दिल्ली में सुरक्षा पाबंदियों पर CJP का हमला, कहा- ‘हालात खुली इमरजेंसी जैसे’
नई दिल्ली (भारत)। राजधानी दिल्ली में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और आवाजाही पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने प्रशासन पर निशाना साधा है। पार्टी के कार्यकर्ताओं सौरभ दास और आशुतोष रंका ने आरोप लगाया कि युवाओं के नेतृत्व वाले आंदोलन को रोकने के लिए शहर में बड़े पैमाने पर सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है, जिससे आम नागरिकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। CJP ने मौजूदा हालात की तुलना 1975 की इमरजेंसी से करते हुए इसे “खुली इमरजेंसी” जैसा बताया है। हालांकि, सुरक्षा बलों की तैनाती और पाबंदियों को लेकर पार्टी की ओर से किए गए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
सौरभ दास बोले- दिल्ली को छावनी में बदल दिया गया
CJP कार्यकर्ता सौरभ दास ने दिल्ली में भारी सुरक्षा तैनाती पर सवाल उठाते हुए 1975 की इमरजेंसी का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले तीन-चार दिनों में राष्ट्रीय राजधानी को लगभग छावनी में तब्दील कर दिया गया है और शहर में कड़े प्रतिबंध लागू किए गए हैं।
दास ने कहा, “अभी देश भर के हालात 'खुली इमरजेंसी' जैसे हैं। 1975 के तानाशाही शासन के बाद से ऐसे दमनकारी हालात कभी नहीं देखे गए।” उन्होंने मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था की तुलना इमरजेंसी के दौर से करते हुए प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए।
30,000 से 40,000 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती का दावा
सौरभ दास ने दावा किया कि दिल्ली में 30,000 से 40,000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। उनके मुताबिक, इनमें सीमाओं पर तैनात सैनिकों के साथ कश्मीर, बंगाल और नक्सल प्रभावित इलाकों से हवाई मार्ग के जरिए लाए गए सुरक्षा बल भी शामिल हैं।
दास ने आरोप लगाया कि इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और कड़ी पाबंदियों का असर केवल प्रदर्शनकारियों तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि इन कदमों से आम नागरिक भी प्रभावित हो रहे हैं, जबकि उनका आंदोलन से कोई लेना-देना नहीं है।
आम नागरिकों को परेशानी होने का आरोप
CJP कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि आंदोलन को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदमों से आम लोगों की आवाजाही और दैनिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। संगठन ने सुरक्षा व्यवस्था और परिवहन पर पाबंदियों को लेकर प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए।
सौरभ दास ने कहा कि मौजूदा सख्ती प्रदर्शनकारियों के साथ-साथ उन नागरिकों को भी प्रभावित कर रही है, जो आंदोलन का हिस्सा नहीं हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया शामिल नहीं है। (Source: ANI)
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