फ्लाइट में मेडिकल इमरजेंसी के बाद बच्ची की मौत का मामला, दिल्ली HC ने रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का दिया आदेश
नई दिल्ली। लंदन से नई दिल्ली आ रही वर्जिन अटलांटिक की फ्लाइट में मेडिकल इमरजेंसी के बाद साढ़े छह साल की बच्ची की मौत के मामले में उसके माता-पिता ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। याचिका में 8 सितंबर 2026 को हुई घटना और उसके बाद के इलाज से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित रखने, सील करने और अदालत के सामने पेश करने की मांग की गई है। याचिका के मुताबिक, बच्ची ज़ैनब मोहम्मदी अपने माता-पिता और भाई के साथ यात्रा कर रही थी, तभी वह विमान में बेहोश हो गई। बाद में 16 अक्टूबर 2026 को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में उसकी मौत हो गई।
दिल्ली HC ने संबंधित विभागों और एयरलाइन को जारी किया नोटिस
जस्टिस अमित महाजन की अदालत ने इस मामले में मिनिस्ट्री ऑफ सिविल एविएशन, DGCA, ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS), एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया और मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स सहित कई पक्षों को नोटिस जारी किया है। इनमें मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर, दिल्ली सरकार के पुलिस कमिश्नर, SHO IGI पुलिस स्टेशन, DIAL, वर्जिन अटलांटिक एयरवेज लिमिटेड और मेदांता अस्पताल का संचालन करने वाली ग्लोबल हेल्थ लिमिटेड भी शामिल हैं। कुछ प्रतिवादियों की ओर से उनके वकीलों ने नोटिस स्वीकार किए।
हाई कोर्ट ने रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का दिया निर्देश
6 नवंबर को पारित आदेश में जस्टिस अमित महाजन ने संबंधित पक्षों को याचिका के पैराग्राफ 18 में बताए गए रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा, "रेस्पोंडेंट्स को निर्देश दिया जाता है कि वे मौजूदा पिटीशन के पैराग्राफ 18 में बताए गए रिकॉर्ड को आज तक उपलब्ध सीमा तक सुरक्षित रखें।"
अदालत ने प्रतिवादियों को अपना जवाब दाखिल करने की अनुमति भी दी है। मामले की अगली सुनवाई 5 फरवरी 2027 को निर्धारित की गई है।
माता-पिता ने फ्लाइट में चिकित्सा सुविधाओं की कमी का लगाया आरोप
याचिका में माता-पिता ने आरोप लगाया है कि फ्लाइट के दौरान बच्ची की मेडिकल इमरजेंसी से निपटने के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। उनके मुताबिक, बच्ची का ब्लड प्रेशर नहीं मापा जा सका क्योंकि इसके लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरण की बैटरी उपलब्ध नहीं थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि विमान में बच्चों के लिए कैनुला उपलब्ध नहीं था और फ्लाइट को डायवर्ट करने की उनकी मांग भी स्वीकार नहीं की गई।
IGI एयरपोर्ट पर इलाज की सुविधा को लेकर भी उठाए सवाल
याचिका में कहा गया है कि IGI एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 पर विमान के उतरने के समय एयरक्राफ्ट में एंबुलेंस उपलब्ध नहीं थी। माता-पिता का आरोप है कि टर्मिनल-3 की मेडिकल फैसिलिटी में मौजूद डॉक्टर ने बताया कि वहां 12 साल से कम उम्र के बच्चों के इलाज की व्यवस्था नहीं थी। इसके बाद बच्ची को एयरपोर्ट पर कार्डियक अरेस्ट हुआ और उसे करीब डेढ़ घंटे तक कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) की जरूरत पड़ी।
मेदांता अस्पताल में भर्ती हुई थी बच्ची, 16 अक्टूबर को हुई मौत
याचिका के अनुसार, एक अन्य मेडिकल फैसिलिटी में बच्ची की पल्स कम हो गई थी और वहां भी CPR दिया गया। इसके बाद 8 और 9 सितंबर 2026 की दरमियानी रात उसे एंबुलेंस से गुरुग्राम के मेदांता द मेडिसिटी अस्पताल ले जाया गया। सुबह 1:44 बजे उसे अस्पताल के पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (PICU) में भर्ती कराया गया। CT स्कैन में हाइपोक्सिक इस्केमिक इंसल्ट के कारण फैला हुआ सेरेब्रल एडिमा दिखाई दिया। याचिका में बताया गया है कि 16 अक्टूबर 2026 को बच्ची की मौत हो गई और उसी दिन अलीगढ़ में उसे दफनाया गया। परिवार के मुताबिक, बच्ची का पोस्टमॉर्टम नहीं कराया गया।
पुलिस में शिकायत के बावजूद FIR दर्ज नहीं होने का दावा
बच्ची के माता-पिता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उन्होंने इस घटना को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन अभी तक FIR दर्ज नहीं हुई है। याचिकाकर्ताओं को आशंका है कि यदि संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित नहीं रखे गए तो भविष्य में घटना की जांच और जिम्मेदारी तय करने में मुश्किल हो सकती है। उनका कहना है कि रिकॉर्ड नष्ट होने की स्थिति में उनके पास अपनी शिकायत के समर्थन में जरूरी सबूत नहीं रहेंगे।
फ्लाइट और CCTV रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की मांग
याचिका में कहा गया है कि फ्लाइट रिकॉर्ड, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) की रिकॉर्डिंग, टर्मिनल-3 का CCTV फुटेज और मेडिकल रिकॉर्ड घटना के हर चरण की जानकारी हासिल करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। याचिकाकर्ताओं के वकीलों के मुताबिक, ये रिकॉर्ड संबंधित प्रतिवादियों के पास हैं और इनमें से कई इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड हैं, जिन पर समय के साथ नया डेटा ओवरराइट हो सकता है। इसलिए परिवार ने अदालत से इन रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने, सील करने और हाई कोर्ट के सामने पेश करने का निर्देश देने की मांग की है।
पिता और मां की ओर से वकीलों ने रखी दलीलें
इस मामले में याचिकाकर्ताओं के पिता एवेस मोहम्मदी और मां की ओर से एडवोकेट डॉ. फारुख खान के साथ एडवोकेट अमूलदीप, राशि, विधि और मदीहा अदालत में पेश हुए। वकीलों ने दलील दी कि घटना की वास्तविक परिस्थितियों और संबंधित पक्षों की भूमिका का पता लगाने के लिए सभी उपलब्ध रिकॉर्ड सुरक्षित रखना जरूरी है। फिलहाल हाई कोर्ट ने रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है और मामले की अगली सुनवाई 5 फरवरी 2027 को होगी। (Source: ANI)
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