कैबिनेट ने 10,000 करोड़ रुपये की कंटेनर निर्माण योजना को दी मंजूरी, 53,000 से अधिक रोजगार की उम्मीद
नई दिल्ली (भारत)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग प्रमोशन स्कीम (CMPS) को मंजूरी दे दी। इस योजना के लिए वित्त वर्ष 2039-40 तक 10,000 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इसका उद्देश्य भारत की सालाना कंटेनर निर्माण क्षमता को लगभग दस गुना बढ़ाकर 7.5 लाख ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट्स (TEUs) तक पहुंचाना है। सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से देश में कंटेनर निर्माण का मजबूत इकोसिस्टम विकसित होगा और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
भारत में कंटेनर निर्माण को बढ़ावा देने पर जोर
सरकार की आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, इस योजना का लक्ष्य भारत में विश्वस्तरीय कंटेनर निर्माण इकोसिस्टम तैयार करना और सप्लाई चेन को मजबूत बनाना है। इसके तहत नई निर्माण इकाइयां स्थापित करने के साथ मौजूदा इकाइयों की क्षमता बढ़ाने में भी सहायता दी जाएगी। इस पहल से भारत को कंटेनर निर्माण के क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने और गुणवत्तापूर्ण शिपिंग कंटेनरों के उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद मिलने की उम्मीद है।
दुनिया में 95 प्रतिशत कंटेनर उत्पादन एक ही देश में केंद्रित
कैबिनेट की बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में वैश्विक कंटेनर निर्माण में विविधता लाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में कंटेनरों की अहम भूमिका है और थोक वस्तुओं को छोड़कर निर्यात तथा आयात के लिए भेजे जाने वाले लगभग सभी सामान कंटेनरों में ले जाए जाते हैं।
वैष्णव ने कहा, "वैश्विक स्तर पर कंटेनर निर्माण का काम बहुत अधिक केंद्रित है; इसका 95% उत्पादन केवल एक ही देश में होता है।" उन्होंने बताया कि शिपिंग लाइनें और कंपनियां चाहती हैं कि कोई दूसरा देश भी इस क्षेत्र में मजबूत विनिर्माण क्षमता विकसित करे।
योजना के तहत तीन प्रमुख घटकों में मिलेगी सहायता
भारतीय प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की विज्ञप्ति के मुताबिक, कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग प्रमोशन स्कीम के तीन प्रमुख घटक हैं। इनमें ब्याज सहायता (ISA), परिचालन व्यय सहायता (OEA) और परीक्षण एवं प्रमाणन सहायता शामिल हैं। इन प्रावधानों के जरिए नई इकाइयों की स्थापना, मौजूदा संयंत्रों के विस्तार और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कंटेनर निर्माण को प्रोत्साहित किया जाएगा।
ब्याज सहायता के लिए 859 करोड़ रुपये आवंटित
योजना के तहत नई निर्माण इकाइयां स्थापित करने और मौजूदा इकाइयों का विस्तार करने के लिए लिए गए पात्र टर्म लोन पर सालाना 3 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी दी जाएगी। इस ब्याज सहायता घटक के लिए 859 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसका उद्देश्य कंटेनर निर्माण क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करना और निर्माताओं के लिए नई उत्पादन क्षमता विकसित करना आसान बनाना है।
परिचालन व्यय सहायता के लिए 8,891 करोड़ रुपये
योजना में सबसे बड़ा आवंटन परिचालन व्यय सहायता (OEA) के लिए किया गया है। इस मद में 8,891 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। इसके तहत वैश्विक शिपिंग मानकों के अनुरूप निर्मित और पात्र निर्माताओं द्वारा बेचे जाने वाले कंटेनरों के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसका उद्देश्य उत्पादन लागत के अंतर को कम करना और घरेलू निर्माताओं की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में सुधार करना है।
परीक्षण और प्रमाणन के लिए 150 करोड़ रुपये
कंटेनर निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए परीक्षण और प्रमाणन सहायता के तहत 150 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। इसमें डायनामिक लॉन्गिट्यूडिनल इम्पैक्ट टेस्टिंग के लिए साझा सुविधाएं विकसित करना भी शामिल है। इस सहायता से निर्माताओं को कंटेनरों के परीक्षण और प्रमाणन की व्यवस्था उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी, जिससे वैश्विक मानकों के अनुरूप उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सकेगा।
योजना से 53,000 से अधिक रोजगार पैदा होने की उम्मीद
सरकार के अनुमान के अनुसार, कंटेनर निर्माण योजना से लगभग 3,000 प्रत्यक्ष और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा हो सकते हैं। इसके अलावा, इस पहल से कॉर्नर कास्टिंग, विशेष स्टील, लकड़ी के फ्रेम और पेंट जैसे सहायक उद्योगों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे कंटेनर निर्माण से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को विस्तार मिल सकता है।
भारत को वैश्विक कंटेनर निर्यात केंद्र बनाने की तैयारी
केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित इस पहल का उद्देश्य भारत को गुणवत्तापूर्ण शिपिंग कंटेनरों के वैश्विक निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करना है। सरकार को उम्मीद है कि घरेलू निर्माण क्षमता बढ़ने से समुद्री परिवहन और लॉजिस्टिक्स की आपूर्ति श्रृंखलाएं मजबूत होंगी। साथ ही, कंटेनर निर्माण क्षेत्र में निवेश और उत्पादन को बढ़ावा देकर भारत की वैश्विक विनिर्माण क्षमता का विस्तार किया जा सकेगा। (Source: ANI)
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