साइबर फ्रॉड में फंसी रकम ऐसे मिलेगी वापस, I4C के MRM से ऑनलाइन करें रिफंड रिक्वेस्ट
नई दिल्ली (भारत)। अगर साइबर फ्रॉड की शिकायत के बाद आपकी रकम स्कैमर या उस बैंक अकाउंट में होल्ड हो गई है, जहां पैसा भेजा गया था, तो उसे वापस पाने के लिए रिक्वेस्ट की जा सकती है। गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाला I4C इसके लिए Money Restoration Module (MRM) की सुविधा देता है। इस प्रक्रिया के जरिए पीड़ित ऑनलाइन रिफंड की रिक्वेस्ट कर सकते हैं।
MRM के जरिए ऑनलाइन करें रिफंड रिक्वेस्ट
I4C से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, अगर साइबर फ्रॉड के बाद आपकी रकम किसी बैंक अकाउंट में होल्ड हुई है, तो MRM के जरिए रिस्टोरेशन रिक्वेस्ट जमा की जा सकती है। इसके लिए बैंक या सरकारी दफ्तर जाने की जरूरत नहीं है। पीड़ित ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिए अपनी रकम वापस पाने का अनुरोध कर सकते हैं।
पहले 1930 पर दर्ज कराएं साइबर फ्रॉड की शिकायत
अगर आपने साइबर क्राइम पोर्टल या 1930 हेल्पलाइन के जरिए शिकायत दर्ज की है, तो सबसे पहले MRM साइट पर जाएं। यहां "Raise Refund Request" विकल्प पर क्लिक करना होगा। इसके बाद शिकायत के समय मिले 14 अंकों के NCRP Acknowledgement ID को दर्ज करें और OTP के जरिए उसे वेरिफाई करें।
सही बैंक अकाउंट की जानकारी देना जरूरी
इसके बाद "Refund Account Details" में उस बैंक अकाउंट की जानकारी भरनी होगी, जिसमें रिफंड की रकम जमा होनी है। अगर आपके पास कोर्ट का आदेश है, तो उसे "Select Court Order" विकल्प से अपलोड किया जा सकता है। साथ ही PAN कार्ड की कॉपी और मांगी गई अन्य जानकारी भरकर रिक्वेस्ट सबमिट करनी होगी।
रिक्वेस्ट ID संभालकर रखें
रिक्वेस्ट सबमिट करने के बाद 14 अंकों की Request ID मोबाइल नंबर और ईमेल पर भेजी जाएगी। अधिकारियों ने इस ID को भविष्य के लिए सुरक्षित रखने की सलाह दी है। साथ ही, फॉर्म में दी गई सभी जानकारी सही होनी चाहिए, क्योंकि गलत जानकारी के कारण रिफंड प्रक्रिया में देरी हो सकती है या रिक्वेस्ट खारिज हो सकती है।
SMS आने के बाद आगे की प्रक्रिया
जब रिफंड के लिए योग्य रकम की पहचान हो जाएगी, तो पीड़ित को SMS या ईमेल के जरिए जानकारी दी जाएगी। इसके बाद 14 अंकों के NCRP Acknowledgement Number और OTP से MRM पोर्टल पर लॉगिन करना होगा। यहां शिकायत, बैंक अकाउंट और वापस मिलने वाली रकम की जानकारी जांचनी होगी।
PAN और बैंक डिटेल के बाद मिलेगा URN
इसके बाद PAN कार्ड अपलोड कर बैंक अकाउंट की जानकारी देनी होगी और रिक्वेस्ट सबमिट करनी होगी। प्रक्रिया पूरी होने पर एक Unique Request Number यानी URN मिलेगा, जिससे रिक्वेस्ट को ट्रैक किया जा सकेगा। अधिकारियों के मुताबिक, पुलिस को इंडेम्निटी बॉन्ड भी जमा करना होगा और इसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत रकम वापस करने की कार्रवाई आगे बढ़ेगी।
32.80 लाख शिकायतों में बचाए गए 11,158 करोड़ रुपये
गृह मंत्रालय के अपडेटेड आंकड़ों के अनुसार, 30 जून तक 32.80 लाख से ज्यादा साइबर फ्रॉड शिकायतों में 11,158 करोड़ रुपये से अधिक की रकम बचाई गई है। यह आंकड़ा Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System (CFCFRMS) से जुड़ा है। इसे 2021 में वित्तीय धोखाधड़ी की तुरंत रिपोर्टिंग और रकम को ठगी से बचाने के लिए शुरू किया गया था।
