उम्रभेद से 2040 तक ओईसीडी देशों को 500 अरब डॉलर की उत्पादकता हानि का अनुमान: रिपोर्ट
नई दिल्ली [भारत]: विश्व आर्थिक मंच (WEF) और मार्श द्वारा जारी एक नई रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ती उम्र की आबादी की तुलना में कामकाजी उम्र के लोगों की संख्या में कहीं अधिक तेजी से वृद्धि हो रही है, जिसके चलते आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) के सदस्य देशों को 2040 तक उत्पादकता में लगभग 500 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है। OECD से तात्पर्य 38 सदस्य देशों से है, जो अत्यधिक विकसित, लोकतांत्रिक और उच्च आय वाले राष्ट्र हैं तथा मुक्त बाजार सिद्धांतों पर कार्य करते हैं।
2040 तक 500 अरब डॉलर के नुकसान का अनुमान
रिपोर्ट में कहा गया है, "अनुमान है कि OECD देशों को 2040 तक उत्पादकता में लगभग 500 अरब डॉलर का नुकसान होगा, जिसका कारण 55 वर्ष और उससे अधिक आयु के वयस्कों की कम रोजगार दर और बेरोजगारी है, जबकि युवा श्रमिकों की संख्या अधिक है।" यह नुकसान लंबे समय तक बेरोजगारी और उन संरचनात्मक बाधाओं से जुड़ा है, जो कई वृद्ध वयस्कों को श्रम बल से पूरी तरह बाहर कर देती हैं।
बुजुर्ग आबादी तेजी से बढ़ रही
जनसंख्या का दबाव लगातार बढ़ रहा है। विश्लेषण में कहा गया है कि 2040 तक 65 वर्ष और उससे अधिक आयु की वैश्विक आबादी में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि होगी और यह 856 मिलियन से बढ़कर 1.3 बिलियन हो जाएगी। वहीं, 25 से 64 वर्ष की कामकाजी आबादी में केवल 13 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 से 2040 के बीच 55 वर्ष और उससे अधिक आयु के श्रमिकों में बढ़ती बेरोजगारी के कारण अमेरिका को 113 बिलियन डॉलर और फ्रांस को 106 बिलियन डॉलर का संचयी जीडीपी नुकसान होने का अनुमान है। कनाडा में यह आंकड़ा 7,530 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। इसके अलावा यूनाइटेड किंगडम को 25,590 मिलियन डॉलर, ब्राजील को 105,810 मिलियन डॉलर, नीदरलैंड्स को 26,250 मिलियन डॉलर और जापान को 5,870 मिलियन डॉलर के नुकसान का अनुमान है।
उम्रभेद का स्वास्थ्य पर भी असर
रिपोर्ट में उम्र के आधार पर होने वाले भेदभाव को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से भी जोड़ा गया है। इसमें कहा गया है कि अकेले अमेरिका में उम्रभेद 1.7 करोड़ बीमारियों के मामलों से जुड़ा हुआ है। वर्ष 2018 में अमेरिका में उम्रभेद के कारण स्वास्थ्य पर कम से कम 63 अरब डॉलर का अतिरिक्त खर्च आया। अध्ययनों में इसका संबंध अवसाद, शारीरिक बीमारियों और स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच से भी पाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, समस्या इसलिए और गंभीर हो जाती है क्योंकि कई हतोत्साहित बुजुर्ग कर्मचारी बेरोजगार के रूप में दर्ज होने के बजाय कार्यबल से ही बाहर निकल जाते हैं। इसमें कहा गया है, "ये आंकड़े हिमखंड का केवल एक छोटा हिस्सा हैं। उम्रभेद के कारण खुद को वंचित महसूस करने वाले कई लोग कार्यबल छोड़ देते हैं और बेरोजगारी के आंकड़ों में शामिल नहीं होते।"
बहु-पीढ़ीगत कार्यबल से मिल सकता है समाधान
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि बहु-पीढ़ीगत कार्यबल उच्च स्तर की रचनात्मकता और नवाचार के माध्यम से विकास और उत्पादकता बढ़ा सकता है। अनुभवी कर्मचारी युवा साथियों का मार्गदर्शन कर सकते हैं, जबकि बदले में वे उनसे डिजिटल कौशल सीख सकते हैं। रिपोर्ट में कई देशों की नीतियों का भी उल्लेख किया गया है। दक्षिण कोरिया में 55 से 64 वर्ष आयु वर्ग के लोगों की रोजगार दर रिकॉर्ड 70 प्रतिशत रही। जापान में 65 वर्ष से अधिक आयु के श्रमिकों के रोजगार स्तर में लगातार 20 वर्षों से वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, स्वीडन की लचीली पेंशन प्रणाली लोगों को काम करते हुए अपनी पेंशन का 25 से 100 प्रतिशत तक प्राप्त करने की अनुमति देती है।
उम्रभेद खत्म करने से बढ़ेगी उत्पादकता
रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया है कि उम्र के आधार पर होने वाले भेदभाव को समाप्त करने से उत्पादकता बढ़ सकती है, लोगों को बेहतर स्वास्थ्य और आर्थिक लाभ मिल सकते हैं तथा सरकारों पर वित्तीय बोझ कम हो सकता है। साथ ही नियोक्ताओं को समाज के एक अनुभवी और मूल्यवान वर्ग के कौशल व अनुभव का बेहतर उपयोग करने का अवसर मिलेगा।
(एएनआई)
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