दिल्ली उच्च न्यायालय शुक्रवार को भारतीय युवा कांग्रेस द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई
नई दिल्ली (भारत)। दिल्ली उच्च न्यायालय शुक्रवार को भारतीय युवा कांग्रेस (आईवाईसी) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें दिल्ली पुलिस द्वारा जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार करने को चुनौती दी गई है।
1 अक्टूबर के पुलिस आदेश को चुनौती दी
वरिष्ठ अधिवक्ता संजय घोष ने गुरुवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांब्रे की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख किया। न्यायालय ने मामले को शुक्रवार को सूचीबद्ध करने पर सहमति व्यक्त की। न्यायालय ने यह भी कहा कि यदि 24 घंटों के भीतर मामले को सूचीबद्ध नहीं किया जाता है तो वकील इसे पुनः उल्लेख कर सकते हैं। यह याचिका आईवाईसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने दायर की है, जिसमें 1 अक्टूबर के पुलिस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें संगठन के प्रदर्शन आयोजित करने के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया गया था।
पुलिस सार्वजनिक सभाओं को नियंत्रित कर सकती है
याचिका के अनुसार, आईवाईसी ने 25 सितंबर को पुलिस से लगभग 100-150 लोगों के साथ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के लिए अनुमति मांगी थी। संगठन ने कहा कि वह सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने से संबंधित सभी शर्तों का पालन करने के लिए तैयार है। याचिका में कहा गया है कि बार-बार संपर्क करने के बावजूद पुलिस ने अपना फैसला 1 अक्टूबर को सुनाया, जो विरोध प्रदर्शन के लिए प्रस्तावित पहली तारीख भी थी। भारतीय एवं बाल समुदाय (आईवाईसी) ने तर्क दिया है कि पुलिस सार्वजनिक सभाओं को नियंत्रित कर सकती है, लेकिन किसी विशेष घटना की परिस्थितियों पर विचार किए बिना पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगा सकती।
भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
संगठन का दावा है कि पुलिस का यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) और 19(1)(ख) के तहत उसके भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा शांतिपूर्ण सभा के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। याचिका में विरोध प्रदर्शनों और सार्वजनिक सभाओं से संबंधित दिशानिर्देशों के कथित यांत्रिक अनुप्रयोग पर भी सवाल उठाया गया है। यह याचिका अधिवक्ता रूपेश सिंह भदौरिया के माध्यम से दायर की गई है।
(इनपुटः ANI)
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