एसआईआर कार्य में योगदान नहीं देने वाले बीएलओ के खिलाफ कार्रवाई होगी
एसआईआर कार्य में योगदान नहीं देने वाले बीएलओ के खिलाफ कार्रवाई होगी
कई ने अब तक एसआईआर के लिए नियुक्ति पत्र नहीं लिया
बीएलओ चुनाव आयोग की कार्रवाईका मुकाबला करने को तैयार
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने जिलाधिकारियों से उन बीएलओ के बारे में जानकारी मांगी है, जिन्होंने अब तक एसआइआर के कार्य के लिए नियुक्ति पत्र नहीं लिया है। दूसरी तरफ जो बीएलओ एसआइआर के कार्य के लिए अनिच्छुक हैं, वे चुनाव आयोग की ओर से अपने खिलाफ किसी भी कार्रवाई का मुकाबला करने के लिए तैयार है। सूत्रों के मुताबिक चुनाव आयोग ने एसआइआर के कार्य के लिए 80 हजार 681 बीएलओ को नियुक्त करने का निर्णय लिया है और इसकी प्रक्रिया करीब करीब पूरी कर ली गई है। लेकिन अभी तक 143 बीएलओ ने नियुक्ति पत्र नहीं ली है। कुछ बीएलओ द्वारा एसआइआर के कार्य में योगदान नहीं करने की जानकारी मिलने के बाद चुनाव आयोग ऐसे बीएलओ के खिलाफ कार्रवाई करने की चेतावनी दे चुका है। इसके बाबजूद कुछ बीएलओ ने एसआइआर के कार्य में योगदान नहीं किया। इस पर चुनाव आयोग ने जिलाधिकारियो को कहा है कि वे ऐसे बीएलओ के बारे में जानकारी दें। जिलाधिकारियों द्वारा जानकारी देने के बाद चुनाव आयोग एसआइआर के कार्य में योगदान नहीं करने वाले बीएलओ के खिलाफ कार्रवाई करेगा। सूत्रों का कहना है कि चुनाव आयोग ऐसे आयोग को नौकरी से हटाने के लिए राज्य सरकार को निर्देश देगा। राज्य सरकार उसके निर्देश पर क्या कदम उठाएगी, यह साफ नहीं है क्योंकि राज्य सरकार की ओर से इस बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है। जानकारों के अनुसार है कि जिन बीएलओ ने एसआइआर के कार्य में योगदान के लिए नियुक्ति पत्र नहीं लिया है, वे प्राइमरी और हाई स्कूल के शिक्षक हैं। दूर जिलों में कई स्कूल ऐसे हैं, जहां एक-दो शिक्षक हैं और उन सभी शिक्षकों को एसआइआर के कार्य में योगदान के लिए आदेश दिया गया है। ऐसे शिक्षकों का कहना है कि वे एसआइआर के कार्य में योगदान करते हैं तो उनके स्कूल में पढ़ाई बंद हो जाएगी और इसका विद्यार्थियों पर असर पड़ेगा। उनकी स्थिति उहापोह की है। जानकारों के अनुसार एसआइआर के कार्य में योगदान नहीं करने वाले बीएलओ को आशंका है कि उन पर राजनीतिक पार्टियों का दबाव होगा कि वे उनके अनुसार कार्य करें। चुनाव आयोग का दबाव अलग होगा। ऐसी स्थिति में उनकी विकट स्थिति होगी। वे सुचारू ढंग से एसआइआर का कार्य नहीं कर पाएंगे। कुछ बीएलओ ने असुरक्षा और अपने साथ अप्रिय घटना होने की आशंका जताई है। इधर भाजपा सूत्रों का कहना है कि एसआइआर के कार्य में योगदान नहीं करने वाले बीएलओ को बहकाया गया है। उनसे कहा गया है कि चुनाव आयोग उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। उनकी नौकरी राज्य सरकार के हाथ में हैं। भाजपा का इशारा सत्तारूढ़ टीएमसी की ओर है। भाजपा नेताओं ने एसआइआर के कार्य में योगदान नहीं करने वाले शिक्षकों को यह कह कर सावधान किया है कि उनका वही हाल होगा जो बिहार के उन बीएलओ का हाल हुआ जिन्होंने एसआइआर के कार्य में योगदान नहीं किया था।