भाजपा की नई सोशल मीडिया टीम युवाओं को हिंसा की धमकी दे रही है: पवन खेड़ा
नई दिल्ली (भारत)। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने शनिवार को भाजपा पर देश के युवाओं को हिंसा की धमकी देने का आरोप लगाया। उन्होंने भाजपा कर्नाटक के एक सोशल मीडिया पोस्ट का स्क्रीनशॉट साझा किया, जिसमें भाजपा का 'दिमागी नक्सल' वीडियो दिखाया गया है। खेड़ा ने अपने पोस्ट में लिखा, "आखिरकार नकाब उतर ही रहा है।"
सत्ताधारी पार्टी देश के युवाओं को धमका रही
उन्होंने आगे कहा, “भाजपा ने एक नई सोशल मीडिया टीम बनाई है क्योंकि पुरानी टीम की भद्दी भाषा और घटिया हथकंडे काफी नहीं थे। अब वे खुलेआम युवाओं को हिंसा की धमकी देने लगे हैं। उनका असली चेहरा सामने आ गया है।” कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास ने भी इस पोस्ट को लेकर भाजपा की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि सत्ताधारी पार्टी देश के युवाओं को धमका रही है।
सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास ने X पर किया पोस्ट
X पर एक पोस्ट में दास ने लिखा, "सत्ताधारी पार्टी खुलेआम देश के युवाओं को गोली मारने की धमकी दे रही है! सरासर दुष्टता। लगता है उन्होंने अपना होश खो दिया है!" एक अन्य पोस्ट में दास ने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी को नफरत में डूबा देखकर उन्हें दुख हुआ और आरोप लगाया कि यह पार्टी सरकार पर सवाल उठाने वाली और बेहतर व्यवस्था चाहने वाली पीढ़ी के सामूहिक नरसंहार का आह्वान कर रही है।
नाज़ी जर्मनी से भाजपा की की तुलना
दास ने आगे कहा, "वास्तव में, यह देखकर थोड़ा दुख हुआ कि 'दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी' इतनी नफरत में डूबी हुई है कि उन्हें उस पीढ़ी के सामूहिक नरसंहार का आह्वान करने में कोई समस्या नहीं दिखती जो सरकार में बैठे लोगों पर सवाल उठाने और अपने लिए एक बेहतर व्यवस्था और उज्ज्वल भविष्य की मांग करने में विश्वास रखती है।" नाज़ी जर्मनी से तुलना करते हुए दास ने कहा, "यह बिल्कुल वही है जो हिटलर ने नाज़ी जर्मनी में यहूदियों के साथ किया था। हम इस स्थिति तक कैसे पहुँच गए? हमने कभी यह कैसे सोचा कि इस तरह की पोस्ट करना 'सामान्य' है? ये लोग संविधान में विश्वास नहीं करते। वे सचमुच एक-दूसरे के विचारों और मतों के प्रति सम्मान और सहिष्णुता की अवधारणा में विश्वास नहीं करते।
कर्नाटक भाजपा ने 'दिमागी नक्सल' शब्द का किया प्रयोग
वे सचमुच यह नहीं मानते कि लोकतंत्र तभी कायम रहता है जब चुने हुए प्रतिनिधियों से जवाबदेही मांगी जाती है। यह सचमुच भारत का वह विचार नहीं है जिसमें हमारे गांधी और अंबेडकर विश्वास करते थे। यह दुखद है। यह बेहद घृणित है। मुझे उम्मीद है कि हम इस कुरूपता से बाहर निकल पाएंगे जिसने हमारे खूबसूरत राष्ट्र को जकड़ लिया है। हमें बहुत संघर्ष के बाद आजादी मिली है। इसलिए हमें कभी भी ऐसे नीच लोगों को इतनी बड़ी जिम्मेदारी के पदों पर नहीं बैठने देना चाहिए। सचमुच घृणास्पद।" ये आरोप तब सामने आए जब कर्नाटक भाजपा ने 'दिमागी नक्सल' शब्द का इस्तेमाल करते हुए एक सोशल मीडिया वीडियो साझा किया, जिसकी विपक्षी नेताओं ने आलोचना की।
प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के भाषण दौरान दिमागी नक्सली शब्द किया प्रयोग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में कहा था कि जंगल में हथियार उठाने वाले नक्सलियों का तो सफाया हो चुका है, लेकिन देश के विभिन्न हिस्सों में 'दिमागी नक्सली' भी मौजूद हैं, जिन्हें पहचान कर अलग-थलग करना जरूरी है। इसके बाद राजनीतिक चर्चा में "नक्सल" और "राष्ट्र-विरोधी" जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर नए सिरे से बहस छिड़ गई है। लाल किले की प्राचीर से बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "वर्षों से माओवादी विचारधारा वाले लोग सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे हैं; यहां तक कि सरकारी समितियों में भी इस विचारधारा ने विभिन्न संस्थानों और पहलों को प्रभावित किया है। मेरे प्रिय देशवासियों, हम 'हथियारधारी नक्सलियों' से देश को मुक्त कराने में सफल रहे हैं। भले ही ये नक्सली चले गए हों, लेकिन 'दिमागी नक्सली' हिंसा के रास्ते तलाश रहे हैं और देश को गलत रास्ते पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। हमें इन दिमागी नक्सलियों की पहचान करनी होगी, उन्हें अलग-थलग करना होगा और युवाओं को एक विकसित देश के लिए एकजुट करना होगा।" (इनपुटः ANI)
यह भी पढ़ेंः चेहरे के दाग-धब्बे हल्के करने के लिए अपनाएं ये आसान स्किनकेयर टिप्स