गौरव भाटिया का राहुल गांधी पर तीखा हमला, विदेशी संगठनों से साठगांठ और अराजकता फैलाने का लगाया आरोप
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर देश के खिलाफ विदेशी ताकतों के साथ मिलकर बड़ी साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि राहुल गांधी 'प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल' और 'इंडियन अलायंस पेरिस' जैसे विदेशी संगठनों के संपर्क में हैं, जिनका मकसद देश में अस्थिरता और अराजकता पैदा करना है।
विदेशी संगठनों से साठगांठ के आरोप
बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने गुरुवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी पर तीखा प्रहार करते हुए उन्हें कड़े शब्दों में घेरा। उन्होंने फॉक्स न्यूज डिजिटल की एक हालिया जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया भर के नौ देशों में 101 ऐसे संगठन सक्रिय हैं, जो भारत समेत विभिन्न देशों में विरोध प्रदर्शनों को भड़काने और समन्वित करने का काम कर रहे हैं।
भाटिया ने आरोप लगाया कि इन विदेशी एजेंसियों और संगठनों के जरिए देश के भीतर लोकतांत्रिक और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है।
'इंडियन अलायंस पेरिस' और 'प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल' का जिक्र
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीजेपी नेता ने फ्रांस के संगठन 'इंडियन अलायंस पेरिस' का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि जब एक विरोध प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी को हिरासत में लिया गया था, तो इस संगठन ने सबसे पहले उससे जुड़े वीडियो और पोस्ट सोशल मीडिया पर प्रसारित किए थे।
इसके साथ ही, उन्होंने 'प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल' नामक अंतरराष्ट्रीय पूंजीवाद-विरोधी संगठन का मुद्दा उठाया। भाटिया ने कांग्रेस पार्टी के उस सोशल मीडिया पोस्ट का प्रमाण दिया जिसमें 28 अप्रैल 2025 को नई दिल्ली स्थित 10 जनपथ पर सोनिया गांधी और राहुल गांधी की इस संगठन के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ मुलाकात का जिक्र किया गया था।
फंडिंग और पारदर्शी जवाब की मांग
बीजेपी ने कांग्रेस नेतृत्व से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि इन अंतरराष्ट्रीय समूहों के साथ उनकी किस स्तर की बातचीत चल रही है और क्या उनके बीच कोई औपचारिक समझौता हुआ है। गौरव भाटिया ने सवाल उठाया कि इन संगठनों को कहां से फंडिंग मिलती है और क्या इनके तार किसी भारत-विरोधी ताकतों से जुड़े हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस तरह के नेटवर्क फ्रांस, स्पेन और अल्बानिया जैसे देशों की आंतरिक व्यवस्था को प्रभावित कर चुके हैं और अब भारत को भी इसी मॉडल के तहत अस्थिर करने की कोशिश की जा रही है। (भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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