आरोपियों ने भारत की धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक सरकार

पीएफआई आतंकी साजिश मामले में 20 के खिलाफ कोर्ट में आरोप तय

नई दिल्ली । पटियाला हाउस कोर्ट कॉम्प्लेक्स स्थित विशेष एनआईए अदालत ने शनिवार को प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के 20 सदस्यों के खिलाफ आतंकी मामले में औपचारिक रूप से आरोप तय किए। इसमें पीएफआई और इसके 20 पदाधिकारियों, जिनमें संस्थापक अध्यक्ष ई अबू बकर और अध्यक्ष ओएमए सलाम के भी नाम शामिल हैं। इन पर सब पर आरोप है कि इन्होंने आपराधिक साजिश रचने के साथ ही देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने, आतंकी संगठन के लिए धन जुटाने, आतंकी गतिविधियों की साजिश,आतंकी शिविर लगाने जैसे कृत्य किए। इसके अलावा यूएपीए के तहत भी आरोप तय किए गए। 

देशव्यापी कार्रवाई में किए गए थे गिरफ्तार

इन आरोपियों को सितंबर 2022 में देशव्यापी कार्रवाई में गिरफ्तार किया गया था। विशेष एनआईए न्यायाधीश प्रशांत शर्मा की अदालत में सभी ने  आरोपों से इनकार किया और सुनवाई की मांग की। अदालत ने एनआईए को 29 जुलाई से सबूत पेश करने का निर्देश दिया है। जांच एजेंसी की ओर से विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) राहुल त्यागी, सहायक लोक अभियोजक जतिन खत्री और अमित रोहिल्ला पेश हुए। वहीं, आरोपियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एस बालन, ए नौफल और सैपान दस्तगीर पेश हुए। अदालत में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने कहा कि मौजूदा सबूतों को समग्र रूप से देखने पर गंभीर संदेह पैदा होता है कि आरोपियों ने भारत की धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक सरकार को उखाड़ फेंकने और 2047 तक या उससे पहले भारत में शरिया कानून के तहत एक इस्लामी शासन स्थापित करने  की साजिश को अंजाम दिया। 

इन सबके खिलाफ 13 13 अप्रैल, 2022 को हुई थी एफआईआर

(एनआईए) ने 13 अप्रैल, 2022 को नई दिल्ली में भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 120-बी और 153-ए तथा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 17, 18, 18-बी, 20, 22-बी, 38 और 39 के तहत दंडनीय अपराधों के लिए एफआईआर दर्ज की थी। यह एफआईआर भारत सरकार के गृह मंत्रालय के उस आदेश के अनुपालन में दर्ज की गई थी, जिसमें राष्ट्रीय जांच एजेंसी को जांच शुरू करने का निर्देश दिया गया था। यह भी आरोप है कि आरोपी युवाओं को कट्टरपंथी बना रहे थे और समुदायों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा दे रहे थे, और आरएसएस के वरिष्ठ नेता भी निशाने पर थे। (एएनआई)

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