मासूम के साथ सामूहिक दुष्कर्म में फांसी की सजा
मासूम के साथ सामूहिक दुष्कर्म में फांसी की सजा
अदालत ने की भावुक टिप्पणी
आगरा। यहां साढ़े पांच साल की बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म और फिर बेरहमी से हत्या के मामले में दो दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई है। सजा सुनाते हुए अदालत ने अत्यंत भावुक टिप्पणी भी की है। कोर्ट का कहना है कि दोषियों ने नन्ही अबोध बालिका के विरुद्ध सह अभियुक्त के साथ हवस पूर्ति के लिए यह जघन्य अपराध किया है। विशेष न्यायाधीश ने इस बारे में पारित आदेश में कहा है कि यह अत्यंत गंभीर और संवेदनशील मामला है। इसमें अभियुक्त अमित वादी का रिश्तेदार होने के कारण पीड़िता उसकी पुत्री के रूप में थी। इस विश्वास के कारण ही वह अभियुक्त अमित के साथ गई होगी। अभियुक्त ने संबंधों की मर्यादा का तनिक ध्यान न रखते हुए पीड़िता के विश्वास को तार-तार किया। नन्ही अबोध बालिका के विरुद्ध सह अभियुक्त के साथ ही उसने हवस पूरा करने के लिए यह कुकृत्य किया। इस नन्ही जान को उसके माता-पिता ने कभी कोई सुई भी न चुभने दी होगी। बालिका ने अपना जीवन बचाने के लिए कितना संघर्ष किया होगा। अदालत ने निम्नोक्ति भावुक पंक्तियां भी लिखीं है। एक बलात्कारी दिन आया, आके बीत गया। रोया खबरें सुन-सुन कर, मन मानों रीत गया। बच्चियों तक को नहीं बख्शा इन असुरों ने। खुदा शायद हार गया, शैतान जीत गया। छीन ली कुछ मासूमों की मुस्कान सदा के लिए। ख़िलखिलाहटें थमीं और जीवन संगीत गया।'
साइकिल के साथ मासूम की भावुक यादें
घर में बेटी की साइकिल पड़ी हुई है। घर के बच्चे जब भी साइकिल उठाते, देख कर दादा, दादी, मां रो पड़ती थीं। उन्होंने बताया कि जब बच्चे ज्यादा जिद पकड़ने लगे तो साइकिल की गद्दी निकाल कर रख दी थी। बेटी के साथ जुड़ी साइकिल की यादें परिवार के जेहन में आज भी हैं। उसकी जिद पर ही साइकिल ली गई थी। कैसे उसे साइकिल चलाना सिखाया, अपनी दादी को साइकिल पर बैठने के लिए जिद करने की बात हो या फिर कहानी सुनाने की, छह साल के जीवन का सफर इनसाफ के साथ परिवारीजनों को याद आ गया।