भारत में इस्तेमाल होने वाली ईंधन गैस CNG, PNG और L

CNG, PNG और LPG: जाने क्या है तीनों में अंतर

CNG, PNG, and LPG: Know the Differences Between the Three

नई दिल्ली। भारत में इस्तेमाल होने वाली ईंधन गैस CNG, PNG और LPG को लोग अक्सर एक जैसा समझ लेते हैं जबकि ये तीनों अपने स्रोत, स्वरूप और उपयोग के आधार पर एक-दूसरे से काफी अलग हैं। रोजमर्रा की जिंदगी में इनका इस्तेमाल अलग-अलग जरूरतों के लिए होता है और हर गैस की अपनी खासियत है। 

ये हैं CNG, PNG और LPG में क्या है मुख्य अंतर: - 

LPG (Liquefied Petroleum Gas) वही गैस है जो घरों में रसोई के सिलेंडर में इस्तेमाल होती है। यह मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण होती है जो कच्चे तेल की रिफाइनिंग के दौरान उप-उत्पाद (बाय प्रॉडक्ट) के रूप में निकलती है। इसे दबाव में तरल रूप में सिलेंडर में भरा जाता है। चूंकि यह हवा से भारी होती है, इसलिए रिसाव होने पर नीचे की ओर जमा हो जाती है, जो इसे थोड़ा ज्यादा खतरनाक बनाता है।

PNG (Piped Natural Gas) शहरों में पाइपलाइन के जरिए सीधे घरों तक पहुंचने वाली गैस है। यह मुख्य रूप से मीथेन होती है और हवा से हल्की होती है, इसलिए लीक होने पर ऊपर की ओर फैल जाती है। इसे LPG की तुलना में सुरक्षित माना जाता है। साथ ही, इसमें सिलेंडर बदलने की परेशानी नहीं होती और खर्च भी अपेक्षाकृत कम आता है।

CNG (Compressed Natural Gas) भी मीथेन आधारित गैस है, लेकिन इसे वाहनों में इस्तेमाल के लिए बहुत अधिक दबाव पर टैंकों में भरा जाता है। पेट्रोल और डीजल की तुलना में यह सस्ती और पर्यावरण के लिहाज से बेहतर मानी जाती है। यही वजह है कि दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों में ऑटो, बस और टैक्सी बड़े पैमाने पर CNG से चलते हैं।

कैसे बनती हैं ये गैसें?

LPG कच्चे तेल की रिफाइनिंग के दौरान निकलती है। भारत की रिफाइनरियां मुख्य रूप से पेट्रोल और डीजल उत्पादन पर केंद्रित हैं, इसलिए LPG का घरेलू उत्पादन मांग के मुकाबले कम है। वहीं, PNG और CNG के लिए प्राकृतिक गैस जमीन और समुद्र के नीचे से निकाली जाती है। इसे LNG के रूप में जहाजों के जरिए आयात भी किया जाता है और बाद में गैस के रूप में बदलकर पाइपलाइन नेटवर्क में भेजा जाता है।

भारत में उत्पादन की स्थिति

देश में प्राकृतिक गैस का लगभग 67% उत्पादन समुद्र (ऑफशोर) से होता है, खासकर आंध्र प्रदेश के तट के पास KG बेसिन से। इसके अलावा असम, राजस्थान, त्रिपुरा, तमिलनाडु, गुजरात और आंध्र प्रदेश में भी ऑनशोर उत्पादन होता है। CNG वितरण के लिए दिल्ली-NCR में IGL, मुंबई में MGL और गुजरात में Gujarat Gas प्रमुख भूमिका निभाते हैं। LPG का उत्पादन IOC, BPCL और HPCL जैसी कंपनियों की रिफाइनरियों में होता है, लेकिन बढ़ती मांग के मुकाबले यह उत्पादन पर्याप्त नहीं है।

आयात पर बढ़ती निर्भरता

भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर है। प्राकृतिक गैस (PNG और CNG) की कुल खपत का करीब आधा हिस्सा आयात से आता है। यह गैस मुख्य रूप से कतर, UAE, सऊदी अरब और अमेरिका से LNG के रूप में लाई जाती है। LPG की स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है। साल 2024 में देश की कुल जरूरत का करीब 67% LPG आयात करना पड़ा, जबकि 2015 में यह आंकड़ा 47% था। उज्ज्वला योजना के बाद LPG की मांग तेजी से बढ़ी, लेकिन घरेलू उत्पादन उसी गति से नहीं बढ़ सका। इस आयात का ज्यादातर हिस्सा खाड़ी देशों से आता है।

ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा

आयात पर बढ़ती निर्भरता भारत के लिए एक बड़ी चिंता बनती जा रही है। मार्च 2026 में ईरान से जुड़े तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा के चलते देश को गैस आपूर्ति संकट का सामना करना पड़ा। स्थिति को संभालने के लिए सरकार को आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू करना पड़ा। यह घटना इस बात का साफ संकेत है कि खाड़ी देशों पर अत्यधिक निर्भरता भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक कमजोर कड़ी बन सकती है।

यह भी पढ़ें: https://www.primenewsnetwork.in/world/oli-arrest-sparks-political-unrest-in-nepal/152603

केपी शर्मा ओली की गिरफ्तारी से नेपाल में सियासी भूचाल, सड़कों पर उतरे समर्थक