दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: यूक्रेन के नागरिकों की याचिका खारिज, NIA टेरर केस में 180 दिन तक बढ़ी जांच
नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को यूक्रेन के उन नागरिकों की याचिका खारिज कर दी, जिन पर नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) द्वारा दर्ज एक टेरर केस में आरोप हैं। उन्होंने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें जांच की अवधि 90 दिन से बढ़ाकर 180 दिन कर दी गई थी।
अप्रैल में NIA ने सात विदेशी नागरिकों को किया था गिरफ्तार
जस्टिस मधु जैन ने हर्बा पेट्रो और यूक्रेन के अन्य नागरिकों द्वारा जांच की अवधि बढ़ाने के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि विस्तृत आदेश शाम तक या मंगलवार तक अपलोड कर दिया जाएगा। इस मामले में NIA ने अप्रैल 2026 में यूक्रेन के छह नागरिकों और अमेरिका के एक नागरिक को गिरफ्तार किया था। बीते 11 अगस्त को दिल्ली हाई कोर्ट ने जांच की अवधि 90 दिन से बढ़ाकर 180 दिन करने को चुनौती देने वाली यूक्रेनी नागरिकों की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
NIA ने कहा- ट्रायल कोर्ट ने न्यायिक विवेक से लिया फैसला
याचिका का विरोध करते हुए, NIA ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने अपने न्यायिक विवेक का इस्तेमाल करने और स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (SPP) की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद जांच की अवधि बढ़ाने का आदेश दिया था। स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर राहुल त्यागी और वकील जतिन खत्री NIA की ओर से पेश हुए और कहा कि कोर्ट SPP की रिपोर्ट और अवधि बढ़ाने की मांग वाली अर्जी पर विचार करने के बाद जांच की अवधि बढ़ा सकता है।
जांच की प्रगति की जानकारी सार्वजनिक न करने की दी दलील
NIA ने यह भी कहा कि जांच की प्रगति के संबंध में गोपनीयता बनाए रखने के लिए अर्जी को जानबूझकर सामान्य रखा गया था। NIA ने कहा, "हम यह नहीं बता सकते कि हम कितनी दूर आ गए हैं और हमें कितनी दूर जाना है।" एजेंसी ने आगे तर्क दिया कि आरोपियों ने कोई जमानत अर्जी दाखिल नहीं की थी, बल्कि इस आधार पर रिहाई की मांग की थी कि जांच पूरी नहीं हुई है।
याचिकाकर्ताओं ने डिफॉल्ट जमानत के अधिकार का दिया हवाला
सीनियर वकील नित्या रामकृष्णन और वकील नितिन सलूजा याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए और NIA की दलीलों का विरोध किया। याचिकाकर्ताओं के वकील ने तर्क दिया कि जांच की अवधि गलत तरीके से बढ़ाए जाने के कारण डिफॉल्ट जमानत का उनका अधिकार खत्म हो गया है। उन्होंने कहा कि जमानत का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 से मिलता है। वकील ने आगे तर्क दिया कि ट्रायल कोर्ट ने जांच की अवधि एक बार में ही 90 दिन बढ़ा दी थी।
डिवीजन बेंच ने अपील पर पहले सुनाया था अहम फैसला
इससे पहले, 4 अगस्त को दिल्ली हाई कोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने छह यूक्रेनी नागरिकों की अपील का निपटारा कर दिया था। इन नागरिकों ने अपनी हिरासत और जांच की अवधि बढ़ाए जाने को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि NIA एक्ट के तहत जांच की अवधि बढ़ाने के आदेश के खिलाफ अपील नहीं की जा सकती।
अनामुल अंसारी केस के फैसले का भी दिया गया हवाला
अप्रैल 2026 में NIA द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद से ये यूक्रेनी नागरिक न्यायिक हिरासत में हैं। जांच की अवधि 90 दिन से बढ़ाकर 180 दिन कर दी गई थी। पिछली सुनवाई के दौरान, अपीलकर्ताओं की ओर से पेश हुईं सीनियर एडवोकेट नित्या रामकृष्णन ने अनामुल अंसारी मामले में दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के 12 दिसंबर, 2024 के फैसले का हवाला दिया था। उस मामले में, हाई कोर्ट ने कई प्रावधानों और पहले के फैसलों पर विचार करने के बाद कहा था कि जांच की अवधि बढ़ाने से जुड़े आदेश के खिलाफ अपील की जा सकती है। (भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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