और संसाधनों से जुड़े पहलुओं की समीक्षा के साथ भविष्य की प्राथमिकताओं पर भी चर्चा होगी। सम्मेलन का व्यापक उद्देश्य भारत के समुद्री हितों और संप्रभुता की सुरक्षा के लिए तटरक्षक बल को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप और अधिक सक्षम बनाने की दिशा में आगे की रणनीति तैयार करना है।

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