दिल्ली हाई कोर्ट ने रेप केस में PMCH के मेडिकल छात्र को अग्रिम जमानत देने से किया इनकार
नई दिल्ली (भारत)। दिल्ली हाई कोर्ट ने रेप के एक मामले में पटना मेडिकल कॉलेज (PMCH) के मेडिकल छात्र अक्षय आदित्य को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। आरोपी के खिलाफ दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज है। शिकायतकर्ता के आरोपों के अनुसार, आरोपी नवंबर 2025 में इंस्टाग्राम के जरिए उसके संपर्क में आया था। इसके बाद दोनों के बीच मुलाकातें हुईं और आरोपी पर शादी का भरोसा देकर जबरन शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगा है।
इंस्टाग्राम पर मुलाकात के बाद होटल में जबरन संबंध बनाने का आरोप
शिकायतकर्ता के मुताबिक, आरोपी ने नवंबर 2025 के पहले सप्ताह में इंस्टाग्राम के जरिए उससे संपर्क किया था। उसने बार-बार शादी करने का भरोसा दिलाया और कहा कि दोनों परिवारों की सहमति से विवाह होगा। आरोप है कि 21 दिसंबर 2025 को गाजियाबाद के वैशाली स्थित एक होटल में आरोपी ने शादी का भरोसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसने स्पष्ट विरोध किया था, लेकिन इसके बावजूद आरोपी ने उसकी इच्छा के विरुद्ध जबरन संबंध बनाए।
सुंदर नर्सरी में मुलाकात के बाद दूसरे स्थान पर ले जाने का आरोप
शिकायत के अनुसार, 8 मार्च 2026 को आरोपी नई दिल्ली की सुंदर नर्सरी में पीड़िता से मिला था। इसके बाद वह उसे अपने दोस्तों से मिलवाने के बहाने पास के एक सुनसान घर में ले गया। आरोप है कि वहां उसने शिकायतकर्ता को काबू में कर लिया और उसकी मर्जी तथा सहमति के बिना जबरन यौन संबंध बनाए। इस मामले में आरोपी के खिलाफ हजरत निजामुद्दीन थाने में FIR दर्ज की गई है।
जस्टिस सचिन दत्ता ने अग्रिम जमानत याचिका की खारिज
जस्टिस सचिन दत्ता ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए अगस्त 2026 में दी गई अंतरिम सुरक्षा भी समाप्त कर दी। 30 अक्टूबर को दिए गए फैसले में अदालत ने कहा कि कथित अपराध अलग-अलग मौकों पर हुए हैं और मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। जांच एजेंसी ने आरोपी से हिरासत में पूछताछ की विशेष आवश्यकता भी जताई है।
जस्टिस दत्ता ने कहा, "इस कोर्ट की राय में, यह कोई ऐसा 'असाधारण मामला' नहीं है जिसमें अग्रिम जमानत जैसी विशेष राहत दी जाए।"
अदालत ने अंतरिम राहत को बताया था अस्थायी व्यवस्था
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 17 अगस्त 2026 को आरोपी को दी गई राहत केवल एक अंतरिम व्यवस्था थी, जो सुनवाई की अगली तारीख तक लागू थी। इसका उद्देश्य राज्य सरकार की ओर से विस्तृत जवाब दाखिल किए जाने तक अंतरिम सुरक्षा देना था। 17 सितंबर 2026 को भी इसी शर्त के साथ यह राहत जारी रखी गई थी।
जस्टिस दत्ता ने स्पष्ट किया, "यह याचिका पर सुनवाई के बाद अग्रिम जमानत देने का कोई आदेश नहीं था।"
CDR, होटल रिकॉर्ड और डिलीट चैट को अदालत ने माना महत्वपूर्ण
अदालत ने कहा कि मामले में बाद में सामने आई नई जानकारियां परिस्थितियों में महत्वपूर्ण बदलाव दर्शाती हैं। इनमें स्टेटस रिपोर्ट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), लोकेशन और होटल के रिकॉर्ड शामिल हैं। इसके अलावा, आरोपी का पुराना फोन नहीं मिलना, इंस्टाग्राम पर हुई बातचीत का डिलीट होना और आरोपी के बयानों में विरोधाभास भी अदालत के संज्ञान में आए।
इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने कहा कि 17 अगस्त 2026 को दी गई अंतरिम सुरक्षा अब समाप्त की जाती है। इसके साथ ही आरोपी को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया गया।
आरोपी पटना मेडिकल कॉलेज में कर रहा है पोस्ट ग्रेजुएशन
शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपी अक्षय आदित्य पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल छात्र है और पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) से सर्जरी में मास्टर्स की पढ़ाई कर रहा है। शिकायत में दिसंबर 2025 और मार्च 2026 की दो अलग-अलग घटनाओं का उल्लेख किया गया है। अदालत ने मामले की जांच अधूरी होने और जांच एजेंसी की हिरासत में पूछताछ की मांग को ध्यान में रखते हुए अग्रिम जमानत देने से इनकार किया है। (Source: ANI)
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