भारत कोई 'धर्मशाला' नहीं, बहुत कम समय में देश को घुसपैठियों से मुक्त करना हमारा लक्ष्य: अमित शाह
नई दिल्ली [भारत]: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को अवैध घुसपैठ के खिलाफ कड़ा संदेश देते हुए इस समस्या के खिलाफ लड़ाई को तेज करने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि "भारत कोई धर्मशाला नहीं है" और जोर देकर कहा कि मोदी सरकार देश को "बहुत कम समय में घुसपैठियों से मुक्त" कर देगी। शाह ने ये बातें नई दिल्ली में खुफिया ब्यूरो के 'राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन' (एनएसएससी) के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहीं।
देश को घुसपैठियों से मुक्त करना लक्ष्य
गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, अमित शाह ने कहा, "पिछले आठ महीनों में सभी सीमावर्ती राज्यों का दौरा करके, हमने राज्यों के साथ चतुर्भुज सीमा सुरक्षा दृष्टिकोण का एक दस्तावेज साझा किया है। हमारा लक्ष्य देश को बहुत कम समय में घुसपैठियों से मुक्त करना है।" उन्होंने आगे कहा, "यह देश कोई धर्मशाला नहीं है, और केवल देश के नागरिकों को ही इस देश में रहने का अधिकार है। घुसपैठिए देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और जनसांख्यिकीय परिवर्तन के लिए खतरा हैं।"
15-20 साल की चुनौतियों का आकलन जरूरी
शाह ने कहा कि एनएसएससी मंच को आने वाले 15-20 वर्षों के रुझानों का विश्लेषण करना चाहिए और यह तय करना चाहिए कि कौन-सी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं और उन्हें रोकने की रणनीति क्या होनी चाहिए। गृह मंत्री ने यह भी घोषणा की कि अगले एक वर्ष में तीन नए कानूनों का शत प्रतिशत कार्यान्वयन किया जाएगा, ताकि आपराधिक मामलों का निपटारा सर्वोच्च न्यायालय तक तीन वर्षों के भीतर किया जा सके। उन्होंने कहा कि दोषसिद्धि दर में 25 प्रतिशत की वृद्धि होगी।
नशामुक्त भारत के लिए तीन लक्ष्यों पर जोर
शाह ने बाद में सभी राज्यों के पुलिस बलों को निर्देश दिया कि वे नई पीढ़ी की सुरक्षा के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029 को जमीनी स्तर पर लागू करें और नशामुक्त भारत के लिए 'पता लगाना, रोकना और नष्ट करना' के तीन लक्ष्यों पर काम करें। गृह मंत्री ने कहा कि क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (CCTNS), इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS), नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड (NatGrid) और नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (NAFIS) का एकीकृत डेटा बैंक बनाया जा चुका है। उन्होंने आगे कहा कि सभी युवा अधिकारियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से डेटा एकीकरण, विश्लेषण और कार्यप्रणाली की पहचान करके कार्रवाई योग्य खुफिया जानकारी विकसित करनी चाहिए, ताकि भविष्य की चुनौतियों को रोका जा सके।
विकसित भारत के लिए मजबूत आंतरिक सुरक्षा जरूरी
उन्होंने कहा, "मोदी जी ने 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य रखा है, और विकसित भारत की पहली शर्त मजबूत आंतरिक सुरक्षा है। अगर हम हर क्षेत्र में अग्रणी बनना चाहते हैं, तो आंतरिक सुरक्षा को और मजबूत करना होगा।" हाइब्रिड प्रारूप में आयोजित इस सम्मेलन में देश भर से 850 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।
पिछली सरकारों पर भी साधा निशाना
शाह ने कहा, "अगर पिछली सरकारों ने मादक पदार्थों, नक्सलवाद और पूर्वोत्तर की समस्याओं को गंभीर होने से पहले ही भांप लिया होता, तो देश को दशकों तक इनका खामियाजा नहीं भुगतना पड़ता।" उन्होंने बताया कि कैसे भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने आंतरिक सुरक्षा के तीन प्रमुख क्षेत्रों से उत्पन्न चुनौती को समाप्त किया और इस बात पर जोर दिया कि "इसका पूरा श्रेय प्रत्येक राज्य की पुलिस, केंद्रीय एजेंसियों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) को जाता है।"
पीएफआई पर कार्रवाई को बताया समन्वय का उदाहरण
उन्होंने यह भी कहा कि एक ही रात में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) पर कार्रवाई और प्रतिबंध लगाकर उसके पूरे संगठन का सफाया करना केंद्र-राज्य समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है। पीएफआई को गृह मंत्रालय ने सितंबर 2022 में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत कथित आतंकी संबंधों के कारण प्रतिबंधित कर दिया था। गृह मंत्री ने आतंकवाद के पूर्ण उन्मूलन और 360 डिग्री आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए 'प्रहार' को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रखकर रोजमर्रा के अभ्यास में लाने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी बताया कि मोदी सरकार ने बहुआयामी परिणाम प्रदान करने के लिए एक मंच बनाने हेतु बहु-एजेंसी केंद्र (एमएसी) को उन्नत किया है।
साइबर गलत सूचना और वैश्विक अस्थिरता भी चुनौती
उन्होंने आगे सुझाव दिया कि वैश्विक अस्थिरता, ऊर्जा-संसाधन असुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, बढ़ते कट्टरपंथ और साइबर-गलत सूचना युद्ध को ध्यान में रखते हुए ही सुरक्षा नीति बनाई जानी चाहिए। उन्होंने चुनौतियों की जल्द पहचान करने और उन्हें बड़ी समस्या बनने से पहले ही खत्म करने की सलाह दी और कहा, "ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र बनाकर हम एक सुरक्षित, घुसपैठियों से मुक्त और मादक पदार्थों से मुक्त भारत का निर्माण कर सकेंगे।"
850 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
दिल्ली में आयोजित सम्मेलन में गृह राज्य मंत्री, केंद्रीय गृह सचिव, उप राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी, सीएपीएफ/सीपीओ के प्रमुखों ने भाग लिया। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के डीजीएसपी, जमीनी स्तर पर कार्यरत युवा पुलिस अधिकारी और विशिष्ट क्षेत्रों के विशेषज्ञ वर्चुअल माध्यम से सम्मेलन में शामिल हुए। गृह मंत्रालय के अनुसार, सम्मेलन के दूसरे दिन "उप-हवाई प्रणालियों से उत्पन्न खतरों और उनके प्रतिकार उपायों को तैयार करने, नीली अर्थव्यवस्था को सुरक्षित करने, सूचना युद्ध और राष्ट्रीय सुरक्षा पर इसके प्रभावों तथा जैव-सुरक्षा ढांचे की आवश्यकता" पर ध्यान केंद्रित किया गया।
2021 से हर साल आयोजित हो रहा सम्मेलन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशों के अनुसरण में, एनएसएससी का आयोजन 2021 से हर साल हाइब्रिड प्रारूप में किया जा रहा है। इसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर कार्यरत अत्याधुनिक अधिकारियों के व्यापक अनुभव और विशिष्ट क्षेत्रों के विशेषज्ञों के सहयोग से प्रमुख राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों का समाधान खोजना है।
(एएनआई)
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