PM मोदी की 'दिमागी नक्सल' वाली टिप्पणी पर चिदंबरम का पलटवार
नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की "माओवादी मानसिकता" वाली टिप्पणी पर पलटवार करते हुए कहा, "दिमागी नक्सल होने पर गर्व है!" चिदंबरम ने X पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री पर कटाक्ष किया। यह कटाक्ष लाल किले से दिए गए उनके 80वें स्वतंत्रता दिवस भाषण के एक दिन बाद किया गया, जिसमें उन्होंने लोगों और अधिकारियों से "दिमागी नक्सल" (वैचारिक नक्सली) मानसिकता वाले लोगों की "पहचान करने और उन्हें अलग-थलग करने" का आग्रह किया था। उन्होंने X पर लिखा, "मुझे दिमागी नक्सल होने पर गर्व है"।
<blockquote lang="en" dir="ltr">I am proud to be a dimagi naxal !</p>— P. Chidambaram (@PChidambaram_IN) <a href="https://x.com/PChidambaram_IN/status/2088802890240627139?ref_src=twsrc%5Etfw">August 16, 2026</a></blockquote> <script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
3500 से अधिक सुरक्षाकर्मी हुए थे शहीद
शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 2014 से सरकार द्वारा की गई कार्रवाई से जंगल में चल रहे उग्रवाद को काफी हद तक समाप्त कर दिया गया है, जिसमें 3500 से अधिक सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे, लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि "माओवादी मानसिकता" वाले लोग पहले सरकारी समितियों में पदों पर आसीन थे और नीतियों को प्रभावित करते थे। 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य से इस आह्वान को जोड़ते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं को राष्ट्र निर्माण से जोड़े रखने पर ध्यान केंद्रित करना होगा और चेतावनी दी कि सशस्त्र माओवादी हिंसा के अंतिम चरण में होने के बावजूद संस्थानों में वैचारिक नक्सलवादी मानसिकता अभी भी मौजूद है।
राष्ट्रगान और वंदे मातरम से संबंधित अपनी ऐतिहासिक विरासत का किया बचाव
शनिवार को कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणियों की कड़ी आलोचना करते हुए दिमागी नक्सलियों के खिलाफ उनकी चेतावनियों को खोखला राजनीतिक बयानबाजी बताया। साथ ही भारत के राष्ट्रगान वंदे मातरम से संबंधित अपनी ऐतिहासिक विरासत का जोरदार बचाव किया। देश की प्रगति के लिए खतरा पैदा करने वाले दिमागी नक्सलियों की पहचान और उन्हें अलग-थलग करने के प्रधानमंत्री मोदी के आह्वान पर प्रतिक्रिया देते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि इस शब्द का कोई वास्तविक अर्थ नहीं है और उन्होंने "शहरी नक्सल" वाक्यांश को लेकर पहले हुई बहसों से इसकी तुलना की।
जयराम रमेश ने 'शहरी नक्सल' शब्द की परिभाषा पर उठाए सवाल
रमेश ने बताया कि जब सरकार ने पहले राजनीतिक विरोधियों को शहरी नक्सल करार दिया था, तब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को संसद में यह स्पष्ट करना पड़ा था कि ऐसी कोई आधिकारिक कानूनी परिभाषा मौजूद नहीं है। जयराम रमेश ने कहा, दो-तीन साल पहले उन्होंने (प्रधानमंत्री मोदी ने) अपने राजनीतिक विरोधियों को 'शहरी नक्सल' कहा था। उस समय संसद में यह सवाल उठा था कि 'शहरी नक्सल' की परिभाषा क्या है।
आलोचकों की मांगें बाद में मानती है सरकार- रमेश बोले
गृह मंत्री ने जवाब दिया था कि 'शहरी नक्सल' जैसी कोई चीज नहीं है, न ही इसकी कोई परिभाषा है। आज प्रधानमंत्री लाल किले से अपने राजनीतिक विरोधियों के लिए 'मानसिक नक्सल' (वैचारिक नक्सल) शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं। रमेश ने तर्क दिया कि केंद्र सरकार नियमित रूप से अपने आलोचकों को बदनाम करती है और अंततः उन्हीं नीतियों को अपना लेती है जिनकी वे वकालत करते हैं। वास्तविकता यह है कि अंततः वह उन्हीं लोगों द्वारा उठाए गए मुद्दों और मांगों को स्वीकार कर लेते हैं, जिन्हें वह 'शहरी नक्सल' कहते हैं।
12 साल बाद भी उनके राजनीतिक भाषण में कुछ नया नहीं
उन्होंने जातिगत जनगणना के विचार को 'शहरी नक्सलवादी' सोच कहकर खारिज कर दिया था, फिर भी एक साल पहले उन्होंने जाति आधारित जनगणना की घोषणा कर दी। पहले आप अपमानजनक टिप्पणियां करते हैं- उन्हें 'शहरी नक्सलवादी' या 'मानसिक नक्सलवादी' कहते हैं, लेकिन बाद में आप उन्हीं मांगों को मान लेते हैं जो आपके राजनीतिक विरोधी कर रहे थे। 12 साल बाद भी उनके राजनीतिक भाषण में कुछ नया नहीं है।
(इनपुट: ANI)
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