कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) अर्थव्यवस्था में रोजगार स

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने नौकरियों को लेकर बढ़ायी केन्द्र की चिंता

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने नौकरियों को लेकर बढ़ायी केन्द्र की चिंता

नीति आयोग ने नये रोजगार सृजन को लेकर पेश किया रोडमैप

नयी दिल्ली।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) को लेकर दुनिया भर से रोजाना सकारात्मक खबरें आती रहती हैं। टेक्नोलॉजी और कस्टमर एक्सपीरियंस समेत कई सेक्टरों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से नयी रचनात्मकता और "वर्क इफिशिएंसी" में सुधार देखने को मिल रहा है। परन्तु आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने रोजगार के सेक्टर में कुछ चिंता भी बढ़ा दी है। नीति आयोग की एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर जल्दी ही ठोस कदम नहीं उठाए गए तो क्वालिटी एश्योरेंस, इंजीनियरिंग और सपोर्ट एजेंट जैसी तमाम नौकरियां 2031 तक खत्म हो सकती हैं। लेकिन अच्छी खबर ये है कि अगले पांच साल में AI की वजह से 40 लाख नई नौकरियों का सृजन भी हो सकता है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) अर्थव्यवस्था में रोजगार सृजन के रोडमैप को लेकर नीति आयोग ने एक रिपोर्ट जारी की है। कैचवर्ड ‘रोडमैप फॉर जॉब क्रिएशन इन द AI इकोनॉमी’ नाम से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर भारत सही दिशा में काम करे तो वह AI से जुड़ी नौकरियों का ग्लोबल हब बन सकता है। इसमें एथिकल AI स्पेशलिस्ट, AI ट्रेनर, सेंटिमेंट एनालिस्ट और AI डेवऑप्स इंजीनियर जैसी नई भूमिकाएं शामिल हैं। इसके लिए स्किलिंग और री-स्किलिंग पर जोर देना होगा। इसमें बताया गया है कि 2031 तक टेक सर्विस इंडस्ट्री में देश में 40 लाख अतिरिक्त यानी नई जॉब्स के अवसर हैं। नेशनल AI टेलेंट मिशन शुरू कर भारत को विश्व की एआई वर्कफोर्स कैपिटल बनाने के लक्ष्य को पूरा किया जाएगा। स्कूल-कॉलेजों से लेकर यूनिवर्सिटीज में करिकुलम को अमेरिकी शिक्षण संस्थानों की तरह जल्द रिवाइज किया जाएगा।

नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रह्मण्यम, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव विनीत जोशी और स्कूली शिक्षा विभाग के सचिव संजय कुमार ने यह रिपोर्ट जारी की। सुब्रह्मण्यम ने कहा कि एआई की चुनौती है, अगर सही अप्रोच और बेहतर समन्वय के साथ आगे बढ़ा जाए तो 4 मिलियन अतिरिक्त रोजगार पैदा हो सकते हैं. वहीं यह घटकर 6 मिलियन तक भी हो सकता है। 

आईटी सेक्टर में कस्टमर सर्विसेज में 2023 में वर्कफोर्स 2.5 मिलियन है, जो अगले पांच वर्ष में 3.1 मिलियन भी हो सकती है और घटकर 1.8 मिलियन तक भी रह सकती है। यदि भारत रणनीतिक रूप से कार्य करता है, तो आईटी टेक सेक्टर में जॉब भी बढ़ेगी और भारत को विश्व का एआई टेलेंट हब बनाने की स्थिति भी बनेगी।

उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. विनीत जोशी ने बताया कि इस रिपोर्ट के दो स्पष्ट संदेश है कि बदलती जा रही तकनीक के इस दौर में बहुत तेज गति से काम करना होगा ताकि भारत को नई ऊंचाईयों पर ले जाया जा सके। एक संदेश यह है कि एआई के दौर में अलग अलग तरह के रोल परिभाषित किए गए हैं और उन सभी रोल के लिए वर्कफोर्स को तैयार करना होगा। अवसरों की कमी नहीं होगी, अगर उस क्षेत्र में विशेषज्ञों को तैयार किया जा सके। सरकार, नौकरियों और स्किल्स के लिए भी एआई के रोडमैप में महत्वपूर्ण सुझाव हैं। एआई के इस्तेमाल से ज्यादा से ज्यादा नौकरियां और नए तरह की नौकरियों के अवसर पैदा होंगे लेकिन इसके लिए हमें सही स्किल की जरूरत है।