कार्ति चिदंबरम ने DMK को घेरा, परिसीमन और राम मंदिर ट्रस्ट पर उठाए सवाल
नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने सोमवार को अहम विधायी मुद्दों पर DMK के रुख में बदलाव पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पार्टी को खुद अपना स्टैंड साफ करना चाहिए। साथ ही, उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट की सार्वजनिक जांच होनी चाहिए, जिसमें CAG ऑडिट और संसद में चर्चा शामिल हो।
'एक देश, एक चुनाव' के रुख पर DMK को चेतावनी
DMK के रुख पर प्रतिक्रिया देते हुए चिदंबरम ने ANI से कहा, "आपको DMK से पूछना होगा कि वे अपना स्टैंड क्यों बदल रहे हैं। मेरी राय में, उन्हें 'एक देश, एक चुनाव' (One Nation One Election) के लिए लुभाया जा रहा है। वे जल्द से जल्द एक और चुनाव कराने की जल्दी में हैं। लेकिन मैं बस इतना कह सकता हूं कि अगर DMK उस रास्ते पर चलती है, तो अगले चुनावों में उनका हाल हालिया विधानसभा चुनावों से भी बुरा होगा।"
परिसीमन विधेयक पर DMK से विरोध की उम्मीद
प्रस्तावित परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) पर कांग्रेस सांसद ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि DMK इस प्रस्ताव के खिलाफ अपने पहले के रुख पर कायम रहेगी। उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता कि DMK का क्या रुख है। आपको उनसे पूछना चाहिए। पिछली बार उन्होंने विधेयक का विरोध किया था, मुझे उम्मीद है कि इस बार भी वे विधेयक का विरोध करेंगे।" प्रस्ताव के विरोध का कारण बताते हुए चिदंबरम ने कहा कि हालांकि सीटों में बढ़ोतरी कागज पर समान लग सकती है, लेकिन वास्तविक संख्या (absolute numbers) संसद में उत्तरी और दक्षिणी राज्यों के बीच अंतर को बढ़ा देगी।
उत्तर बनाम दक्षिण: संसदीय सीटों का बढ़ता अंतर
उन्होंने कहा, "कागज़ पर ऐसा लगता है कि सभी को समान प्रतिशत में बढ़ोतरी मिल रही है, लेकिन संसदीय लोकतंत्र में वास्तविक संख्या मायने रखती है। अभी तमिलनाडु और पुडुचेरी के पास 40 सीटें हैं। उत्तर प्रदेश के पास 80 सीटें हैं। तो, तमिलनाडु, पुडुचेरी और उत्तर प्रदेश के बीच का अंतर 40 है। लेकिन अगर आप सीटों में 50% की बढ़ोतरी करते हैं, तो तमिलनाडु और पुडुचेरी की सीटें 60 हो जाएंगी और उत्तर प्रदेश की 120 हो जाएंगी। तो, अंतर 60 हो जाएगा। इसलिए, राजनीति में वास्तविक संख्या मायने रखती है। यह सिर्फ़ प्रतिशत की बात नहीं है क्योंकि भारत के उत्तर के बराबर आने के लिए दक्षिणी राज्यों को बहुत ज़्यादा काम करना होगा। दक्षिणी राज्यों की आबादी कम है और उन्होंने टैक्स में ज़्यादा योगदान दिया है, लेकिन लोकसभा में उनके सांसदों की संख्या कम हो जाएगी।" उन्होंने आगे कहा कि लोकसभा की संख्या बढ़ाने से संसदीय बहस की प्रभावशीलता कम हो जाएगी।
संसद में सदस्यों की संख्या बढ़ने से घटती प्रभावशीलता
चिदंबरम ने कहा, "इसके अलावा, सदन में 543 सदस्य होने पर भी हमें बोलने के लिए बहुत कम समय मिलता है। 815 सदस्य होने पर बोलने के लिए और भी कम समय मिलेगा। स्पीकर हम सभी के नाम नहीं जानते हैं, और जो 300 अतिरिक्त लोग आएंगे, उनके नाम तो उन्हें और भी कम पता होंगे। इसलिए, सदन चीन की तरह सिर्फ़ एक 'स्टैम्पिंग हाउस' बनकर रह जाएगा। एक बड़ी संसद असरदार संसद नहीं होगी।"
राम मंदिर ट्रस्ट के लिए CAG ऑडिट और RTI की मांग
उन्होंने कहा, "राम मंदिर का मुद्दा न केवल भावनाओं से जुड़ा है, बल्कि यह सरकार द्वारा बनाया गया एक ट्रस्ट भी है। भले ही यह एक प्राइवेट ट्रस्ट है, लेकिन यह एक पब्लिक बॉडी की तरह काम करता है। इसे सभी पब्लिक बॉडीज़ की जांच-पड़ताल के दायरे में होना चाहिए। इसमें जनता का पैसा शामिल है क्योंकि भक्तों का योगदान आम जनता से आता है। इसलिए, यह RTI के दायरे में होना चाहिए, इसका CAG ऑडिट होना चाहिए, इस पर संसद में बहस होनी चाहिए और इसके लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए।"
मॉनसून सत्र का पहला दिन: विपक्ष का भारी हंगामा
गौरतलब है कि उनकी ये बातें ऐसे समय में आईं जब सोमवार को संसद का मॉनसून सत्र शुरू हुआ। विपक्ष ने राम मंदिर दान में कथित हेराफेरी और NEET-UG पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा की मांग करते हुए नारेबाजी की, जिसके कारण दोनों सदनों की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी। (भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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