I4C ने 2.77 लाख से ज्यादा फर्जी डिजिटल संसाधन ब्लॉक किए
साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के तहत I4C ने 2,77,053 से ज्यादा अवैध और फर्जी ऐप्स, कंटेंट, वेबसाइट, ई-मेल अकाउंट, URL और लिंक को ब्लॉक किया है। इसके लिए 'सहयोग' पोर्टल और संबंधित IT मध्यस्थों के साथ मिलकर कार्रवाई की गई। इस पोर्टल को 2024 में ऑनलाइन गैर-कानूनी गतिविधियों पर तेजी से कार्रवाई के लिए शुरू किया गया था।
3,718 मोबाइल ऐप्स भी किए गए ब्लॉक
लोकसभा में दिए गए एक लिखित जवाब के अनुसार, 30 जून 2026 तक I4C ने IT Act की संबंधित धाराओं के तहत 3,718 मोबाइल ऐप्स को ब्लॉक किया है। इनमें धोखाधड़ी वाले लोन ऐप्स भी शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए होने वाली साइबर ठगी पर रोक लगाना है।
संदिग्ध अकाउंट और ट्रांजैक्शन पर भी कार्रवाई
I4C ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर साइबर अपराधियों की पहचान से जुड़ी संदिग्ध रजिस्ट्री भी शुरू की है। इसमें 30.48 लाख से ज्यादा संदिग्ध पहचान डेटा और 32.08 लाख Layer-1 Mule Accounts की जानकारी साझा की गई है। 30 जून 2026 तक 25,698 करोड़ रुपये के संदिग्ध ट्रांजैक्शन को भी रोका गया है।
15.75 लाख से ज्यादा SIM और 5.77 लाख IMEI ब्लॉक
गृह मंत्रालय के अनुसार, पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार ने 30 जून 2026 तक 15.75 लाख से ज्यादा SIM कार्ड और 5.77 लाख IMEI नंबर ब्लॉक किए हैं। इन कदमों का मकसद साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल नंबरों और डिवाइस की पहचान कर उन पर कार्रवाई करना है।
साइबर अपराध से निपटने के लिए राज्यों को मदद
गृह मंत्रालय साइबर अपराध से निपटने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण समेत कई तरह की मदद देता है। इसके तहत पॉलिसी गाइडेंस, क्षमता निर्माण और वित्तीय संसाधन भी उपलब्ध कराए जाते हैं। इसका उद्देश्य साइबर अपराध की जांच और कार्रवाई को मजबूत बनाना है।
CyTrain से पुलिस और न्यायिक अधिकारियों को ट्रेनिंग
I4C ने पुलिस और न्यायिक अधिकारियों के लिए 'CyTrain' नाम का ऑनलाइन कोर्स प्लेटफॉर्म भी बनाया है। इसमें साइबर अपराध की जांच, फोरेंसिक और अभियोजन जैसे विषयों पर ट्रेनिंग दी जाती है। 30 जून तक 1,63,344 से ज्यादा अधिकारी इस प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर हो चुके हैं और 1,61,957 से ज्यादा सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं।
साइबर कमांडो प्रोग्राम से तैयार हो रही खास टीम
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 10 सितंबर 2024 को साइबर कमांडो प्रोग्राम शुरू किया था। इसका उद्देश्य साइबर सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए खास ट्रेनिंग प्राप्त कमांडो की एक विशेष टीम तैयार करना है। अब तक 281 साइबर कमांडो ट्रेनिंग पूरी कर चुके हैं। I4C लगातार विभिन्न स्तरों पर 'कनेक्ट' और पीयर लर्निंग सेशन के जरिए साइबर सुरक्षा क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहा है। (Source: ANI)
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