चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल में बीएलओ की सुरक्षा को लेकर गंभीर
चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल में बीएलओ की सुरक्षा को लेकर गंभीर
राज्य चुनाव अधिकारी को जरूरी निर्देश दिए
कोलकाता। चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल में बीएलओ की सुरक्षा को लेकर गंभीर है और वह इस बाबत जरूरी उपाय करने में कोई कोताही नहीं बरतेगा। सूत्रों के मुताबिक उसने राज्य चुनाव अधिकारी को जरूरी निर्देश दिए हैं। दिल्ली में चुनाव आयुक्त और राज्य चुनाव अधिकारियों की बैठक में बीएलओ की सुरक्षा के मुद्दे पर चर्चा हुई है। इसके बावजूद अधिकतर बीएलओ अपनी सुरक्षा को लेकर भयभीत है। राज्य में एसआईआर का कार्य नवंबर में शुरू और उसे जनवरी तक समाप्त कर दिया जाएगा। चुनाव आयोग की ओर से ऐसी तैयारी की गई है कि असआईआर का कार्य समय के भीतर पूरा हो जाए। चुनाव आयोग ने राज्य चुनाव अधिकारी और जिलाधिकारों को जरूरी नर्देश दे दिए हैं। जिलाधिकारियों और बीएलओ की बैठकों में चुनाव आयोग के निर्देशों और कार्यों के बारे में चर्चा हो गई है। इस बार चुनाव में बीएलओ को नई जिम्मेदारी निभानी है, वह एसआईआर का कार्य है। उन्हें मतदाता सूची में मतदाताओं के नाम को देखते हुए अनुसार हर मतदाता के घर जाना है। उन्हें फार्म देना और उसे भरवा कर वापस लेना है। मतदाता सूची में मतदाताओं के नामों का मिलान करना है। मतदाता सूची में नामों को हटाना या जोड़ने का काम उनका नहीं, बल्कि ईआरओ का होगा। चुनाव आयोग को एसआईआर का कार्य बीएलओ के बल पर ही पूरा करना है। जानकारों के अनुसार राज्य में अधिकतर बीएलओ प्राइमरी स्कूल के शिक्षक हैं। उनकी यह शिकायत रही है कि स्थानीय स्तर पर उन पर राजनीतिक पार्टियों के नेताओं-कार्यकर्ताओं का दबाव है। सत्तारूढ़ पार्टी हो या विरोधी पार्टी, दोनों का कमोबेश उन पर दबाव है। वे असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्हें उनके साथ कोई भी अप्रिय घटना होने की आशंका है। गौरतलब है कि काफी संख्या में बीएलओ ने अपना पंचीकरण नहीं कराया था। चुनाव आयोग ने उन्हें कारण बताओं नोटिस भी थमाया और उनका संतोषजनक उत्तर नहीं होने पर खिलाफ में कार्रवाई करने का भी चेताया। सूत्रों के अनुसार चुनाव आयोग ने यह साफ किया है कि बीएलओ अपने को असुरक्षित महसूस नहीं करें। उन पर किसी भी राजनीतिक पार्टी का दबाव दिया जाता है, तो वे इसकी शिकायत चुनाव आयोग को कर सकते हैं। चुनाव आयोग ने राज्य चुनाव अधिकारी और जिलाधिकारियों को उनकी सुरक्षा की पुख्ता इंतजाम करने के लिए कहा है। एसआईआर को लेकर राजनीतिक पार्टियां दो हिस्सों में बंट गई हैं। सत्तारूढ़ टीएमसी यह कह कर इसका विरोध कर रही है कि चुनाव के ठीक पहले कम समय में एसआईआर का कार्य कराना हड़बड़ी का कार्य होगा। उसका कहना है कि यह बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नामों का हटाने की साजिश है। टीएमसी किसी भी वैध मतदाता के नाम का हटना बर्दाश्त नहीं करेगी और चुनाव आयोग का विरोध होगा। टीएमसी के विपरीत उसकी बड़ी विरोधी पार्टी भाजपा का कहना है कि एसआईआर के वगैर विधानसभा चुनाव नहीं हो सकता। टीएमसी को चुनाव में पराजित होने का भय है और इसलिए वह एसआईआर का विरोध कर रही है। एसआईआर होने पर मतदाता सूची से बड़ी संख्या में उन मतदाताओं का नाम हटेगा, जो अवैध और घुसपैठिएं हैं। भाजपा को आशंका है कि राज्य में एक करोड़ घुसपैठिए हैं। उसका आरोप है कि टीएमसी को इन घुसपैठियों का समर्थन मिलता है और वह चुनाव में जीतती है। इस बार उसकी हार निश्चित है।