रक्षा मंत्री ने की भारतीय नौसेना की सराहना, कहा- 'समुद्र के ज़रिए समृद्धि और शक्ति' बढ़ाने की नई सोच के साथ बढ़ना होगा
विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय नौसेना की तारीफ़ करते हुए कहा कि यह दुनिया की सबसे ताकतवर नौसेनाओं में से एक है। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी मज़बूत मौजूदगी दर्ज करा रही है। रक्षा मंत्री ने कहा, "आपकी बहादुरी की वजह से हमारी नौसेना दुनिया की सबसे ताकतवर नौसेनाओं में गिनी जाती है। भारतीय नौसेना इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी मौजूदगी का एहसास करा रही है। मुझे इस बात का भी गर्व है कि जब भी देश और दुनिया को ज़रूरत पड़ी है, हमारी नौसेना ने हमेशा अपना फ़र्ज़ निभाया है।"
हर हालात में डटे रहने वाले जवानों को किया नमन
राजनाथ सिंह सोमवार शाम विशाखापत्तनम में नेवल डॉकयार्ड में आयोजित 'बड़ा खाना' कार्यक्रम में नौसेना के जवानों को संबोधित कर रहे थे। रक्षा मंत्री ने नौसेना के जवानों को भविष्य में आने वाली चुनौतियों के बारे में आगाह किया। इस मौके पर नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन और ईस्टर्न नेवल कमांड के फ्लैग ऑफ़िसर कमांडिंग-इन-चीफ़ संजय भल्ला भी मौजूद थे। राजनाथ सिंह ने कहा, "आज ईस्टर्न नेवल कमांड द्वारा आयोजित 'बड़ा खाना' में शामिल होकर मुझे बहुत खुशी हो रही है। मैं उन बहादुर जवानों को नमन करता हूँ जो हर हालात में डटे रहते हैं। जब कोई नाविक समुद्र में देश की रक्षा करता है, तो उसका परिवार घर पर एक अलग मोर्चे को संभालता है। रक्षा मंत्री के तौर पर, मैं यहाँ सिर्फ़ रस्म निभाने नहीं आया हूँ। मैं यह कहने आया हूँ कि आपका रक्षा मंत्री आपके साथ रहा है और आगे भी आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहेगा।"
1971 की लड़ाई का भी किया ज़िक्र
उन्होंने कहा, "मुझे इस बात पर भी गर्व है कि जब भी देश और दुनिया को ज़रूरत पड़ी है, हमारी नौसेना ने हमेशा अपना कर्तव्य निभाया है। समुद्र की लहरें कभी यह नहीं पूछतीं कि आज मौसम कैसा है; वे बस अपना काम करती रहती हैं। ठीक उसी तरह, हमारे सैनिक कभी यह नहीं पूछते कि चुनौती क्या है या कितनी मुश्किल है; वे अपना कर्तव्य निभाते रहते हैं। उनकी ज़िम्मेदारी बस यही है कि हमारी समुद्री सीमाएँ सुरक्षित रहें और दुनिया भर में तिरंगे का सम्मान बना रहे।" 1971 की लड़ाई का ज़िक्र करते हुए, रक्षा मंत्री ने भारतीय नौसेना की शानदार विरासत को याद किया। उन्होंने कहा, "ऑपरेशन ट्राइडेंट के दौरान, जब भारतीय नौसेना ने कराची बंदरगाह पर हमला किया, तो दुनिया हैरान रह गई थी। आपने साबित कर दिया कि भारतीय नौसेना न केवल समुद्र की रक्षा करती है, बल्कि दुश्मन के इलाके में घुसकर हमला करने की क्षमता भी रखती है।"
हमारे पास जीत हासिल करने का जज़्बा
कार्यक्रम के दौरान, रक्षा मंत्री ने भविष्य की चुनौतियों के बारे में भी आगाह किया। उन्होंने कहा, "मौजूदा दौर गंभीर चुनौतियों से भरा है। आज 21वीं सदी में हम जिन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, वे पहले की तुलना में ज़्यादा मुश्किल हैं।" रक्षा मंत्री ने बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने और चुनौतियों का सामना करने के लिए भारतीय नौसेना की तारीफ़ भी की। उन्होंने कहा, "आपने बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाला है। आज हमारे पास स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर, परमाणु-संचालित पनडुब्बियाँ, स्टील्थ फ्रिगेट, स्कॉर्पीन-क्लास पनडुब्बियाँ और हर तरह के हथियार हैं, और सबसे बड़ी बात यह है कि हमारे पास जीत हासिल करने का जज़्बा है। भारतीय नौसेना के हर कदम में भारत का आत्मविश्वास झलकता है।"
'समुद्र के ज़रिए समृद्धि और शक्ति को आगे बढ़ाने' की नई सोच
अपनी बात खत्म करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा, "अब हमें 'समुद्र के ज़रिए समृद्धि और शक्ति को आगे बढ़ाने' की नई सोच के साथ आगे बढ़ना होगा। हमें समुद्र को शक्ति के स्रोत और एक अवसर के रूप में देखना चाहिए। समुद्र हमारे लिए विकास का रास्ता भी है।"
(इनपुटः ANI)
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