अयोध्या राम मंदिर दान चोरी विवाद पर कांग्रेस नेता

अयोध्या राम मंदिर चंदा विवाद: जयराम रमेश का पीएम मोदी से सवाल, क्या SIT कर रही लीपापोती?

Congress leader Jairam Ramesh (FilePhoto)

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तर प्रदेश दौरे के बीच कांग्रेस ने अयोध्या स्थित श्री राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चंदे और चढ़ावे में हुई कथित हेराफेरी को लेकर उन पर जोरदार हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने रविवार को 'चंदा चोरी, आस्था धोखा' नाम से सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर इस पूरे मामले की निष्पक्ष और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

'चंदा चोरी, आस्था धोखा': कांग्रेस का तीखा प्रहार

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि भगवान को समर्पित धन या चढ़ावे की चोरी को धर्म शास्त्र में महापाप माना गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अयोध्या के श्री राम मंदिर में भाजपा और आरएसएस से जुड़े लोगों की देखरेख में यही पाप हुआ है, लेकिन अब पूरे मामले को दबाने और बड़े गुनहगारों को बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

जयराम रमेश ने सवाल उठाया, "जिस राम मंदिर का श्रेय लेने में प्रधानमंत्री हमेशा आगे रहते हैं, अब उसकी देखरेख करने वाले ट्रस्टियों के इस कारनामे पर वे चुप क्यों हैं? देश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंची है, लेकिन प्रधानमंत्री इन आरोपियों को बचाने की घिनौनी कोशिश कर रहे हैं।"

श्रद्धालुओं के आंकड़े और चढ़ावे के गणित पर सवाल

जयराम रमेश ने 2021 के निधि समर्पण अभियान और उसके बाद आए श्रद्धालुओं की संख्या का ब्योरा जारी करते हुए चंदे के आंकड़ों पर गंभीर संदेह जताया। उन्होंने कहा कि आरएसएस और ट्रस्ट के अनुसार, 2021 के निधि समर्पण अभियान और कॉर्पस फंड को मिलाकर कुल ₹3,264 करोड़ जुटाए गए थे।

इसके बाद वर्ष 2024 के शुरुआती 9 महीनों में 13.55 करोड़ श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे, जबकि 2025 में महाकुंभ के दौरान लगभग 10 करोड़ अतिरिक्त भक्त वहां आए।

"1 अप्रैल 2025 से 28 फरवरी 2026 के बीच करीब 16 करोड़ भक्तों के आने का अनुमान है, लेकिन कुल चढ़ावा सिर्फ ₹82.78 करोड़ दिखाया गया। यानी प्रति व्यक्ति औसतन महज ₹5 का चढ़ावा! इतनी बड़ी संख्या में भक्तों की आवक को देखते हुए यह आंकड़ा बेहद संदेहास्पद है।" — जयराम रमेश, कांग्रेस नेता

उन्होंने आगे कहा कि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र भी स्वीकार कर चुके हैं कि यह सिर्फ साधारण चोरी नहीं, बल्कि सीधी 'डकैती' है।

