सीएम ममता बनर्जी की धार्मिकता की राजनीति
Kolkata : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी साख और लोकप्रियता की बढ़ोतरी के लिए धार्मिकता की राजनीति करने भी पीछे नहीं हैं। उन्होंने दुर्गोत्सव में सबसे अधिक पूजा पंडालों का उद्घाटन किया ही, नवमी को कालीघाट में खुद पूजा अर्चना की। राजनीतिक हलकों में हो रही चर्चा के मुताबिक पिछले सालों की तुलना में इस साल मुख्यमंत्री बनर्जी ने पूरे राज्य में ज्यादा से ज्यादा धूमधाम से दुर्गोत्सव मनाने के लिए तमाम इंतजामों की कवायद में रूचि दिखलाई।
उन्होंने दुर्गा पूजा करने वाले क्लबों व संस्थानों को पिछ्ले साल की अपेक्षा ज्यादा सहयोग राशि मुहैया कराई। छोटे स्तर के क्लबों व संस्थानों को कम से कम सवा सवा लाख रुपये और मझोले और उससे बड़े क्लबों व संस्थानों को उससे ज्यादा राशि प्रदान करने की व्यवस्था की। उनके इस कदम की आलोचना भी हुई । सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों के संगठनों का कहना यह था कि सरकार बकाया महंगाई भत्ते का भुगतान नहीं कर आर्थिक संकट का रोना रोती है और दूसरी तरफ क्लबों व संस्थानों को दोनों हाथ से धन लूटा रही है।
'नवनिर्मित जगन्नाथ मंदिर की नकल पर अनेक पूजा पंडाल बनाए गए'
कोलकाता और आसपास के उपनगरों में इस दुर्गोत्सव में दीघा में नवनिर्मित जगन्नाथ मंदिर की नकल पर अनेक पूजा पंडाल बनाए गए। कहना न होगा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश और देखरेख में दीघा में ओडिशा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर जैसा सी भव्य जगन्नाथ मंदिर बना है। इस नवनिर्मित मंदिर का उद्घाटन ममता बनर्जी ने ही किया। इस मंदिर का विस्तार और सजावट ऐसा किया जा रहा है कि पुरी का जगन्नाथ मंदिर फीका पड़ जाए। इस मंदिर के दर्शनार्थ दीघा आने वाले की संख्या लगातार बढ़ रही है। दीघा खास पर्यटन स्थल बन गया है।
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि ममता बनर्जी की भाजपा की काट की राजनीति कर उसे ताकतवर नहीं होने देने की यह रणनीति है। उन्होंने एक सभा में संस्कृत में दुर्गा की स्तुति कर प्रधान मंत्री मोदी को यह चुनौती दी थी कि वे ऐसा कर दिखाए कि कितने दिग्गज हिंदू हैं ।
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