असम के 10 जिलों में 65 लाख से अधिक लोग बाढ़ से हुए प्रभावित, 68 लोगों की मौत
गुवाहाटी: आपदा रिपोर्टिंग और सूचना प्रबंधन प्रणाली (डीआरआईएमएस) द्वारा सोमवार को जारी नवीनतम बुलेटिन के अनुसार, असम में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 68 हो गई है। राज्य से मिली रिपोर्ट्स के अनुसार, ऊपरी असम में बाढ़ का पानी कम हो रहा है। अब बिजली आपूर्ति बहाल करने सहित राहत कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
असम में बाढ़ से उबरने की प्रक्रिया धीरे-धीरे जारी: सीएम हिमंता बिस्वा शर्म
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्म ने कहा है कि राज्य सरकार के मंत्री पुनर्वास कार्यों के समन्वय के लिए राज्य भर में संपर्क करेंगे। राज्य सरकार की प्राथमिकता शिवसागर, जोरहाट और गोलाघाट जैसे सबसे अधिक प्रभावित जिलों में नागरिकों को राहत पहुंचाना है। इससे पहले मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने कहा था कि जिन क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई है, वहां बिजली बहाल करने के लिए समन्वित अभियान चलाया जा रहा है। असम में बाढ़ से उबरने की प्रक्रिया धीरे-धीरे जारी है।
प्रभावित जिलों में बिजली बहाल करने के प्रयास चल रहे
उन्होंने कहा कि प्रभावित जिलों में बिजली बहाल करने के प्रयास चल रहे हैं। बाढ़ के दौरान एहतियाती तौर पर बिजली आपूर्ति निलंबित करने के बाद असम पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड की टीमें शिवसागर, जोरहाट, चराइदेव, धुबरी, बोंगाईगांव और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से बिजली बहाल करते हुए व्यापक सुरक्षा निरीक्षण कर रही हैं। हम आवश्यक सेवाओं को जल्द से जल्द बहाल करने और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि हर प्रभावित समुदाय सामान्य जीवन में लौट आए।
बाढ़ प्रभावित इलाकों पर नजर रखे हुए हैं पीएम मोदी
रविवार को केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने असम में बाढ़ की स्थिति को अत्यंत गंभीर बताया। इसके साथ ही कहा कि केंद्र और राज्य सरकार प्रभावित लोगों के लिए राहत और बचाव कार्यों को चलाने के लिए मिलकर काम कर रही है। मीडिया से बात करते हुए सोनोवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बाढ़ शुरू होने के बाद से ही स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा के साथ लगातार संपर्क में हैं।
पीएम मोदी ने सीएम हिमंता बिस्वा शर्मा से की बात
असम में बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुरुआत से ही इस स्थिति के बारे में जानकारी ले रहे हैं। उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा से भी बात की है। उनसे भी इस बारे में जानकारी ली है। शुरुआत से ही केंद्र सरकार राज्य सरकार की सहायता करने और बाढ़ से प्रभावित सभी लोगों की मदद करने में पूरी तरह से तत्पर है। दोनों सरकारें संयुक्त रूप से राहत सामग्री वितरित कर रही हैं और बचाव अभियान चला रही हैं।
पीएम मोदी ने बाढ़ पीड़ितों की मदद का दिया आश्वासन
सोनोवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री ने रविवार सुबह उनसे भी बात की। जमीनी स्थिति का जायजा लिया और असम के लोगों को केंद्र की ओर से हर संभव सहायता पहुंचाने का आश्वासन दिया। प्रधानमंत्री ने आज सुबह मुझे फोन किया और स्थिति के बारे में जानकारी ली। मैंने उन्हें कल जो कुछ देखा, उसका विस्तृत विवरण दिया। पीएम ने कहा, असम के लोगों को बता दीजिए कि हम उनके साथ खड़े हैं और हर संभव सहायता देने के लिए तैयार हैं। राज्य सरकार और केंद्र सरकार इस मामले पर संयुक्त रूप से कार्रवाई करेंगी। हम हर आवश्यक कदम उठाएंगे। प्रधानमंत्री के निर्देशानुसार, एक उच्च स्तरीय अंतर-मंत्रालयी दल आ चुका है और प्रभावित लोगों से बात करके उनकी स्थिति का जायजा लेगा।
एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की ओर से चलाया जा रहा बचाव अभियान
मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए सोनोवाल ने कहा कि केंद्र और असम सरकार बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए मिलकर काम कर रही हैं, जबकि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) बचाव और राहत अभियान जारी रखे हुए हैं। असम में बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर है। लोगों ने अपने घर खो दिए हैं। कई लोगों ने अपने परिजनों को भी खो दिया है। मैं मृतकों की आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं और उनके परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। केंद्र और असम सरकारें प्रभावित लोगों की सहायता के लिए मिलकर काम कर रही हैं। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ बचाव अभियान चला रहे हैं और बाढ़ पीड़ितों को राहत पहुंचा रहे हैं।
शिवसागर में 40 से अधिक राहत शिविर किए जा रहे स्थापित
इस बीच असम भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने कहा कि बाढ़ के कारण लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। राज्य भर में कृषि भूमि को व्यापक नुकसान पहुंचा है। बाढ़ के कारण लाखों लोगों को अपने घर छोड़ने पड़ रहे हैं। लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि बर्बाद हो गई है। पालतू जानवर भी प्रभावित हुए हैं। कुल मिलाकर ऊपरी असम के लगभग 16 जिले विनाशकारी बाढ़ का सामना कर रहे हैं। असम सरकार प्रभावित लोगों को पूरी सहायता दे रही है। उनके पुनर्वास की व्यवस्था बाद में की जाएगी। फिलहाल अकेले शिवसागर में 40 से अधिक राहत शिविर स्थापित किए जा रहे हैं। अकेले शिवसागर में ही लगभग 20,000 लोग राहत शिविरों में हैं।
10 जिलों में 65 लाख से अधिक लोग बाढ़ से हुए प्रभावित
सैकिया ने कहा, 25 जुलाई तक गोलाघाट, चराइदेव, कामरूप, होजाई, डिब्रूगढ़, शिवसागर, जोरहाट, सोनितपुर, कामरूप (महानगरीय) और नागांव- इन 10 जिलों में 65 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए थे। शिवसागर सबसे अधिक प्रभावित जिला था, जहां 2,90,777 लोग प्रभावित हुए, इसके बाद चराइदेव (1,88,404) और जोरहाट (1,31,948) का स्थान रहा। रिपोर्ट में कहा गया है कि 28 राजस्व सर्किलों के 810 गांव अभी भी जलमग्न हैं, जहां लगभग 34,970.8 हेक्टेयर कृषि भूमि डूब गई है। इसमें यह भी बताया गया है कि केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, शिवसागर में दिखौ नदी और नुमालीगढ़ में धनसिरी (दक्षिण) नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
(एएनआई)
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