<blockquote lang="hi" dir="ltr">चंदा चोरी, आस्था धोखा भगवान को समर्पित धन, देव द्रव्य की चोरी अर्थात चंदा और चढ़ावा चोरी को महापाप माना गया है। ऐसा ही महापाप भाजपा-आरएसएस के लोगों द्वारा अयोध्या के श्रीराम मंदिर में सामने आया है, लेकिन पूरे मामले को दबाने और बड़े चोरों को छिपाने की कोशिश की जा रही है। सवाल यह है कि जिन भाजपा, विश्व हिंदू परिषद और आरएसएस से जुड़े लोगों को प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं ट्रस्टी के रूप में बिना सार्वजनिक चर्चा के चुना था, अब जब यह साबित हो चुका है कि उनकी निगरानी में देश के करोड़ों लोगों की आस्था को ठेस पहुँचाने वाला यह घृणित पाप हुआ है, तो राम मंदिर का श्रेय लेने में सबसे आगे रहने वाले प्रधानमंत्री अब मौन साधकर महापापियों को बचाने का कुत्सित प्रयास क्यों कर रहे हैं? सवाल यह है कि जब: आरएसएस और ट्रस्ट के अनुसार, निधि समर्पण अभियान (2021) में निधि समर्पण और कॉर्पस दान मिलाकर ₹3,264 करोड़ एकत्र हुए। वर्ष 2024 के 9 महीनों में 13.55 करोड़ श्रद्धालु अयोध्या पहुँचे। वहीं, 2025 में महाकुंभ के दौरान लगभग 10 करोड़ अतिरिक्त श्रद्धालु अयोध्या आए। ऐसे में 1 अप्रैल 2025 से 28 फ़रवरी 2026 तक 16 करोड़ श्रद्धालुओं का आना बताया गया, जबकि कुल चढ़ावा मात्र ₹82.78 करोड़ (प्रति व्यक्ति औसतन ₹5) बताया गया, जो श्रद्धालुओं की इतनी बड़ी संख्या के सामने बेहद संदिग्ध माना जा रहा है। मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने भी माना है कि यह सिर्फ चोरी नहीं, बल्कि “डाका” हुआ है। फिर भी नरेंद्र मोदी, अमित शाह और योगी आदित्यनाथ व्यापक जाँच कराने के बजाय चोरों के पाप पर पर्दा क्यों डाल रहे हैं? माना जाता है कि न्याय होना भी चाहिए और होते हुए दिखना भी चाहिए। लेकिन इस पूरे मामले में न तो न्याय हुआ है और न ही न्याय करने की कोई कोशिश दिखाई दे रही है। देश की जनता के मन में चार प्रमुख सवाल हैं, जिनका जवाब देना सरकार की ज़िम्मेदारी है: * देश भर में कुल कितने करोड़ लोगों द्वारा कितने हज़ार करोड़ रुपये का चंदा दिया गया? * दान-पात्रों (हुंडी/काउंटरों) में कुल कितना चढ़ावा एकत्र हुआ? * यह चंदा और चढ़ावा चोरी कुल कितने हज़ार करोड़ रुपये की है, और सरकार इस पर निष्पक्ष जाँच कराने के बजाय मौन क्यों है? * लगभग तीस करोड़ श्रद्धालुओं के चढ़ावे का हिसाब कहाँ है? एसआईटी ने 80 लाख की चोरी बताकर मामले को रफ़ा-दफ़ा करने की कोशिश क्यों की? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज उत्तर प्रदेश जा रहे हैं तो हम उम्मीद करते हैं कि इस दौरे पर वे इस गंभीर मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ेंगे और देशवासियों के सवालों का जवाब देंगे। अगर वे एक बार फिर इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर चुप रहकर किसी अन्य मामले की आड़ लेकर देश का ध्यान भटकाने की कोशिश करते हैं तो वे जान लें कि कांग्रेस इस पूरे मामले पर सच्चाई सामने लाकर ही रहेगी। जिन महापापियों ने चंदा और चढ़ावा चोरी की है, उन्हें संविधान के अनुसार सज़ा ज़रूर दिलाई जाएगी।</p>&mdash; Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) <a href="https://x.com/Jairam_Ramesh/status/2114194985931440616?ref_src=twsrc%5Etfw">October 25, 2026</a></blockquote> <script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>

जयराम रमेश ने पूछे ये 4 मुख्य सवाल

कांग्रेस नेता ने इस मामले में केंद्र और राज्य सरकार को घेरते हुए चार सीधे सवाल पूछे हैं:

  • देशभर से कितना दान मिला: पूरे देश से कितने करोड़ लोगों ने कुल कितने हजार करोड़ रुपये का दान दिया?
  • हुंडी और काउंटर का हिसाब: दान पात्रों (हुंडी) और काउंटरों से कुल कितना चढ़ावा जमा हुआ?
  • चोरी का दायरा: चंदे और चढ़ावे की यह चोरी कितने हजार करोड़ रुपये की है?
  • सरकार निष्पक्ष जांच कराने के बजाय खामोश क्यों है?

SIT की भूमिका पर सवाल: लगभग 30 करोड़ श्रद्धालुओं के चढ़ावे का हिसाब कहां है? SIT ने इस घोटाले को महज ₹80 लाख की चोरी बताकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश क्यों की?

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर आरोपियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया। उन्होंने मांग की कि प्रधानमंत्री अपने यूपी दौरे के दौरान इस मुद्दे पर देश के सामने अपनी चुप्पी तोड़ें।

SIT चार्जशीट में CCTV फुटेज से खुला राज

उधर, श्री राम जन्मभूमि दान चोरी मामले में विशेष जांच टीम (SIT) ने स्थानीय अदालत में 8 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। SIT की जांच में CCTV फुटेज, मोबाइल चैट और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) को प्रमुख सबूत बनाया गया है।

चार्जशीट के अनुसार, दान राशि की गिनती प्रक्रिया के दौरान आरोपी अविनाश शुक्ला को कथित तौर पर 85 मौकों पर पैसे निकालते देखा गया। वहीं आरोपी करुणेश पांडे को 2 बार पैसे निकालते और 68 बार चोरी में मदद करते पाया गया। इसके अलावा, आरोपी मनीष कुमार यादव 16 बार खुद चोरी में शामिल रहा और 19 मौकों पर पैसे निकालने में मदद की।

कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि वह इस मुद्दे को संसद से लेकर सड़क तक उठाती रहेगी और चंदा चोरी करने वाले सभी दोषियों को संविधान के अनुसार सजा दिलाकर रहेगी। ​(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)

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