मतुआ समुदाय से आने वाले केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर चूक गए
मतुआ समुदाय से आने वाले केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर चूक गए
समय पर नहीं पहुंचने से चुनाव आयोग से नहीं होे सकी मुलाकात
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता और केंद्रीय जहाज राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर दिल्ली में चुनाव आयोग के दिए गए समय पर नहीं पहुंच सके और उसे मतुआ समुदाय के लोगों के वोट नहीं बन पाने की समस्याओं को बताने में चूक गए। वे चुनाव आयोग की बैठक कोलकाता में होने का अनुमान लगा कर दिल्ली से कोलकाता चले आए। कोलकाता में चुनाव आयोग के कार्यालय पर जाने पर उन्हें पता चला कि बैठक कोलकाता में नहीं, बल्कि दिल्ली में हैं। उनके सामने मतुआ समुदाय के लोगों में टीएमसी नेताओं की तुलना में अपनी और बीजेपी की साख बचाने की समस्या खड़ी हो गई है। मतुआ समुदाय के सूत्रों के मुताबिक वे तीन नवंबर को चुनाव आयोग के समक्ष विस्तार से मतुआ समुदाय के लोगों की समस्याओं को रखना चाहते हैं। इसके लिए चुनाव आयोग ने उनके साथ बैठक करने का समय दे रखा था। लेकिन वे समय पर बैठक में नहीं पहुंच पाए। चुनाव आयोग के समक्ष मतुआ समुदाय की समस्याओं को नहीं रखा जा सका। मतुआ समुदाय के लोगों का कहना है कि पश्चिम बंगाल में मतुआ समुदाय में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो वोटर नहीं बन पाए हैं। वे बहुत पहले से बांग्लादेश से मजबूर होकर पश्चिम बंगाल में आए और बस गए। लेकिन उन्हें यहां का बाशिंदा नहीं माना जा रहा है और ना ही वे वोटर बन पाए हें। बीजेपी ने पिछले लोकसभा चुनाव के वक्त उन्हें नागरिकता दिलाने का भरोसा दिया था और मतुआ समुदाय के समर्थन प्राप्त किया था। शांतनु ठाकुर को मतुआ समुदाय का काफी समर्थन और सहयोग मिला वे बनगांव लोकसभा सीट से सांसद हें। एसआइआर के मौके पर शांतनु ठाकुर ने मतुआ समुदाय के लोगों को इस देश का नागरिक और वोटर बनाने का भरोसा दिया है। भाजपा की यह भी रणनीति है कि मतुआ समुदाय को सीएए के तहत नागरिक बना कर वोटर बनाया जाए। .लेकिन उसके लिए यह करना भी आसान नहीं हो रहा है। टीएमसी लगातार सीएए का विरोध कर रही है। मतुआ समुदाय के लोगो को वोटर बनाने के मुद्दे को लेकर टीएमसी भी आंदोलन कर रही है। टीएमसी की मांग है कि एसआइआर के दौरान मतुआ समुदाय के जो लोग वोटर हैं, वोटर लिस्ट से उनका नाम नहीं कटे। जो लोट वोटर नहीं बन पाएं हैं वे वोटर बनाए जाए। एसआइआर के दौरान 2002 के वोटर लिस्ट में मतुआ समुदाय के अधिकतर लोगों का नाम नहीं होने की वजह से उनकी समस्या और बढ़ गई है। उनकी समस्या को लेकर टीएमसी विधायक ममता बाला ठाकुर 5 नवंबर से आमरण अनशन कर रही हैं। इससे मतुआ समुदाय में अपनी साख बढ़ाने के मामले में शांतनु ठाकुर और बीजेपी की तुलना में ममता बाला ठाकुर और टीएमसी मतुआ आगे निकलती दिखती है।
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