जंतर-मंतर पर CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन क

दादी के निधन के बाद भी डटे CJP नेता अभिजीत दिपके, बोले- 'सड़कों पर फिर उतरेंगे, नहीं किया कोई बॉन्ड साइन'

CJP activist Abhijeet Dipke

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद रिहा हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ता अभिजीत दिपके ने रविवार को अपना आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया। दिपके ने स्पष्ट किया कि पारिवारिक शोक और राजनीतिक दबाव के बावजूद उनका प्रदर्शन नहीं रुकेगा।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट साझा करते हुए अभिजीत दिपके ने लिखा, "हमने ऐसा कोई बॉन्ड साइन नहीं किया है जिसमें कहा गया हो कि हम विरोध नहीं करेंगे। हम फिर से सड़कों पर उतरेंगे।" उन्होंने जोर देकर कहा कि CJP न तो पीछे हटेगी और न ही किसी दबाव से डरेगी।

पारिवारिक शोक के बीच गांव लौटे दिपके

अभिजीत दिपके का यह सख्त रुख ऐसे समय में सामने आया है जब उनका परिवार गहरे व्यक्तिगत शोक से गुजर रहा है। महाराष्ट्र के हिंगोली जिले स्थित संतुक पिंपरी गांव में उनकी 85 वर्षीया दादी सावित्रीबाई शंकरराव दिपके का लंबी बीमारी और उम्र संबंधी समस्याओं के कारण निधन हो गया है। दिपके ने बताया कि दादी के निधन की सूचना मिलते ही वह परिवार के साथ रहने के लिए अपने गांव रवाना हो रहे हैं।

10 अक्टूबर को बताया 'तानाशाही के अंत की शुरुआत'

भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोलते हुए दिपके ने दावा किया कि 10 अक्टूबर का दिन "इस तानाशाही के अंत की शुरुआत" के रूप में याद किया जाएगा। यह बयान CJP के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आयोजित किए गए बड़े विरोध प्रदर्शन के ठीक अगले दिन आया है।

दिल्ली कैंट थाने से मजिस्ट्रेट के समक्ष पेशी के बाद रिहाई

दूसरी ओर, राष्ट्रीय राजधानी में हिरासत में लिए गए CJP के प्रमुख सदस्यों की रिहाई के बाद पार्टी ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। CJP लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह के मुताबिक, एहतियाती गिरफ्तारी (Preventive Detention) के बाद CJP नेता अभिजीत दिपके, आशुतोष रंका और सौरव दास को दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन में एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें रिहा कर दिया गया।

रत्ना सिंह ने 'एक्स' पर जानकारी देते हुए लिखा, "सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के वचन पर रिहाई दी गई है। शर्त यह है कि एक साल तक शांति भंग नहीं होनी चाहिए।"

जंतर-मंतर पर भारी सुरक्षा और दिग्गज नेताओं की हिरासत

उल्लेखनीय है कि शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय राजधानी में भारी पुलिस बल की तैनाती और तीखा राजनीतिक टकराव देखने को मिला था। सुरक्षा बलों द्वारा लगभग 1,000 लोगों को एहतियातन हिरासत में लिया गया था। इनमें आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, CPI(M) नेता पिनाराई विजयन और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी जैसे विपक्ष के प्रमुख चेहरे शामिल थे।

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